क्या चांद पर फिर इंसान को भेजने का सपना टूटेगा? नासा का आर्टेमिस-2 मिशन अचानक स्थगित, तकनीकी खराबी ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की धड़कनें!

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संवाद 24 नई दिल्ली। अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया से एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। आधी सदी के लंबे इंतजार के बाद चांद की सतह पर दोबारा इंसान को उतारने के अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के सबसे महत्वाकांक्षी मिशन ‘आर्टेमिस-2’ (Artemis-II) को फिलहाल टाल दिया गया है। नासा चीफ ने एक आपात बैठक के बाद यह कड़ा फैसला लिया है। इस मिशन के स्थगित होने से न केवल वैज्ञानिक जगत में हलचल मच गई है, बल्कि उन करोड़ों लोगों को भी झटका लगा है जो इस ऐतिहासिक पल का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

आखिर क्यों रोका गया मिशन?
आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की कक्षा के चारों ओर चक्कर लगाकर वापस धरती पर आना था। लेकिन अंतिम तैयारियों के दौरान नासा के ओरियन स्पेसक्राफ्ट (Orion Spacecraft) और स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट में गंभीर तकनीकी खामियां पाई गईं। जांच के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि स्पेसक्राफ्ट की लाइफ सपोर्ट सिस्टम और हीट शील्ड में कुछ ऐसी दिक्कतें हैं, जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। नासा प्रमुख बिल नेल्सन ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा, “हम अपने अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं कर सकते। अंतरिक्ष की गहराइयों में छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है। जब तक हम 100% आश्वस्त नहीं हो जाते, हम लॉन्च पैड की ओर कदम नहीं बढ़ाएंगे।”

तकनीकी पहेली: हीट शील्ड और बैटरी की समस्या
सूत्रों के अनुसार, ओरियन कैप्सूल की हीट शील्ड, जो अंतरिक्ष यात्रियों को धरती के वायुमंडल में प्रवेश करते समय अत्यधिक तापमान से बचाती है, उसमें दरारें और असामान्य घिसावट देखी गई थी। इसके अलावा, ओरियन की बैटरी सिस्टम और वेंटिलेशन सर्किट में भी खराबी पाई गई। इन समस्याओं को ठीक करने के लिए अब कई महीनों का समय लग सकता है, जिसका सीधा मतलब है कि मिशन अब 2025 या उसके बाद ही संभव हो पाएगा।

आर्टेमिस मिशन: क्यों है यह इतना खास?
आर्टेमिस मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहली महिला और पहले अश्वेत व्यक्ति को उतारना है। यह नासा के उस बड़े प्लान का हिस्सा है जिसके तहत चंद्रमा पर एक स्थायी बेस कैंप बनाया जाना है। इस मिशन की सफलता ही भविष्य में मंगल ग्रह (Mars) तक जाने वाले इंसानी सफर का रास्ता साफ करेगी। भारत भी अब आर्टेमिस समझौते का हिस्सा है, ऐसे में इसरो (ISRO) की भी इस मिशन पर पैनी नजर बनी हुई है।

चीन से बढ़ती होड़ और नासा का दबाव
जानकारों का मानना है कि अंतरिक्ष की रेस में अब चीन अमेरिका को कड़ी टक्कर दे रहा है। चीन ने 2030 तक चांद पर इंसान भेजने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में आर्टेमिस-2 के टलने से नासा पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि, नासा का तर्क है कि जल्दबाजी में किया गया कोई भी मिशन न केवल धन की बर्बादी होगा, बल्कि अमेरिका की अंतरिक्ष साख को भी चोट पहुंचा सकता है।

भविष्य की राह और चुनौतियां
मिशन के टलने से लागत में भी भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। नासा अब पूरे सिस्टम की दोबारा जांच कर रहा है। फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर पर वैज्ञानिक दिन-रात काम कर रहे हैं ताकि उन बारीकियों को समझा जा सके जिनकी वजह से यह मिशन रुका है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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