सिर्फ सांस छोड़ने की एक तकनीक और शरीर होगा डिटॉक्स, कपालभाति क्यों माना जाता है सुपरयोग?
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संवाद 24 डेस्क। तेज़ रफ्तार जीवनशैली, मानसिक तनाव, अनियमित खान-पान और घटती शारीरिक सक्रियता, यह सब मिलकर आज अधिकतर लोगों को किसी न किसी बीमारी की ओर धकेल रहे हैं। ऐसे समय में योग और प्राणायाम को लेकर लोगों में जागरूकता तेज़ी से बढ़ रही है। खासकर कपालभाति प्राणायाम (Kapalbhati Pranayama) को स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानसिक और शारीरिक दोनों ही स्तर पर अत्यंत लाभकारी मानते हैं। यह प्राणायाम न केवल फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है, बल्कि पाचन, रक्तसंचार, मस्तिष्क और हार्मोनल सिस्टम पर भी सकारात्मक प्रभाव छोड़ता है।
कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि यदि कपालभाति को रोज़ाना सही विधि से किया जाए, तो शरीर की ऊर्जा बढ़ती है, मेटाबॉलिज़्म सुधरता है और 8-9 प्रमुख बीमारियों की संभावना कम हो जाती है। इसलिए इसे योग का ‘शरीर शुद्धि प्राणायाम’ भी कहा गया है।
कपालभाति प्राणायाम क्या है?
कपालभाति वह प्राणायाम है, जिसकी नियमित साधना से मस्तिष्क और चेहरे पर प्राकृतिक तेज़ बढ़ता है। इसमें सक्रिय श्वास-त्याग (exhalation) और निष्क्रिय श्वास-ग्रहण (inhalation) की क्रिया बार-बार की जाती है। पेट को भीतर की ओर तेजी से खींचते हुए नाक से सांस छोड़ना इसकी मुख्य क्रिया है। यही प्रक्रिया फेफड़ों को मजबूत बनाती है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर करती है।
योग गुरुओं के अनुसार कपालभाति शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया को सबसे तेज़ करने वाले प्राणायामों में एक है। यह न केवल श्वसन प्रणाली को मजबूत बनाता है बल्कि सौर जठराग्नि को सक्रिय कर पाचन तंत्र को सुधारता है।
कपालभाति कैसे करते हैं? (सही विधि)
- सबसे पहले सीधे बैठें, पद्मासन, वज्रासन या सुखासन किसी भी मुद्रा में बैठ सकते हैं।
- रीढ़ की हड्डी सीधी, कंधे ढीले और चेहरा रिलैक्स रखें।
- सामान्य गति से 2–3 बार गहरी सांस लें और छोड़ें।
- अब नाक से सांस तेजी से छोड़ें, और पेट को भीतर की ओर खींचें।
- सांस अपने-आप भर जाएगी, उसे जबरन अंदर नहीं लेना है।
- शुरुआत में 30–40 बार का एक सेट करें।
- धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाकर 3–5 सेट तक पहुंचा जा सकता है।
ध्यान रहे, यदि चक्कर आए, अत्यधिक थकान हो या सांस फूलने लगे तो तुरंत अभ्यास रोक दें।
रोज़ाना कपालभाति करने के प्रमुख फायदे
- फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है
कपालभाति को श्वसन तंत्र के लिए सबसे प्रभावी प्राणायाम माना जाता है। इसकी तेज़ श्वास-त्याग क्रिया फेफड़ों की मांसपेशियों को मजबूत करती है और ऑक्सीजन अवशोषण क्षमता बढ़ाती है। अस्थमा, एलर्जी और सांस संबंधी समस्याओं में भी इसके लाभ देखे गए हैं। - पाचन शक्ति को मजबूत बनाता है
जिस तरीके से प्राणायाम में पेट को भीतर की ओर खींचा जाता है, उससे जठराग्नि सक्रिय होती है। यह भोजन पचाने की क्षमता को बढ़ाता है और कब्ज, गैस, एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत देता है। नियमित अभ्यास से लीवर और पैनक्रियाज़ का कार्य बेहतर होने लगता है। - मानसिक तनाव और अवसाद में राहत
कपालभाति को ‘ब्रेन एनर्जी बूस्टर’ भी कहा जाता है। इसकी क्रिया मस्तिष्क तक अधिक ऑक्सीजन पहुंचाती है। इससे तनाव कम होता है, मानसिक स्पष्टता बढ़ती है और नकारात्मक विचारों में कमी आती है। अनिद्रा और हल्के अवसाद में भी इसका सकारात्मक असर माना गया है। - चेहरे पर निखार आता है
नियमित अभ्यास से रक्तसंचार बढ़ता है, जिससे त्वचा में चमक आती है। ऑक्सीजन की बढ़ी हुई आपूर्ति फ्री-रेडिकल्स को कम करती है जिससे झुर्रियां और समय से पहले आने वाले त्वचा के बुढ़ापे की समस्या धीमी होती है। - वजन नियंत्रित रखने में सहायक
कपालभाति मेटाबॉलिज़्म को तेजी से बढ़ाता है, जिससे शरीर कैलोरी अधिक जलाता है। पेट की चर्बी कम करने और शरीर को टोन करने में इसका बड़ा योगदान माना जाता है। - मधुमेह रोगियों के लिए मददगार
पेट की मांसपेशियों पर नियंत्रित दबाव pancreatic functions को सुधारता है, जिससे इंसुलिन संतुलन में मदद मिलती है। इसी कारण हल्के से मध्यम डायबिटीज वाले मरीजों के लिए इसका अभ्यास लाभदायक माना जाता है (डॉक्टर की सलाह आवश्यक है)। - हार्मोनल असंतुलन में सुधार
महिलाओं में थायराइड, पीसीओडी और अनियमित मासिक धर्म जैसी समस्याओं पर भी कपालभाति सकारात्मक प्रभाव डालता है क्योंकि यह शरीर की ऊर्जा प्रणाली और हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करता है। - शरीर की ऊर्जा बढ़ाता है
कपालभाति करने वाले लोग बताते हैं कि सुबह-सुबह इसे करने के बाद ऊर्जा का स्तर पूरे दिन ऊंचा रहता है। यह शरीर को फुर्तीला बनाता है और थकान कम करता है। - कोल्ड-एलर्जी और साइनस में फायदा
तेज श्वास-त्याग नाक के मार्ग (nasal passages) को साफ करता है। साइनस, बार-बार जुकाम और एलर्जी समस्याओं में यह अत्यंत लाभप्रद माना गया है।
कपालभाति कब और कैसे करें?
- सुबह खाली पेट या भोजन के 3–4 घंटे बाद करना सबसे अच्छा माना जाता है।
- शुरुआत 5 मिनट से करें, फिर धीरे-धीरे 15 मिनट तक ले जाएं।
- 20–30 मिनट का अभ्यास करने पर इसका पूरा लाभ मिलता है।
- योग विशेषज्ञ कहते हैं कि इसे अन्य प्राणायामों जैसे अनुलोम विलोम या भस्त्रिका से पहले करना लाभदायक रहता है।
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?
- हृदय रोगी
- गर्भवती महिलाएँ
- हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग
- हाल ही में ऑपरेशन करा चुके मरीज
- तीव्र पीठ या पेट दर्द वाले लोग
इन स्थितियों में विशेषज्ञ की निगरानी में ही अभ्यास करना चाहिए।
कपालभाति प्राणायाम सिर्फ एक योग तकनीक नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य की ओर बढ़ने का अत्यंत सरल लेकिन प्रभावशाली उपाय है। इससे शरीर की डिटॉक्स व्यवस्था बेहतर होती है, फेफड़े मजबूत होते हैं, मानसिक संतुलन सुधरता है और पाचन तंत्र सक्रिय होता है। नियमित अभ्यास न केवल जीवनशैली संबंधी रोगों को दूर रख सकता है बल्कि शरीर और मन दोनों में नई ऊर्जा भरता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे सही तरीके से और सही समय पर किया जाए, तो यह उन दुर्लभ योग अभ्यासों में शामिल है जो बिना किसी दवा के शरीर की कई प्रमुख समस्याओं में सुधार कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी भी प्रकार से चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी लक्षण, निर्णय या उपचार के लिए अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें। संवाद 24 प्रस्तुत जानकारी की चिकित्सकीय सटीकता, पूर्णता या उपयुक्तता के लिए उत्तरदायी नहीं है तथा इसके उपयोग से होने वाली किसी भी हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।






