दुनिया की धड़कनें तेज: डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को 15 दिन का ‘अल्टीमेटम’, क्या पश्चिम एशिया में छिड़ने वाला है भीषण युद्ध?
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संवाद 24 नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के आसमान पर युद्ध के काले बादल और गहरे हो गए हैं। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए ईरान को सीधे तौर पर 15 दिनों का अल्टीमेटम जारी कर दिया है। इस अल्टीमेटम ने न केवल तेहरान में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि पूरी दुनिया को एक संभावित सैन्य टकराव की चिंता में डाल दिया है। ट्रंप के इस कदम को उनकी ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (अधिकतम दबाव) नीति की वापसी के रूप में देखा जा रहा है, जिसने वैश्विक कूटनीति में खलबली पैदा कर दी है।
अल्टीमेटम के पीछे की मुख्य वजहें
ट्रंप प्रशासन की ओर से दिए गए इस अल्टीमेटम का सीधा संबंध ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्र में उसके बढ़ते प्रभाव से है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों और ट्रंप के बयानों के अनुसार, ईरान द्वारा समर्थित समूहों की गतिविधियां अमेरिकी हितों के लिए खतरा बन रही हैं। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर ईरान ने अपने परमाणु संवर्धन (Nuclear Enrichment) और मिसाइल परीक्षणों पर रोक नहीं लगाई, तो अमेरिका ‘कठोर सैन्य कार्रवाई’ से पीछे नहीं हटेगा। इस बार यह केवल प्रतिबंधों तक सीमित नहीं रहने वाला है।
इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
यह अल्टीमेटम ऐसे समय में आया है जब इजरायल और ईरान के बीच सीधे टकराव की स्थिति बनी हुई है। ट्रंप ने सत्ता संभालते ही यह साफ कर दिया था कि वे इजरायल की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह दबाव ईरान को वार्ता की मेज पर लाने या उसे पूरी तरह अलग-थलग करने की रणनीति का हिस्सा है। दूसरी ओर, ईरान ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि वह किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेगा और अपनी रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
ग्लोबल मार्केट और तेल की कीमतों पर असर
ट्रंप की इस चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। यदि इन 15 दिनों के भीतर स्थिति नहीं सुधरती है, तो खाड़ी देशों से होने वाली तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। शेयर बाजारों में भी अनिश्चितता का माहौल है, क्योंकि निवेशक इस बात को लेकर आशंकित हैं कि क्या यह केवल एक राजनीतिक दांव है या अमेरिका वास्तव में एक और बड़े युद्ध की तैयारी कर रहा है।
शांति की उम्मीद या महायुद्ध का आगाज?
संयुक्त राष्ट्र और कई यूरोपीय देशों ने इस मामले में संयम बरतने की अपील की है। दुनिया के बड़े नेता इस समय पर्दे के पीछे से तेहरान और वॉशिंगटन के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं ताकि दुनिया को एक और विनाशकारी युद्ध से बचाया जा सके। ट्रंप का यह कदम उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को दर्शाता है, जहाँ वे अमेरिका को ग्लोबल पुलिस की भूमिका में वापस लाकर अपनी ताकत का एहसास कराना चाहते हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें उन 15 दिनों पर टिकी हैं, जो भविष्य का इतिहास तय करेंगे।






