UN सुरक्षा परिषद में बदलाव की गूंज: खुल सकता है, भारत के लिए स्थायी सदस्यता का रास्ता
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संवाद 24 नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक बार फिर UN सुरक्षा परिषद (UNSC) में व्यापक सुधार की जरूरत पर जोर देकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उनका कहना है कि 1945 की वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर बनी परिषद आज की दुनिया की वास्तविकताओं को सही ढंग से नहीं दर्शाती।
1945 की संरचना, 21वीं सदी की चुनौतियां
गुटेरेस ने स्पष्ट किया कि मौजूदा UNSC ढांचा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों में बना था, जबकि आज वैश्विक शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल चुका है। नई आर्थिक शक्तियां, उभरते लोकतंत्र और क्षेत्रीय संघर्ष इस बात की मांग करते हैं कि परिषद अधिक प्रतिनिधि और प्रभावी बने।
भारत की पुरानी मांग को नया बल
भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। उसका तर्क है कि विश्व की सबसे बड़ी आबादी, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों में सक्रिय भूमिका के बावजूद उसे अब तक निर्णय प्रक्रिया से दूर रखा गया है।
G4 समूह की सामूहिक आवाज
भारत के साथ-साथ ब्राजील, जर्मनी और जापान मिलकर G4 समूह के रूप में UNSC सुधार की मांग कर रहे हैं। यह समूह परिषद में नई स्थायी और अस्थायी सीटों के विस्तार के पक्ष में है, ताकि वैश्विक प्रतिनिधित्व संतुलित हो सके।
विकासशील देशों का बढ़ता समर्थन
केवल G4 ही नहीं, बल्कि अफ्रीकी संघ, लैटिन अमेरिकी देश और कई एशियाई राष्ट्र भी UNSC सुधार के समर्थन में सामने आए हैं। इन देशों का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था कुछ चुनिंदा देशों को ही अत्यधिक शक्ति देती है।
महासचिव का बयान क्यों है अहम
एंटोनियो गुटेरेस का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले बहुत कम UN महासचिवों ने इतने स्पष्ट शब्दों में सुधार की जरूरत को “अनिवार्य” बताया है। उनके अनुसार, अगर संयुक्त राष्ट्र खुद को प्रासंगिक बनाए रखना चाहता है तो उसे साहसिक फैसले लेने होंगे।
भारत की वैश्विक भूमिका और दावेदारी
भारत ने न केवल कूटनीतिक स्तर पर बल्कि शांति मिशनों, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद विरोध और वैश्विक दक्षिण की आवाज बनने में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। यही कारण है कि भारत खुद को UNSC स्थायी सदस्यता के लिए स्वाभाविक दावेदार मानता है।
सुधार की राह में बड़ी बाधाएं
हालांकि UNSC सुधार की प्रक्रिया आसान नहीं है। परिषद के पांच स्थायी सदस्य (P5) — अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस — के पास वीटो अधिकार है। किसी भी संरचनात्मक बदलाव के लिए इन सभी की सहमति जरूरी होती है।
चार्टर संशोधन की जटिल प्रक्रिया
UNSC में नए स्थायी सदस्यों को जोड़ने के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन आवश्यक है। इसके लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत और सभी स्थायी सदस्यों की मंजूरी चाहिए, जो इसे लंबी और जटिल प्रक्रिया बना देता है।
क्या भारत के लिए बढ़ी उम्मीद?
विशेषज्ञ मानते हैं कि गुटेरेस का बयान भारत के पक्ष को नैतिक और राजनीतिक मजबूती देता है। यह संकेत करता है कि UNSC सुधार अब केवल कुछ देशों की मांग नहीं, बल्कि वैश्विक जरूरत बनती जा रही है।
भविष्य की दिशा और भारत की रणनीति
आने वाले वर्षों में भारत कूटनीतिक दबाव, बहुपक्षीय मंचों और वैश्विक समर्थन के जरिए अपनी दावेदारी को और मजबूत करने की कोशिश करेगा। हालांकि, वास्तविक सफलता अंतरराष्ट्रीय सहमति पर ही निर्भर करेगी। UN महासचिव की मजबूत अपील ने भारत की स्थायी सदस्यता की उम्मीद को नया जीवन जरूर दिया है, लेकिन यह सपना कब साकार होगा, यह अभी भी वैश्विक राजनीति के जटिल समीकरणों पर निर्भर करता है।






