रीढ़, संतुलन और आत्मविश्वास एक ही आसन से कैसे मिलते हैं ये तीनों लाभ?
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संवाद 24 डेस्क। योग विज्ञान में ताड़ासन को सभी खड़े होकर किए जाने वाले योगासनों की आधारशिला माना जाता है। संस्कृत में ताड़ का अर्थ है पर्वत या ताड़ का वृक्ष, और आसन का अर्थ है स्थिर अवस्था। जिस प्रकार पर्वत अपनी जगह अडिग, संतुलित और स्थिर रहता है, उसी प्रकार ताड़ासन में साधक अपने शरीर, श्वास और मन को पूर्ण संतुलन में लाने का अभ्यास करता है। देखने में यह आसन अत्यंत सरल प्रतीत होता है, लेकिन इसके लाभ गहरे और दूरगामी हैं।
ताड़ासन का शास्त्रीय परिचय
ताड़ासन का उल्लेख प्राचीन योग ग्रंथों में शरीर की सीध, संतुलन और जागरूकता विकसित करने वाले आसन के रूप में मिलता है। आधुनिक योग में इसे Mountain Pose कहा जाता है। यह ऐसा आसन है जिसमें व्यक्ति बिना किसी बाहरी गतिविधि के केवल खड़े होकर अपने शरीर की संरचना को सही करता है। यही कारण है कि इसे कई अन्य आसनों की शुरुआत और समाप्ति का आधार बनाया जाता है।
ताड़ासन करने की सही विधि
ताड़ासन का अभ्यास करते समय विधि और श्वास-प्रश्वास का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। सबसे पहले समतल स्थान पर सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों को आपस में मिला लें या हल्का-सा अंतर रखें। शरीर का पूरा भार दोनों पैरों पर समान रूप से रखें। अब दोनों हाथों को शरीर के बगल में रखें और दृष्टि सामने एक बिंदु पर स्थिर करें। गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं, हथेलियों को आपस में मिला लें। इसके बाद एड़ियों को धीरे-धीरे ऊपर उठाते हुए पंजों पर खड़े हो जाएं। इस अवस्था में शरीर को ऊपर की ओर खिंचाव दें, जैसे कोई आपको सिर के ऊपर से खींच रहा हो। कुछ क्षण इस स्थिति में रहते हुए श्वास सामान्य रखें। फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए एड़ियों को जमीन पर लाएं और हाथ नीचे कर लें। यही ताड़ासन का एक चक्र माना जाता है।
ताड़ासन में श्वास का महत्व
ताड़ासन केवल शारीरिक नहीं, बल्कि श्वास-आधारित आसन भी है। जब आप हाथ ऊपर उठाते हैं और शरीर को फैलाते हैं, तब गहरी श्वास फेफड़ों की क्षमता बढ़ाती है। यह अभ्यास श्वसन तंत्र को सक्रिय करता है और ऑक्सीजन के बेहतर संचार में मदद करता है। नियमित अभ्यास से श्वास गहरी, स्थिर और नियंत्रित होती है।
ताड़ासन के शारीरिक लाभ
ताड़ासन का नियमित अभ्यास पूरे शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। यह रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने में मदद करता है, जिससे गलत बैठने या झुककर चलने की आदत में सुधार होता है। यह आसन कंधों, गर्दन और पीठ की जकड़न को कम करता है। पैरों की मांसपेशियां, घुटने और टखने मजबूत होते हैं। बच्चों और युवाओं में यह आसन लंबाई बढ़ाने में सहायक माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को प्राकृतिक रूप से खिंचाव देता है। बुजुर्गों में यह संतुलन बनाए रखने की क्षमता को बेहतर करता है।
मानसिक और स्नायु तंत्र पर प्रभाव
ताड़ासन का प्रभाव केवल शरीर तक सीमित नहीं है। यह आसन मन को स्थिर करता है और एकाग्रता बढ़ाता है। जब व्यक्ति पूरी सजगता के साथ स्थिर खड़ा रहता है, तो मस्तिष्क और स्नायु तंत्र में संतुलन बनता है। यह तनाव, घबराहट और मानसिक अस्थिरता को कम करने में सहायक है। नियमित अभ्यास से आत्मविश्वास बढ़ता है और शरीर के प्रति जागरूकता विकसित होती है।
ताड़ासन और मुद्रा सुधार (Posture Correction)
आधुनिक जीवनशैली में गलत मुद्रा एक आम समस्या बन चुकी है। मोबाइल और कंप्यूटर के अधिक प्रयोग से गर्दन झुकना, कंधों का आगे आ जाना और पीठ का टेढ़ा होना आम है। ताड़ासन शरीर को उसकी प्राकृतिक सीध में लाने का अभ्यास कराता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लंबवत रखने का प्रशिक्षण देता है, जिससे लंबे समय में कमर और गर्दन के दर्द की संभावना कम होती है।
ताड़ासन किन लोगों के लिए विशेष लाभकारी
ताड़ासन विद्यार्थियों, ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों, खिलाड़ियों और बुजुर्गों, सभी के लिए उपयोगी है। यह आसन उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जिन्हें संतुलन की समस्या, हल्का पीठ दर्द या थकान महसूस होती है। हालांकि, जिन लोगों को चक्कर आने की समस्या, गंभीर घुटनों का दर्द या हाल में कोई चोट लगी हो, उन्हें यह आसन विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए।
योग क्रम में ताड़ासन का स्थान
योग अभ्यास में ताड़ासन को अक्सर प्रारंभिक आसन के रूप में रखा जाता है। सूर्य नमस्कार और अन्य खड़े होकर किए जाने वाले आसनों से पहले ताड़ासन करने से शरीर तैयार होता है। यह आसन अभ्यास के अंत में भी किया जा सकता है, जिससे शरीर दोबारा संतुलन की स्थिति में लौट आता है।
ताड़ासन देखने में जितना सरल है, प्रभाव में उतना ही गहरा है। यह आसन शरीर को सीधा, संतुलित और मजबूत बनाता है, वहीं मन को स्थिरता और सजगता प्रदान करता है। आधुनिक भागदौड़ भरी जीवनशैली में ताड़ासन एक ऐसा योग अभ्यास है, जिसे कोई भी व्यक्ति कम समय में, बिना विशेष उपकरण के कर सकता है। नियमित अभ्यास से ताड़ासन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व में स्थिरता और आत्मविश्वास भी पैदा करता है।






