लश्कर-ए-तैयबा कमांडर ने हमास से रिश्तों का किया खुलासा, दोहा की बैठक बनी बदलाव का संकेत
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संवाद 24 नई दिल्ली। पाकिस्तान से एक ऐसा खुलासा सामने आया है जिसने न सिर्फ दक्षिण एशिया की सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है, बल्कि वैश्विक आतंकवाद के परिदृश्य को भी नया रूप दे सकता है। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक वरिष्ठ कमांडर फैसल नदीम ने हमास जैसे मध्य-पूर्वी संगठन से अपने संबंधों और बैठक की पुष्टि की है, जिसमें उन्होंने दोहा (कतर) में मीटिंग होने की बात भी स्वीकार की है। यह खुलासा एक वीडियो के रूप में सार्वजनिक हुआ है, जिसमें नदीम ने कहा कि वह 2024 में हमास के शीर्ष नेतृत्व से मिले थे और साथ में सैफुल्लाह कसूरी भी मौजूद था — वही व्यक्ति जिसे पहलगाम जैसे हमलों का संदिग्ध माना जाता है।
दोहा में बैठक: क्या था असली मकसद?
नदीम का दावा है कि वे हमास के शीर्ष कद के नेताओं से मिले, जिसमें बताया गया कि बैठक 2024 में कतर के दोहा में हुई थी। यह पहली बार नहीं है जब दोनों संगठनों के बीच संपर्क की खबर आई है। इससे पहले भी हमास के वरिष्ठ नेता नाजी जहीर की पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा से उच्च-स्तरीय मुलाकात के वीडियो इंटरनेट पर फैल चुके हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे खुलासे यह संकेत देते हैं कि हमास और लश्कर-ए-तैयबा उच्च-स्तरीय तालमेल और रणनीतिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं — खासकर लॉजिस्टिक्स, ऑपरेशन, प्रचार और प्रशिक्षण के क्षेत्रों में।
पिछले संकेत: मुलाकातें और सार्वजनिक संपर्क
ये नई जानकारी ऐसे ही नहीं आई है। जनवरी की शुरुआत में सामने आया एक वीडियो दिखाता है कि हमास के वरिष्ठ कमांडर नाजी जहीर पाकिस्तान के गुजरांवाला में लश्कर-ए-तैयबा के एक नेता रशीद अली संधू के साथ खुले आम एक कार्यक्रम में मौजूद थे। यह कार्यक्रम पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) द्वारा आयोजित था — जिसे अक्सर लश्कर का राजनीतिक चेहरा माना जाता है। इस बैठक के वीडियो ने दोनों संगठनों के बीच बढ़ते आत्म-विश्वास और संभावित सहयोग को दर्शाया है। कहा जा रहा है कि नाजी जहीर लंबे समय से पाकिस्तान में सक्रिय हैं और उन्होंने पिछले कुछ सालों में कई बार देश का दौरा किया है।
सुरक्षा विश्लेषकों की चिंता
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ये बैठकें सिर्फ औपचारिक मुलाकातें नहीं हैं, बल्कि ऐसा संकेत देती हैं कि दोनों समूह आपसी अनुभव, संसाधन और नेटवर्क साझा करने की योजना बना रहे हैं। यह कदम न केवल दक्षिण एशिया को प्रभावित कर सकता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के स्वरूप को भी बदल सकता है। हमास और लश्कर-ए-तैयबा दोनों ही अमेरिका समेत कई देशों द्वारा आतंकवादी संगठनों के रूप में सूचीबद्ध हैं। ऐसे में इन दोनों के बीच किसी भी तरह का तालमेल, चाहे वह विचारधारात्मक हो या संचालनात्मक, वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
भारतीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की निगरानी
भारतीय खुफिया एजेंसियां इन घटनाओं पर बारीकी से नजरें रख रही हैं। उनका मानना है कि इन खुलासों की जांच करना और संभावित योजनाओं का आंकलन करना बेहद जरूरी है, खासकर तब जब क्षेत्रीय तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर है। यह भी कहा जा रहा है कि इन बैठकों और बातचीत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाया जाना चाहिए — जैसे कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) और संयुक्त राष्ट्र जैसी विश्व-स्तरीय संस्थाओं में।
क्या यह एक नया आतंकवादी ब्लॉक है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ संपर्क नहीं है, बल्कि एक नई आतंकवादी नेटवर्किंग की दिशा हो सकती है, जिसमें मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया के चरमपंथी समूह मिलकर क्रॉस-रीजनल सहयोग की योजना बना रहे हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह न केवल भारत और पड़ोसी देशों के लिए खतरा बढ़ा सकता है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा स्थिरता पर भी बड़ा असर डाल सकता है।






