भारत-EU महासमझौते की तैयारी: क्या सच में आधी कीमत पर मिलेंगी विदेशी कारें और लग्जरी सामान? जानें इस ‘मेगा डील’ का पूरा सच!

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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच पिछले 18 वर्षों से चल रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की लंबी प्रतीक्षा अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। राजनयिक गलियारों और वाणिज्य मंत्रालय से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, दोनों पक्ष एक ऐसे ऐतिहासिक समझौते के बेहद करीब हैं, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो आने वाले समय में भारतीय बाजार का पूरा स्वरूप बदल सकता है। यह समझौता न केवल व्यापारिक बाधाओं को दूर करेगा, बल्कि आम आदमी की पहुंच विदेशी लग्जरी उत्पादों तक आसान बना देगा।

टैक्स का गणित: लग्जरी कारों पर कम हो सकता है 70% तक बोझ
इस प्रस्तावित समझौते का सबसे चर्चित हिस्सा ऑटोमोबाइल सेक्टर है। वर्तमान में, यूरोप से आने वाली पूरी तरह निर्मित कारों (CBU) पर भारत 70% से 110% तक भारी आयात शुल्क वसूलता है। विश्वसनीय सूत्रों और व्यापारिक चर्चाओं के अनुसार, इस डील के तहत भारत इस शुल्क को घटाकर 40% या उससे भी कम करने पर विचार कर रहा है। इसका सीधा परिणाम यह होगा कि मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी गाड़ियां, जो वर्तमान में आम आदमी की पहुंच से बाहर हैं, उनकी कीमतों में लाखों रुपये की कमी आ सकती है। हालांकि, घरेलू उद्योगों को सुरक्षा देने के लिए इसे चरणों में लागू किए जाने की संभावना है।

शौक और स्वाद पर राहत: वाइन और प्रीमियम चॉकलेट की कीमतें गिरेंगी
यूरोपीय संघ लंबे समय से भारत से वाइन, व्हिस्की और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने की मांग कर रहा है। वार्ता की मेज पर मौजूद प्रस्तावों के अनुसार, विदेशी शराब और स्कॉच पर लगने वाले उच्च टैरिफ में बड़ी कटौती की जा सकती है। इसके साथ ही, यूरोप की मशहूर चॉकलेट, प्रीमियम चीज (Cheese) और हाई-एंड ब्यूटी प्रोडक्ट्स (कॉस्मेटिक्स) भी सस्ते होने की कतार में हैं। यह बदलाव भारतीय शहरी उपभोक्ताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स का अनुभव किफायती बना देगा।

भारतीय निर्यातकों के लिए ‘गोल्डन चांस’: 27 देशों के बाजार में सीधी एंट्री
यह समझौता एकतरफा नहीं है। भारत इस डील के बदले अपने कपड़ा (Textile), चमड़ा (Leather) और रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery) उद्योग के लिए यूरोपीय बाजार में ‘जीरो ड्यूटी’ एक्सेस चाहता है। अभी भारतीय निर्यातकों को वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलती है, क्योंकि उन्हें टैरिफ में छूट प्राप्त है। यदि भारत और EU के बीच यह समझौता अंतिम रूप ले लेता है, तो भारतीय गारमेंट और ज्वेलरी सेक्टर के निर्यात में 20% से 30% की तत्काल वृद्धि देखी जा सकती है, जिससे देश में रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।

सर्विस सेक्टर और वीजा नियमों में ढील की उम्मीद
भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका सर्विस सेक्टर और आईटी पेशेवर हैं। इस वार्ता में भारत का मुख्य जोर ‘मोबिलिटी’ पर है, यानी भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों, डॉक्टरों और नर्सों को यूरोप के 27 देशों में काम करने के लिए आसान वीजा और कार्य परमिट मिलना। यदि यूरोपीय संघ डेटा सुरक्षा और पेशेवरों की आवाजाही पर भारत की शर्तों को स्वीकार कर लेता है, तो यह भारत की डिजिटल इकॉनमी के लिए एक बड़ी जीत होगी। इससे न केवल विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा का दबदबा और मजबूत होगा।

चुनौतियां और भविष्य की राह: कब तक लगेगी अंतिम मुहर?
हालांकि संभावनाएं बहुत उत्साहजनक हैं, लेकिन कुछ पेचीदा मुद्दों पर अभी भी पेंच फंसा हुआ है। डेयरी उत्पादों के आयात और लेबर स्टैंडर्ड्स जैसे विषयों पर दोनों पक्ष सावधानी से कदम बढ़ा रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि वार्ता सकारात्मक दिशा में है और जल्द ही किसी बड़े ऐलान की उम्मीद की जा सकती है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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