पद्मासन: योग विज्ञान का आधार और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक
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संवाद 24 डेस्क। संस्कृत शब्द ‘पद्म’ का अर्थ है कमल और ‘आसन’ का अर्थ है स्थिति। जिस प्रकार कमल का फूल कीचड़ में खिलने के बावजूद गंदगी से अछूता और निर्मल रहता है, उसी प्रकार पद्मासन का अभ्यास करने वाला साधक संसार की व्याधियों और मानसिक विकारों के बीच रहकर भी स्थिर और शांत बना रहता है। हठयोग प्रदीपिका और घेरण्ड संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में इस आसन को ‘आसनों का राजा’ माना गया है।
पद्मासन की ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि
भारतीय संस्कृति में पद्मासन का महत्व सदियों पुराना है। भगवान शिव, जिन्हें ‘आदियोगी’ कहा जाता है, से लेकर भगवान बुद्ध तक की अधिकांश प्रतिमाएं इसी आसन में विराजमान हैं। यह आसन स्थिरता का प्रतीक है। प्राचीन ऋषियों का मानना था कि जब शरीर स्थिर होता है, तभी मन को एकाग्र करना संभव है। योगिक ग्रंथों के अनुसार, पद्मासन शरीर की ऊर्जा (प्राण) को ऊपर की ओर प्रवाहित करने में मदद करता है, जो कुंडलिनी जागरण के लिए अनिवार्य है।
पद्मासन करने की सही विधि: चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका
किसी भी योगासन का पूर्ण लाभ तभी मिलता है जब उसे सही तकनीक से किया जाए। पद्मासन एक मध्यवर्ती (Intermediate) स्तर का आसन है, इसलिए इसे सावधानी से करना चाहिए:
- प्रारंभिक स्थिति: सबसे पहले फर्श पर दरी या योगा मैट बिछाकर बैठ जाएं। पैरों को सामने की ओर फैलाएं (दंडासन)।
- दायां पैर: दाहिने घुटने को धीरे से मोड़ें और दाएं पैर के पंजे को बाईं जांघ के जोड़ पर इस प्रकार रखें कि एड़ी पेट के निचले हिस्से के पास हो।
- बायां पैर: अब बाएं घुटने को मोड़ें और सावधानी से बाएं पैर को दाईं जांघ के ऊपर रखें। दोनों पैरों की एड़ियाँ पेट के करीब होनी चाहिए और तलवे ऊपर की ओर हों।
- रीढ़ की हड्डी: अपनी पीठ, गर्दन और सिर को बिल्कुल सीधा रखें। ध्यान रहे कि शरीर में तनाव न हो, बल्कि एक प्राकृतिक खिंचाव महसूस हो।
- मुद्रा: अपने हाथों को घुटनों पर ‘ज्ञान मुद्रा’ या ‘चिन्मय मुद्रा’ में रखें। अंगूठे और तर्जनी उंगली के पोरों को मिलाएं।
- दृष्टि और श्वास: अपनी आंखें कोमलता से बंद करें। गहरी और धीमी सांस लें। अपना ध्यान अपनी श्वास की गति या आज्ञा चक्र (भ्रूमध्य) पर केंद्रित करें।
पद्मासन के शारीरिक और स्वास्थ्य लाभ
पद्मासन केवल ध्यान के लिए नहीं है, बल्कि यह शरीर के विभिन्न अंगों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है:
पाचन तंत्र में सुधार: इस आसन में बैठने से पेट के निचले हिस्से और पेल्विक क्षेत्र में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे पाचन अग्नि प्रदीप्त होती है और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
रीढ़ की मजबूती: लगातार सीधा बैठने के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी लचीली और मजबूत बनती है। यह खराब पोस्चर (Posture) को ठीक करने में सहायक है।
संधिवात और लचीलापन: यह घुटनों, टखनों और कूल्हों के जोड़ों में लचीलापन लाता है। हालांकि, घुटने के दर्द वाले रोगियों को इसे विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए।
मांसपेशियों का खिंचाव: यह पैरों की मांसपेशियों को टोन करता है और शरीर की जकड़न को कम करता है।
मानसिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव एक आम समस्या है। पद्मासन का नियमित अभ्यास मानसिक स्वास्थ्य के लिए रामबाण है: “पद्मासन मस्तिष्क को शांत करने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। यह हमारे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है, जिससे चिंता और अवसाद के स्तर में कमी आती है।”
जब हम पद्मासन में बैठते हैं, तो शरीर की स्थिरता मन को संदेश देती है कि सब कुछ नियंत्रण में है। यह एकाग्रता (Concentration) बढ़ाने और याददाश्त में सुधार करने के लिए छात्रों और बुद्धिजीवियों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
आध्यात्मिक महत्व: चक्रों का सक्रियण
योग शास्त्र के अनुसार, मानव शरीर में सात मुख्य चक्र होते हैं। पद्मासन का मुख्य प्रभाव ‘मूलाधार’ और ‘स्वाधिष्ठान’ चक्रों पर पड़ता है। यह अपान वायु को नियंत्रित कर उसे ऊपर की ओर भेजता है, जिससे सुषुम्ना नाड़ी में प्राण का प्रवाह सुगम होता है। जो साधक समाधि की अवस्था प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए पद्मासन एक अनिवार्य आधार है।
सावधानियां और निषेध (Contraindications)
हर शरीर की अपनी सीमाएं होती हैं। पद्मासन करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:
घुटने की चोट – यदि घुटने में गंभीर चोट या लिगामेंट की समस्या है, तो इसे बिल्कुल न करें।
साइटिका – साइटिका के दर्द के दौरान इस आसन से बचना चाहिए।
गर्भावस्था – अनुभवी योग शिक्षक की सलाह के बिना इसे न आजमाएं।
शुरुआती साधक – यदि दोनों पैर जांघों पर नहीं आ रहे, तो जबरदस्ती न करें। शुरुआत ‘अर्ध-पद्मासन’ से करें।
पद्मासन के विभिन्न प्रकार (Variations)
अर्ध पद्मासन (Half Lotus Pose): इसमें केवल एक पैर को दूसरी जांघ पर रखा जाता है। यह शुरुआती लोगों के लिए उपयुक्त है।
बद्ध पद्मासन (Bound Lotus Pose): इसमें पद्मासन में बैठकर पीछे से हाथों को क्रॉस करके पैरों के अंगूठों को पकड़ा जाता है। यह अधिक उन्नत और चुनौतीपूर्ण है।
उत्थित पद्मासन (Elevated Lotus Pose): पद्मासन लगाकर हथेलियों के बल पूरे शरीर को जमीन से ऊपर उठाना। यह बाजुओं की ताकत बढ़ाता है।
आधुनिक जीवनशैली में पद्मासन की प्रासंगिकता
आज के डिजिटल युग में, जहाँ लोग घंटों स्क्रीन के सामने झुककर बैठते हैं, पद्मासन शरीर को पुनर्संतुलित करने का अवसर देता है। यह न केवल शारीरिक थकान मिटाता है, बल्कि डिजिटल डिटॉक्स में भी मदद करता है। प्रतिदिन केवल 10 से 15 मिनट का अभ्यास आपके व्यक्तित्व में एक नई ऊर्जा और शांति का संचार कर सकता है।
अंततः हम कह सकते हैं कि पद्मासन केवल एक शारीरिक मुद्रा नहीं है, बल्कि यह स्वयं से जुड़ने की एक कला है। यह अनुशासन, धैर्य और स्थिरता का संगम है। संवाद 24 अपने पाठकों को यह सुझाव देता है कि योग को केवल व्यायाम न समझकर इसे जीवन पद्धति के रूप में अपनाएं। पद्मासन के निरंतर अभ्यास से आप न केवल एक स्वस्थ शरीर पाएंगे, बल्कि एक प्रबुद्ध और शांत मन के स्वामी भी बनेंगे।






