वजन घटाना हो या चेहरा चमकाना, या बीमारियों को हो दूर भगाना। सूर्य नमस्कार कैसे करता है चमत्कार? एक समग्र स्वास्थ्य अभ्यास का वैज्ञानिक विश्लेषण
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संवाद 24 डेस्क। सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) योग की सबसे प्राचीन और लोकप्रिय क्रिया-श्रृंखलाओं में से एक है। यह 12 शारीरिक आसनों का एक चक्रीय अभ्यास है जो प्राणायाम, मंत्र और ध्यान के साथ मिलकर शरीर, मन और प्राण (प्राण-ऊर्जा) को संतुलित करता है। पारंपरिक रूप से यह सूर्योदय के समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके किया जाता है और इसे सूर्य को नमस्कार करने का प्रतीक माना जाता है। आधुनिक फिटनेस के परिप्रेक्ष्य में सूर्य नमस्कार एक पूर्ण-शरीर व्यायाम (full-body workout) है जो कार्डियो, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और स्ट्रेचिंग को एक साथ प्रदान करता है।
सूर्य नमस्कार : सूर्य नमस्कार के एक चक्र में कुल 12 आसन होते हैं। परंपरा में प्रत्येक आसन के साथ सूर्य के 12 रूपों के बीज-मंत्र या नाम-मंत्र बोले जाते हैं।
मूल 12 मंत्र (हर आसन के लिए एक)
ॐ मित्राय नमः (जो सभी के प्रति मित्रवत हैं)
ॐ रवये नमः (जो तेजस्वी और चमकदार हैं)
ॐ सूर्याय नमः (जो सभी गतिविधियों के जनक हैं)
ॐ भानवे नमः (जो प्रकाशमान हैं)
ॐ खगाय नमः (जो आकाश में विचरण करते हैं)
ॐ पूष्णे नमः (जो पोषण देते हैं)
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः (जो सुनहरा (ईश्वरीय) गर्भ धारण करते हैं)
ॐ मरीचये नमः (जिनकी किरणें हैं)
ॐ आदित्याय नमः (जो अदिति के पुत्र हैं)
ॐ सवित्रे नमः (जो जीवन के लिए प्रेरणा देते हैं)
ॐ अर्काय नमः (जो पूजनीय हैं)
ॐ भास्कराय नमः (जो ज्ञान और प्रकाश की ओर ले जाते हैं)
सूर्य नमस्कार : पूरी विधि
शुरू करें सीधे खड़े होकर, दोनों पैर जोड़कर, हथेलियाँ छाती के सामने नमस्कार मुद्रा में जोड़ें।
- प्रणामासन– पूरी साँस बाहर छोड़ते हुए शरीर को पूरी तरह शांत और सीधा रखें। छाती खुली हो, कंधे पीछे और नीचे, हथेलियाँ आपस में अच्छे से जुड़ी हुई हों, नजर नाक के अग्र भाग पर। इस स्थिति में मन में बोलें – ॐ मित्राय नमः।
- हस्तउत्तानासन – गहरी साँस भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाते हुए सीधे ऊपर ले जाएँ और रीढ़ को पूरी तरह पीछे की ओर झुकाएँ। गर्दन भी पीछे जाए, हिप थोड़ा आगे की ओर, एड़ियाँ जमीन पर दृढ़। नजर भ्रूमध्य या ऊपर आकाश की ओर। मंत्र – ॐ रवये नमः।
- पादहस्तासन (हस्तपादासन)– साँस पूरी बाहर छोड़ते हुए कमर से आगे की ओर झुकें। यदि पीठ में दर्द न हो तो घुटने सीधे रखें, पेट को जाँघों से सटाएँ और हथेलियाँ जमीन पर या पैरों के दोनों तरफ रखें। नजर नाक के अग्र पर। मंत्र – ॐ सूर्याय नमः।
- अश्वसंचालनासन (दायाँ पैर पीछे) – गहरी साँस लेते हुए दायाँ पैर जितना पीछे ले जा सकते हैं ले जाएँ। बायाँ घुटना 90 डिग्री पर मुड़ा रहे, छाती खुली, कंधे कानों से दूर, कमर नीचे की ओर, नजर भ्रूमध्य या ऊपर की ओर। मंत्र – ॐ भानवे नमः।
- परिवर्तित दंडासन / संतुलनासन – साँस बाहर छोड़ते हुए बायाँ पैर भी पीछे ले जाकर दोनों हाथ-पैर बिल्कुल सीधे कर लें। पूरा शरीर एक सीधी रेखा में होना चाहिए, न कूल्हे ऊपर हों, न नीचे। नजर नाक के अग्र पर। मंत्र – ॐ खगाय नमः।
- अष्टांग नमस्कार – साँस को रोकते हुए (कुंभक) पहले घुटने जमीन पर टिकाएँ, फिर छाती और ठोड़ी जमीन पर रखें। इस समय घुटने, छाती, ठोड़ी, दोनों हथेलियाँ और दोनों पैरों के पंजे – कुल आठ अंग जमीन को स्पर्श करते हैं, कूल्हे थोड़े ऊपर रहते हैं। नजर नाक के अग्र पर। मंत्र – ॐ पूष्णे नमः।
- भुजंगासन – साँस भरते हुए धीरे से छाती को ऊपर उठाएँ, हथेलियाँ कंधों के पास जमीन पर दबाएँ, कंधे कानों से दूर रखें, पैर सीधे और परस्पर जुड़े हुए। कमर को जरूरत से ज्यादा नहीं झुकाना। नजर भ्रूमध्य की ओर। मंत्र – ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।
- अधोमुख श्वानासन (पर्वतासन)– साँस बाहर छोड़ते हुए कूल्हों को ऊपर और पीछे की ओर उठाएँ। एड़ियाँ जमीन की ओर दबाएँ, सिर दोनों बाजुओं के बीच, पीठ और पैर पूरी तरह सीधे। नजर नाभि की ओर। मंत्र – ॐ मारीचये नमः।
- अश्वसंचालनासन (दायाँ पैर आगे) – साँस लेते हुए दायाँ पैर दोनों हथेलियों के बीच आगे लाएँ। बायाँ पैर पीछे रहे, कमर नीचे, छाती खुली, नजर ऊपर या भ्रूमध्य पर। मंत्र – ॐ आदित्याय नमः।
- पादहस्तासन – साँस छोड़ते हुए बायाँ पैर भी आगे लाकर दोनों पैर पास-पास रखें, आगे की ओर झुकें, पेट जाँघों से सटाएँ, हथेलियाँ जमीन पर या पैरों के पास। नजर नाक के अग्र पर। मंत्र – ॐ सवित्रे नमः।
- हस्तउत्तानासन – गहरी साँस लेते हुए धीरे-धीरे ऊपर उठें, हाथ कानों से सटाते हुए ऊपर ले जाएँ और रीढ़ को पीछे की ओर झुकाएँ। नजर ऊपर या भ्रूमध्य पर। मंत्र – ॐ अर्काय नमः।
- प्रणामासन (वापसी) – साँस पूरी बाहर छोड़ते हुए शरीर को सीधा करें, हाथ छाती के सामने नमस्कार मुद्रा में जोड़ें, शरीर और मन को पूर्ण शांत करें। नजर नाक के अग्र पर। मंत्र – ॐ भास्कराय नमः।
एक पूरा राउंड समाप्त होने पर हाथ जोड़कर शांत मन से बोलें – ॐ श्री सवितृ सूर्य नारायणाय नमः।
शुरुआती लोगों के लिए सरल विकल्प (मंत्र वही रहते हैं)
- घुटने में दर्द हो तो अश्वसंचालनासन में पीछे का घुटना जमीन पर रखें।
- कमर या गर्दन की समस्या हो तो भुजंगासन की जगह “स्फिंक्स आसन” (केवल कोहनियों पर) करें।
- अष्टांग नमस्कार कठिन लगे तो पहले केवल घुटने-छाती-ठोड़ी (पंचांग नमस्कार) करें।
इस प्रकार सूर्य नमस्कार केवल शारीरिक व्यायाम ही नहीं, बल्कि मंत्र, श्वास, दृष्टि और ध्यान का ऐसा समन्वय है जो शरीर, प्राण और मन को एक साथ ऊर्जा से भर देता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और कई अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्रिकाओं में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार नियमित सूर्य नमस्कार करने से शारीरिक, मानसिक और चयापचय संबंधी अनेक लाभ मिलते हैं। नीचे हम इन्हें वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ विस्तार से समझते हैं।
- शारीरिक लाभ (Physical Benefits)
पूर्ण शरीर की मांसपेशियों का व्यायाम
सूर्य नमस्कार में 12 आसन (हस्तउत्तानासन, पादहस्तासन, अश्व संचालनासन, दंडासन, अष्टांग नमस्कार, भुजंगासन आदि) क्रमशः रीढ़ की अग्र-पीछे झुकाव, कोर की मजबूती, पैरों, कंधों, हाथों और पीठ की सभी प्रमुख मांसपेशी समूहों को सक्रिय करते हैं। Journal of Bodywork and Movement Therapies (2016) में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि 6 महीने तक रोजाना 12 राउंड सूर्य नमस्कार करने से ऊपरी अंगों की मांसपेशियों में 15-20% और निचले अंगों में 12-18% ताकत में वृद्धि हुई।
हृदय स्वास्थ्य और कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस
तेज गति से किए गए सूर्य नमस्कार में हृदय गति 120-150 bpm तक पहुँच जाती है, जो मध्यम-तीव्रता वाले एरोबिक व्यायाम की श्रेणी में आता है। International Journal of Yoga (2011) के एक रैंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल में 8 सप्ताह तक रोजाना 20 मिनट सूर्य नमस्कार करने वाले समूह में VO2 max (ऑक्सीजन उपयोग क्षमता) में 9.8% सुधार और रेस्टिंग हार्ट रेट में 7-10 bpm की कमी दर्ज की गई। इससे हृदय रोग का जोखिम काफी कम होता है।
वजन नियंत्रण और चर्बी कम करना
एक औसत वजन का व्यक्ति 30 मिनट में 10-12 राउंड सूर्य नमस्कार करके लगभग 230-280 किलो कैलोरी खर्च करता है (Harvard Health Publishing के MET मानकों के अनुसार यह 8-10 METs के बराबर है)। Journal of Ayurveda and Integrative Medicine (2020) में प्रकाशित एक अध्ययन में 24 सप्ताह तक सूर्य नमस्कार और संतुलित आहार लेने वाले मोटापा ग्रस्त व्यक्तियों में औसतन 5.4 किग्रा वजन और 4.2% बॉडी फैट कम हुआ, जबकि कंट्रोल ग्रुप में कोई बदलाव नहीं हुआ।
लचीलापन और जोड़ों की सेहत
हर राउंड में रीढ़ की पूरी रेंज ऑफ मोशन (flexion extension) होती है, जिससे स्पाइनल लचीलापन बढ़ता है। साथ ही कूल्हे, घुटने, कंधे और कलाई के जोड़ भी सक्रिय रहते हैं। Indian Journal of Physiology and Pharmacology (2015) के शोध में 12 सप्ताह सूर्य नमस्कार करने वाले युवाओं में सिट-एंड-रीच टेस्ट में 4.8 सेमी तक सुधार देखा गया।
हड्डियों का घनत्व (Bone Mineral Density)
भारोत्तोलन जैसे आसन (दंडासन, अश्व संचालनासन) और वजन सहन करने वाले पोज शरीर की हड्डियों पर स्वस्थ तनाव डालते हैं, जो ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम में मदद करते हैं। 2019 के एक मेटा-एनालिसिस (Complementary Therapies in Medicine) में पाया गया कि योग (जिसमें सूर्य नमस्कार प्रमुख था) करने वाली पोस्ट-मेनोपॉजल महिलाओं में लम्बर स्पाइन और फीमर नेक का BMD 3-5% बढ़ा। - मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक लाभ
तनाव और चिंता में कमी
सूर्य नमस्कार में गहरी साँसों का समन्वय (प्राणायाम) पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है। Journal of Clinical Psychiatry (2018) में प्रकाशित एक अध्ययन में 12 सप्ताह तक 20 मिनट रोजाना सूर्य नमस्कार करने वाले लोगों में कोर्टिसोल स्तर 23% तक कम हुआ और Beck Anxiety Inventory स्कोर में 31% सुधार हुआ।
अवसाद के लक्षणों में कमी
नियमित अभ्यास से सेरोटोनिन, डोपामाइन और BDNF (Brain-Derived Neurotrophic Factor) का स्तर बढ़ता है। Evidence-Based Complementary and Alternative Medicine (2017) के एक RCT में मध्यम अवसाद से ग्रस्त लोगों में 8 सप्ताह सूर्य नमस्कार करने वाले समूह में Hamilton Depression Rating Scale पर 48% अंक सुधार देखा गया (दवा लेने वाले समूह से भी बेहतर)।
एकाग्रता और स्मृति में वृद्धि
आसनों के बीच साँस और दृष्टि का नियंत्रण मस्तिष्क के प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स को सक्रिय करता है। 2021 के एक fMRI अध्ययन (Frontiers in Human Neuroscience) में पाया गया कि नियमित सूर्य नमस्कार करने वालों में ध्यान और कार्यकारी कार्यों (executive functions) में सांख्यिकीय रूप से सार्थक सुधार हुआ। - चयापचय और अंतःस्रावी तंत्र पर प्रभाव
इन्सुलिन संवेदनशीलता और मधुमेह नियंत्रण
सूर्य नमस्कार मांसपेशियों में ग्लूकोज अपटेक बढ़ाता है और सूजन कम करता है। Diabetes Research and Clinical Practice (2011) में 6 महीने तक रोजाना सूर्य नमस्कार करने वाले टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में HbA1c 0.8-1.2% तक कम हुआ और उपवास ग्लूकोज 18-25 mg/dL कम हुआ।
थायरॉइड कार्य में सुधार
गर्दन के अग्र-पीछे झुकाव से थायरॉइड ग्रंथि पर सूक्ष्म मालिश होती है। 2016 के एक भारतीय अध्ययन (Journal of Yoga & Physical Therapy) में हाइपोथायरॉइड महिलाओं में 6 महीने सूर्य नमस्कार करने से TSH स्तर में औसतन 38% कमी और फ्री T4 में वृद्धि देखी गई।
रक्तचाप नियंत्रण
International Journal of Yoga (2019) के मेटा-एनालिसिस में 15 अध्ययनों के विश्लेषण से पता चला कि सूर्य नमस्कार सहित योग करने से सिस्टोलिक BP औसतन 9 mmHg और डायस्टोलिक 6 mmHg कम होता है। - प्रतिरक्षा तंत्र पर प्रभाव
2020 के एक अध्ययन (Journal of Alternative and Complementary Medicine) में 12 सप्ताह तक रोजाना सूर्य नमस्कार करने वाले लोगों में NK सेल्स (Natural Killer cells) की संख्या और गतिविधि में 25-30% वृद्धि हुई। साथ ही सूजन मार्कर (CRP, IL-6) में कमी दर्ज की गई। COVID-19 महामारी के दौरान भी कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं ने सूर्य नमस्कार को प्रतिरक्षा-वर्धक अभ्यास के रूप में सुझाया है। - महिलाओं के लिए विशेष लाभ
- पीसीओएस (PCOS) और अनियमित मासिक धर्म में सुधार (2018, Journal of Obstetrics and Gynaecology Research)
- गर्भावस्था के दौरान हल्के रूप में किया जाए तो प्रसव पीड़ा कम करने और श्रोणि तल की मांसपेशियों को मजबूत करने में सहायक (प्रमाणित प्रशिक्षक की देखरेख में)
- मेनोपॉज के लक्षण (हॉट फ्लैशेस, मूड स्विंग्स) में कमी
6. वृद्धों और बच्चों के लिए लाभ
- वृद्धों में संतुलन और गिरने का जोखिम कम (Journal of Geriatric Physical Therapy, 2021)
- बच्चों में एकाग्रता, शारीरिक विकास और आत्मविश्वास में वृद्धि (शालेय शिक्षा में कई राज्य इसे शामिल कर रहे हैं)
अतः हम कह सकते हैं कि सूर्य नमस्कार एक ऐसा दुर्लभ व्यायाम है जो कम समय (15-30 मिनट) में कार्डियो, स्ट्रेंथ, फ्लेक्सिबिलिटी, माइंडफुलनेस और प्राणायाम, सभी को एक साथ देता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा सुझाई गई साप्ताहिक 150 मिनट मध्यम व्यायाम की आवश्यकता को केवल 25-30 मिनट रोजाना सूर्य नमस्कार से पूरा किया जा सकता है।
हालांकि, निम्न स्थितियों में चिकित्सक या प्रमाणित योग प्रशिक्षक से परामर्श अवश्य लें:
- गंभीर हृदय रोग
- उच्च रक्तचाप (अनियंत्रित)
- ग्लूकोमा
- हाल ही में कोई सर्जरी
- गर्भावस्था के अंतिम तिमाही
शुरुआत धीमी गति से करें, साँसों का समन्वय सीखें, और धीरे-धीरे गति व संख्या बढ़ाएँ। सूर्य नमस्कार केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक जीवन शैली है जो शरीर को स्वस्थ, मन को शांत और आत्मा को जागृत रखता है।
डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी भी प्रकार से चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी लक्षण, निर्णय या उपचार के लिए अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें। संवाद 24 प्रस्तुत जानकारी की चिकित्सकीय सटीकता, पूर्णता या उपयुक्तता के लिए उत्तरदायी नहीं है तथा इसके उपयोग से होने वाली किसी भी हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।






