500% टैरिफ का खतरा: अमेरिका के सख्त रुख से भारत-चीन समेत दुनिया की अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल

Share your love

संवाद 24 दिल्ली।अमेरिकी राजनीति और वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर एक बार फिर बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ा ऐसा सख्त रुख सामने रखा है, जिसने भारत, चीन और ब्राज़ील जैसे बड़े देशों की चिंता बढ़ा दी है। प्रस्तावित नीति के अनुसार, कुछ विशेष परिस्थितियों में इन देशों पर अमेरिका 500 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगा सकता है। यह कदम केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी दूरगामी असर डालने वाला माना जा रहा है।

अमेरिका का बदला हुआ मिज़ाज
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से “अमेरिका फर्स्ट” नीति के समर्थक रहे हैं। उनके अनुसार, अमेरिका को उन देशों के खिलाफ सख्त रुख अपनाना चाहिए जो उसके रणनीतिक हितों के विरुद्ध काम करते हैं। इसी सोच के तहत अब एक ऐसा प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें उन देशों को निशाने पर लिया जा रहा है जो अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित देशों के साथ व्यापारिक रिश्ते बनाए हुए हैं। ट्रंप समर्थक गुट का मानना है कि ऐसे व्यापार से वैश्विक प्रतिबंध कमजोर होते हैं और अमेरिका की विदेश नीति को नुकसान पहुँचता है।

500 प्रतिशत टैरिफ क्यों बना चर्चा का विषय
सामान्य तौर पर टैरिफ कुछ प्रतिशत तक ही सीमित रहते हैं, लेकिन 500 प्रतिशत का आंकड़ा असाधारण है। यदि यह लागू होता है, तो संबंधित देशों के लिए अमेरिका में वस्तुएँ बेचना लगभग असंभव हो जाएगा। इससे आयातित सामान बेहद महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं, कंपनियों और निवेशकों पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इतना ऊँचा टैरिफ किसी आर्थिक हथियार से कम नहीं है।

भारत की स्थिति क्यों अहम है
भारत विश्व की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और अमेरिका के साथ उसका व्यापारिक रिश्ता लगातार मजबूत हुआ है। लेकिन भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र विदेश नीति अपनाता है। इसी कारण भारत कई बार ऐसे फैसले लेता है जो अमेरिका की अपेक्षाओं से अलग होते हैं। प्रस्तावित टैरिफ से भारत के निर्यात, आईटी सेक्टर, फार्मास्यूटिकल्स और मैन्युफैक्चरिंग उद्योग पर असर पड़ सकता है।

चीन और ब्राज़ील भी निशाने पर
चीन पहले से ही अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव झेल रहा है। यदि 500 प्रतिशत टैरिफ जैसी नीति लागू होती है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध और गहराने की आशंका है। वहीं ब्राज़ील, जो ऊर्जा और कच्चे माल के क्षेत्र में बड़ा खिलाड़ी है, उसके लिए भी यह प्रस्ताव चिंता का कारण बन गया है। इन तीनों देशों का वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अहम स्थान है, इसलिए असर सिर्फ इन्हीं तक सीमित नहीं रहेगा।

वैश्विक बाजारों में बेचैनी
जैसे ही इस प्रस्ताव की चर्चा तेज हुई, दुनिया भर के शेयर बाजारों में अस्थिरता देखी गई। निवेशकों को डर है कि यदि अमेरिका इतना कठोर कदम उठाता है, तो वैश्विक व्यापार धीमा हो सकता है। कच्चे तेल की कीमतों से लेकर मुद्रा बाजार तक, हर क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऐसे फैसले वैश्विक मंदी के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

राजनीति और चुनावी रणनीति
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि यह प्रस्ताव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। सख्त टैरिफ की बात करके ट्रंप अपने समर्थकों के बीच यह संदेश देना चाहते हैं कि वह अमेरिका के हितों के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। चुनावी माहौल में ऐसे बयान अक्सर घरेलू राजनीति को मजबूत करने के लिए दिए जाते हैं, भले ही उन्हें पूरी तरह लागू किया जाए या नहीं।

क्या यह फैसला तुरंत लागू होगा?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि 500 प्रतिशत टैरिफ तुरंत लागू होंगे या नहीं। यह एक प्रस्ताव और नीति संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इसे लागू करने के लिए कानूनी प्रक्रिया, संसद की मंजूरी और कूटनीतिक बातचीत जैसे कई चरणों से गुजरना होगा। हालांकि, केवल इसकी घोषणा मात्र से ही वैश्विक स्तर पर दबाव बन गया है।

भारत के लिए आगे की राह
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने आर्थिक हितों और कूटनीतिक संतुलन को बनाए रखने की है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत बातचीत और बहुपक्षीय मंचों के जरिए अपने पक्ष को मजबूती से रखेगा। साथ ही, भारत वैकल्पिक बाजारों और साझेदारों की तलाश तेज कर सकता है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम हो।

दुनिया किस दिशा में बढ़ रही है?
यह घटनाक्रम संकेत देता है कि आने वाले समय में वैश्विक व्यापार पहले से ज्यादा जटिल और राजनीतिक हो सकता है। टैरिफ अब केवल आर्थिक उपकरण नहीं रह गए हैं, बल्कि वे कूटनीति और दबाव की भाषा बनते जा रहे हैं। ऐसे में देशों को ज्यादा सतर्क, रणनीतिक और सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत होगी।

निष्कर्ष
500 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव सिर्फ एक नीति विचार नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चेतावनी है। यदि बड़े देश आपसी मतभेदों को व्यापारिक युद्ध में बदलते हैं, तो इसका नुकसान पूरी दुनिया को उठाना पड़ सकता है। भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों के लिए यह समय टकराव नहीं, बल्कि संवाद और संतुलन का है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News