पूरी दुनिया की पाबंदियां फेल! रूस को भारत पर अटूट भरोसा; क्या कच्चा तेल फिर बनेगा ‘पावर गेम’ का नया हथियार?

Share your love

संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक राजनीति के बिसात पर इस वक्त भारत और रूस की दोस्ती एक ऐसी मिसाल पेश कर रही है, जिसने पश्चिमी देशों की नींद उड़ा दी है। रूस ने एक बार फिर खुले तौर पर यह ऐलान किया है कि उसे भारत पर पूरा भरोसा है और वह जानता है कि भारत उससे कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदना जारी रखेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाकर उसे अलग-थलग करने की कोशिश कर रही है। रूस का यह आत्मविश्वास केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि गहरा रणनीतिक संकेत है।

पश्चिमी देशों के दबाव को भारत ने किया दरकिनार
रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद से अमेरिका और यूरोपीय संघ ने लगातार भारत पर यह दबाव बनाने की कोशिश की कि वह रूस से तेल का आयात कम करे या पूरी तरह बंद कर दे। लेकिन भारत ने हमेशा अपनी ‘नेशनल इंटरेस्ट’ (राष्ट्रीय हित) की नीति को सर्वोपरि रखा है। रूस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और वह अपने ऊर्जा सुरक्षा के फैसलों को किसी बाहरी दबाव में नहीं लेता। भारत का यह रुख दिखाता है कि नई दिल्ली अब ग्लोबल पॉलिटिक्स में किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय अपनी जरूरतों के हिसाब से रास्ते चुनती है।

सस्ता रूसी तेल और भारतीय अर्थव्यवस्था का पहिया
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है। रूस से मिलने वाला रियायती (Discounted) कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं रहा है। जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं, तब रूसी तेल ने भारत में महंगाई को नियंत्रित करने और घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करने में बड़ी भूमिका निभाई। रूस ने स्पष्ट किया है कि वह भारत को न केवल तेल बेचना जारी रखेगा, बल्कि भुगतान की प्रक्रियाओं (Payment Mechanisms) को भी और अधिक सरल बनाने पर काम कर रहा है ताकि डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके।

रूस का ‘कॉन्फिडेंस’ और भविष्य की योजनाएं
रूस की ओर से आए हालिया बयानों में यह भी संकेत दिया गया है कि दोनों देश केवल तेल की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहेंगे। अब ध्यान आर्कटिक क्षेत्र में तेल और गैस के नए स्रोतों की खोज और ‘चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारे’ को सक्रिय करने पर है। रूस को भरोसा है कि भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए वह सबसे भरोसेमंद साथी साबित होगा। मॉस्को का मानना है कि भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) ही वह मुख्य कारण है जिसकी वजह से पश्चिमी देशों के ‘प्राइस कैप’ जैसे हथकंडे भी नाकाम साबित हुए हैं।

ऊर्जा कूटनीति में भारत की नई धमक
इस पूरे घटनाक्रम ने भारत को वैश्विक मंच पर एक ऐसी स्थिति में ला खड़ा किया है जहाँ वह रूस और अमेरिका, दोनों के साथ अपने संबंधों को बखूबी बैलेंस कर रहा है। एक तरफ भारत ‘क्वाड’ (QUAD) का हिस्सा है, वहीं दूसरी तरफ वह रूस के साथ अपने दशकों पुराने रक्षा और ऊर्जा संबंधों को और मजबूत कर रहा है। रूस का यह कहना कि ‘भारत तेल खरीदना जारी रखेगा’, दरअसल भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति पर एक मुहर है।

चुनौतियां और आगे की राह
हालांकि, यह रास्ता इतना आसान भी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों पर पाबंदियों के कारण लेनदेन में कुछ तकनीकी दिक्कतें आती रही हैं। लेकिन रूस और भारत के बैंक अब स्थानीय मुद्राओं (Rupee-Ruble) में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। रूस ने आश्वासन दिया है कि वह भारत की जरूरतों के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहेगा।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News