USA ने मध्य पूर्व की तीन प्रमुख शाखाओं को आतंकवादी संगठन घोषित कर वैश्विक सुरक्षा नीति में किया बड़ा बदलाब
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संवाद 24 दिल्ली। अमेरिकी विदेश और वित्त विभागों ने मंगलवार को मिस्र, लेबनान और जॉर्डन में सक्रिय मुस्लिम ब्रदरहुड के अध्यायों को अलग-अलग “आतंकवादी संगठन” या “विशेष रूप से जांचे गये वैश्विक आतंकवादी” के रूप में सूचीबद्ध किया। इस फैसले का उद्देश्य उन नेटवर्कों को आर्थिक और विधिक रूप से बाधित करना है, जिन्हें वाशिंगटन गंभीर सुरक्षा खतरे के रूप में देखता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने लेबनानी शाखा अल-जमाअ अल-इस्लामिया को विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) का दर्जा दिया है यह वर्ग सबसे कठोर में से एक है, जिसके तहत उसके साथ किसी भी प्रकार का सहारा देना अपराध माना जाएगा। वहीं, मिस्र और जॉर्डन की ब्रदरहुड शाखाओं को “विशेष रूप से नामांकित वैश्विक आतंकवादी” के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, जिससे उनके खिलाफ व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लागू होंगे।
क्या कहा गया — अमेरिकी तर्क
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये संगठन केवल राजनीतिक या सामाजिक संस्थाएँ नहीं हैं, बल्कि पीछे से हिंसा, अस्थिरता और आतंकवादी समूहों के समर्थन में शामिल रहे हैं। अमेरिका ने विशेष रूप से यह आरोप लगाया है कि कुछ शाखाओं ने हमास जैसे प्रतिबंधित समूहों का समर्थन किया है, और लेबनानी ब्रदरहुड के एक हिस्से पर इस वजह से इज़राइल के खिलाफ रॉकेट हमलों में शामिल होने का आरोप भी लगाया गया है। विदेश विभाग के बयान में कहा गया कि यह कदम “मुस्लिम ब्रदरहुड के अध्यायों द्वारा उत्पन्न होने वाली हिंसा और अस्थिरता को रोकने के लिए जारी रणनीति का हिस्सा है।” अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा कि वह किसी भी संसाधन, वित्त, या सहायता को रोकने के लिए सभी उपलब्ध दुस्साहसी साधनों का उपयोग करेंगे।
ब्रदरहुड का प्रतिकर्षण और जवाब
लक्षित समूहों ने इन आरोपों से इनकार किया है। मिस्र की ब्रदरहुड ने घोषणा की कि वह इस निर्णय को “ख़ारिज़” करती है और इसके खिलाफ कानूनी रास्तों का उपयोग करेगी। लेबनान की शाखा ने भी कहा कि वह एक वैधानिक राजनीतिक और सामाजिक संगठन है जो क़ानून के दायरे में काम करती है और इस निर्णय का लेबनानी कानून में कोई प्रभाव नहीं है।
ऐतिहासिक और राजनैतिक संदर्भ
मुस्लिम ब्रदरहुड की उत्पत्ति 1928 में मिस्र में हुई थी। यह संगठन शुरुआती दशकों में सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में लगा रहा, लेकिन समय-समय पर यह विवादों और हिंसा के आरोपों से घिरा रहा है। मिस्र में ब्रदरहुड को 2013 में प्रतिबंधित कर दिया गया था, और जॉर्डन में भी पिछले वर्षों में इस पर पाबंदियाँ लागू हुई हैं। यह कदम अमेरिका की उस नवंबर 2025 की कार्यकारी अधिसूचना का फल है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने मुस्लिम ब्रदरहुड के अध्यायों को आतंकवादी संगठनों के रूप में सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था।
आंकड़ों और संभावित परिणाम
ये नई आतंकवादी सूचीकरण नीति सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है इसके परिणाम सीधे प्रभाव डालेंगे:
आर्थिक प्रतिबंध: अमेरिका ब्रदरहुड शाखाओं की आर्थिक संपत्तियों को जाम कर सकता है और वित्तीय लेन-देनों पर रोक लगा सकता है। वैश्विक दबाव: अन्य देशों पर भी यह दबाव पड़ेगा कि वे इन प्रतिबंधित समूहों के साथ किसी भी साझेदारी या समर्थन से बचें। राजनैतिक जुड़ाव पर प्रभाव: अमेरिका के कुछ मध्य पूर्व सहयोगियों जैसे कतार और तुर्की का ब्रदरहुड के प्रति पारंपरिक रुख रहा है। ऐसे में यह फैसला उन रिश्तों पर असर डाल सकता है। हालांकि विश्व के कई विश्लेषक इस कदम को स्वागत योग्य सुरक्षा कदम मानते हैं, वहीं आलोचक कहते हैं कि इससे आवाज़ उठाने वाले असंतुष्ट राजनीतिक समूहों को दमन का सामना करना पड़ सकता है और मुस्लिम समुदायों में असंतोष बढ़ सकता है।






