ढाका में ‘लाल-हरा’ इंकलाब: तारिक रहमान की BNP ने रचा इतिहास, 17 साल बाद सत्ता में वापसी
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संवाद 24 नई दिल्ली । पड़ोसी देश बांग्लादेश की सियासत में आज एक नया सूरज उगा है। दशकों के दमन और लंबे निर्वासन के बाद, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 13वें संसदीय चुनावों में ऐतिहासिक ‘लैंडस्लाइड’ जीत दर्ज की है। शुरुआती रुझानों और दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP ने 300 सदस्यीय संसद में स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। 2024 के छात्र आंदोलन और शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद, यह पहला मौका था जब बांग्लादेश की जनता ने स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
हसीना के बिना पहला चुनाव: लोकतंत्र की नई इबारत
करीब 15 साल तक शेख हसीना और ‘अवामी लीग’ के एकछत्र राज के अंत के बाद यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। अवामी लीग के चुनावी मैदान से बाहर रहने के कारण मुकाबला मुख्य रूप से तारिक रहमान की BNP और जमात-ए-इस्लामी के बीच माना जा रहा था। हालांकि, जनता ने अपना स्पष्ट जनादेश BNP के पक्ष में दिया, जिससे यह साफ हो गया कि बांग्लादेश अब एक नए राजनीतिक युग में प्रवेश कर चुका है।
तारिक रहमान: निर्वासन से सत्ता के शिखर तक
BNP की इस जीत के असली नायक तारिक रहमान माने जा रहे हैं। करीब 17 सालों तक लंदन में निर्वासन में रहने के बाद, रहमान ने तकनीक के माध्यम से पार्टी को एकजुट रखा। अपनी जीत के बाद उन्होंने इसे “जनता की जीत” बताया है। जैसे ही ढाका में जीत की खबर फैली, हजारों समर्थक सड़कों पर उतर आए। हालांकि, पार्टी ने विजय जुलूस निकालने के बजाय शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।
जनादेश के साथ ‘जुलाई चार्टर’ पर मुहर
इन चुनावों की सबसे खास बात यह रही कि मतदान के साथ-साथ ‘जुलाई चार्टर’ पर जनमत संग्रह भी हुआ। इसमें बहुसंख्यक आबादी ने संवैधानिक सुधारों के पक्ष में मतदान किया, जिसका उद्देश्य भविष्य में किसी भी नेता को तानाशाह बनने से रोकना और सत्ता का विकेंद्रीकरण करना है।
भारत के साथ संबंधों पर नजर
भारत के संदर्भ में, तारिक रहमान की सरकार के लिए संबंधों को संतुलित करना एक बड़ी चुनौती होगी। चुनाव प्रचार के दौरान BNP ने संकेत दिए हैं कि वे एक रणनीतिक सहयोगी के रूप में भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करना चाहेंगे, बशर्ते आपसी संप्रभुता का सम्मान हो।






