अगर आप खाते हैं ये चीजें, तो खराब हो रहा है आपका गुर्दा, डायलिसिस से बचना है तो तुरंत बदल दें डाइट

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संवाद 24 डेस्क। किडनी, जिसे आमतौर पर गुर्दा कहा जाता है, मानव शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। ये राजमा (Kidney Bean) के आकार के दो छोटे अंग हमारी रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित होते हैं, और इनका काम इतना जटिल और आवश्यक है कि इन्हें अक्सर शरीर का ‘मास्टर फिल्टर’ कहा जाता है।

आपके शरीर को स्वस्थ रखने और जीवन को बनाए रखने के लिए किडनी एक दिन में लगभग 120 से 150 क्वार्ट्स (लगभग 113 से 142 लीटर) रक्त को फ़िल्टर करती है। यह केवल अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का काम नहीं करती, बल्कि यह कई जीवन-रक्षक कार्यों को भी नियंत्रित करती है।

जब तक ये फिल्टर सही से काम कर रहे होते हैं, तब तक हमें इनका महत्व महसूस नहीं होता। लेकिन खानपान की गलत आदतों, आधुनिक जीवनशैली और लापरवाही के कारण, किडनी के कार्य में धीरे-धीरे गिरावट आती है, जिसे चिकित्सा विज्ञान में क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) कहा जाता है। यह गिरावट अक्सर अपरिवर्तनीय (Irreversible) होती है, इसलिए यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि हम अपने आहार में किन चीजों से दोस्ती करें और किनसे दूरी बनाए रखें।

किडनी की कार्यप्रणाली और उसका महत्व
किडनी पर केवल एक ही नहीं, बल्कि कई गंभीर और परस्पर जुड़े हुए दायित्व होते हैं। इन दायित्वों को समझकर ही हम जान सकते हैं कि कुछ खाद्य पदार्थ इन्हें क्यों और कैसे नुकसान पहुँचाते हैं।

  1. रक्त शोधन और अपशिष्ट निष्कासन
    किडनी का प्राथमिक कार्य रक्त से विषाक्त पदार्थों (Toxins) को बाहर निकालना है। यह यूरिया, क्रिएटिनिन और अमोनिया जैसे चयापचय (Metabolism) अपशिष्टों को मूत्र (Urine) के माध्यम से शरीर से बाहर निकालती है। जब किडनी खराब होती है, तो ये टॉक्सिन्स शरीर में जमा होने लगते हैं, जिससे यूरेमिया (Uremia) जैसी खतरनाक स्थिति पैदा हो जाती है।
  2. द्रव और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन
    शरीर में पानी, सोडियम (Sodium), पोटेशियम (Potassium) और कैल्शियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा को नियंत्रित करना किडनी का सबसे महत्वपूर्ण काम है। यह देखती है कि जब शरीर में किसी मिनरल की मात्रा बढ़ रही हो तो उसे तुरंत बाहर निकाल दिया जाए, और अगर कमी हो तो उसे रोका जाए।
  • सोडियम और पोटेशियम का संतुलन सीधे हृदय गति और रक्तचाप (Blood Pressure) को प्रभावित करता है।
  • कैल्शियम और फॉस्फोरस का संतुलन हड्डियों के स्वास्थ्य को नियंत्रित करता है।

हार्मोन उत्पादन
किडनी तीन महत्वपूर्ण हार्मोन का उत्पादन करती है:

    • रेनिन: जो रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है।
    • एरिथ्रोपोइटिन (EPO): जो अस्थि मज्जा (Bone Marrow) को लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) के निर्माण के लिए संकेत देता है (इसकी कमी से एनीमिया होता है)।
    • कैल्सिट्रियोल: विटामिन डी का सक्रिय रूप, जो हड्डियों के स्वास्थ्य और कैल्शियम अवशोषण के लिए आवश्यक है।

    विनाश के कारक: किडनी को सड़ाने वाले आहार
    स्वस्थ किडनी को भी लंबे समय तक हानिकारक तत्वों के संपर्क में रहने से धीरे-धीरे नुकसान पहुंचता है। किडनी के मरीजों के लिए तो ये आहार जहर समान होते हैं। नीचे कुछ प्रमुख आहार और पोषक तत्वों की सूची है जिनसे बचना चाहिए:

    अतिरिक्त सोडियम (नमक)
    सोडियम की अधिक मात्रा किडनी के लिए सबसे बड़ा दुश्मन है।

      • हानि का विज्ञान: सोडियम शरीर में पानी को बनाए रखता है (Water Retention)। जब आप अधिक नमक खाते हैं, तो किडनी को इस अतिरिक्त सोडियम को बाहर निकालने के लिए बहुत अधिक काम करना पड़ता है।
      • गंभीर परिणाम: लंबे समय तक इस अतिरिक्त दबाव के कारण रक्तचाप (Hypertension) बढ़ जाता है। हाई ब्लड प्रेशर ही किडनी फेल्योर का दूसरा सबसे बड़ा कारण है।
      • इनसे बचें: प्रॉसेस्ड मीट (सॉसेज, बेकन), डिब्बाबंद सूप, फास्ट फूड, चिप्स, और अचार। एक स्वस्थ व्यक्ति को भी प्रतिदिन 2,300 \text{ mg} (लगभग एक छोटा चम्मच) से अधिक सोडियम नहीं लेना चाहिए।

      उच्च फॉस्फोरस युक्त खाद्य पदार्थ
      जब किडनी स्वस्थ होती है, तो यह आसानी से अतिरिक्त फॉस्फोरस को बाहर निकाल देती है। लेकिन जब किडनी कमजोर हो जाती है, तो फॉस्फोरस रक्त में जमा होने लगता है।

        • हानि का विज्ञान: रक्त में अत्यधिक फॉस्फोरस कैल्शियम को हड्डियों से बाहर खींच लेता है। इससे हड्डियाँ कमजोर (Kidney Bone Disease) हो जाती हैं और रक्त वाहिकाओं में खतरनाक कैल्शियम जमाव (Calcification) हो सकता है।
        • इनसे बचें: डेयरी उत्पाद: दूध, पनीर, और दही जैसे डेयरी उत्पादों में प्राकृतिक रूप से फॉस्फोरस अधिक होता है। किडनी के मरीजों को इनका सेवन सीमित करना चाहिए और लो-फॉस्फोरस विकल्प (जैसे चावल का दूध) चुनना चाहिए।
        • कोला/सोडा ड्रिंक्स: गहरे रंग के कोला ड्रिंक्स में ‘फॉस्फोरिक एसिड’ होता है जो तेजी से रक्त में फॉस्फोरस बढ़ाता है।
        • सूखे मेवे और बीज: (जैसे सूरजमुखी के बीज, कद्दू के बीज) भी सीमित मात्रा में लेने चाहिए।

        पोटेशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ
        पोटेशियम एक आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट है, लेकिन इसकी अधिकता किडनी के मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

          • हानि का विज्ञान: खराब किडनी पोटेशियम को बाहर नहीं निकाल पाती, जिससे रक्त में पोटेशियम का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाता है (हाइपरकलेमिया – Hyperkalemia)।
          • गंभीर परिणाम: हाइपरकलेमिया से हृदय की धड़कन अनियमित (Arrhythmia) हो सकती है और अचानक हृदयाघात (Cardiac Arrest) हो सकता है।
          • इनसे बचें (किडनी के रोगी): केले, संतरे, टमाटर, आलू (विशेषकर छिलके सहित), शकरकंद, और सूखे मेवे।

          प्रॉसेस्ड फूड्स और चीनी-युक्त पेय
          ये खाद्य पदार्थ अक्सर फैट, नमक, चीनी, और कृत्रिम योजकों (Artificial Additives) से भरे होते हैं, जो किडनी पर दोहरी मार करते हैं।

            • हानि का विज्ञान: उच्च चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन वजन बढ़ाता है और टाइप 2 डायबिटीज (मधुमेह) का कारण बनता है। डायबिटीज किडनी फेल्योर का सबसे बड़ा कारण है।
            • इनसे बचें: पैकेज्ड स्नैक्स, डिब्बाबंद रस, एनर्जी ड्रिंक्स, और कैंडी।

            किडनी के मित्र: स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले आहार
            किडनी को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित, पौष्टिक और विशेष रूप से निम्न सोडियम, निम्न फॉस्फोरस और निम्न पोटेशियम वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

            सब्जियां: पोषण और सुरक्षा का कवच
            ऐसी सब्जियां चुनें जिनमें पोटेशियम, फॉस्फोरस और सोडियम की मात्रा कम हो, लेकिन एंटीऑक्सिडेंट भरपूर हों:

              • लाल शिमला मिर्च (Red Bell Peppers): पोटेशियम में कम, लेकिन विटामिन सी, ए और बी6, और फोलिक एसिड से भरपूर। ये हानिकारक मुक्त कणों (Free Radicals) से लड़ती हैं।
              • फूलगोभी और पत्तागोभी: ये सब्जियां पोटेशियम में कम होती हैं और इनमें उच्च मात्रा में फाइबर, विटामिन के और फोलेट होता है, जो शरीर से सूजन (Inflammation) को कम करने में सहायक है।
              • प्याज, बैंगन और शलजम: ये तीनों सोडियम और पोटेशियम में बहुत कम होते हैं, और व्यंजनों को स्वादिष्ट बनाने का एक स्वस्थ तरीका प्रदान करते हैं।

              पोटेशियम कम करने का उपाय: आलू, शकरकंद जैसी उच्च पोटेशियम वाली सब्जियों को उबालने से पहले उन्हें छोटे टुकड़ों में काटकर पानी में भिगो दें। यह प्रक्रिया पोटेशियम की मात्रा को काफी हद तक कम कर देती है।

              फल और बेरीज: एंटीऑक्सिडेंट का पावरहाउस
              फल एंटीऑक्सिडेंट और फाइबर का उत्कृष्ट स्रोत होते हैं, जो किडनी को ऑक्सीडेटिव तनाव (Oxidative Stress) से बचाते हैं।

                • बेरीज (Berries): स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, रसभरी और क्रैनबेरी एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होती हैं। क्रैनबेरी विशेष रूप से मूत्र पथ के संक्रमण (Urinary Tract Infections – UTIs) को रोकने में मदद करती है।
                • सेब और नाशपाती: इनमें फाइबर की उच्च मात्रा होती है, जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करती है – ये दोनों कारक किडनी स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
                • चेरी (Cherries): विटामिन ए, सी और बी6 का अच्छा स्रोत, जो सूजन रोधी (Anti-inflammatory) गुण रखती हैं।

                प्रोटीन का सही चयन
                किडनी प्रोटीन के चयापचय से निकलने वाले अपशिष्ट (यूरिया) को बाहर निकालती है। इसलिए, किडनी के रोगियों को प्रोटीन की मात्रा नियंत्रित करनी चाहिए, लेकिन इसकी गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए।

                  • अंडे का सफेद भाग (Egg Whites): यह लगभग शुद्ध प्रोटीन है और इसमें फॉस्फोरस की मात्रा बहुत कम होती है। यह किडनी को अनावश्यक रूप से काम कराए बिना उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन प्रदान करता है।
                  • वसा रहित चिकन: बिना स्किन का चिकन (Skinless Chicken) कम वसा वाला और किडनी के लिए सुरक्षित प्रोटीन विकल्प है।
                  • ओमेगा-3 युक्त मछली: सैल्मन, मैकेरल और टूना जैसी मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर होता है, जो रक्त वाहिकाओं में सूजन को कम करने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है।

                  जीवनशैली और समग्र दृष्टिकोण
                  किडनी के स्वास्थ्य को केवल आहार से नहीं, बल्कि समग्र जीवनशैली से बनाए रखा जा सकता है।

                  1. हाइड्रेशन (पानी का महत्व)
                    किडनी का काम पानी पर निर्भर करता है। पर्याप्त पानी पीने से किडनी अपशिष्ट पदार्थों को अधिक कुशलता से बाहर निकाल पाती है। हालांकि, हृदय या किडनी फेल्योर वाले मरीजों को द्रव सेवन को सीमित करने की सलाह दी जाती है। स्वस्थ लोगों के लिए, प्रतिदिन 8-10 गिलास पानी आवश्यक है।
                  2. रक्तचाप और मधुमेह का नियंत्रण
                    किडनी फेल्योर के दो सबसे बड़े कारण हैं:
                  • उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure)
                  • अनियंत्रित मधुमेह (Diabetes)
                    इन दोनों स्थितियों को आहार नियंत्रण, दवा और नियमित व्यायाम से सख्ती से नियंत्रित करना किडनी को बचाने की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है।

                  नियमित व्यायाम
                  सप्ताह में कम से कम 150 मिनट (जैसे तेज चलना) व्यायाम करना वजन को नियंत्रित रखता है, रक्तचाप को कम करता है और रक्त शर्करा के स्तर को बेहतर बनाता है, ये सभी किडनी स्वास्थ्य के लिए सीधे तौर पर फायदेमंद हैं।

                    स्वस्थ बनाम मरीज: आहार विशेषज्ञ की भूमिका
                    यह ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है कि इस लेख में दी गई सलाह सामान्य स्वास्थ्य के लिए है। क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) के विभिन्न चरणों में, डाइट संबंधी आवश्यकताएं नाटकीय रूप से बदल जाती हैं।

                    • उदाहरण के लिए, किडनी फेल्योर के अंतिम चरण (End-Stage Renal Disease) में, पोटेशियम, फॉस्फोरस और प्रोटीन का सेवन बहुत सख्ती से प्रतिबंधित करना पड़ सकता है।
                    • ऐसे में, एक नेफ्रोलॉजिस्ट (Nephrologist) और एक पंजीकृत डायटिशियन की सलाह पर एक व्यक्तिगत आहार योजना (Personalized Diet Plan) बनाना अनिवार्य होता है।

                    किडनी शरीर का सबसे मेहनती फिल्टर है, और इसकी देखभाल करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। यह काम महंगी दवाओं से नहीं, बल्कि रसोई में सही चुनाव करने से शुरू होता है। नमक, चीनी, और प्रॉसेस्ड फूड्स को कम करके, और हरी सब्जियों, बेरीज, और लीन प्रोटीन को अपनाकर, हम अपनी किडनी को लंबी, स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीने में मदद कर सकते हैं। अपनी प्लेट को बुद्धिमानी से चुनकर, आप न केवल अपनी किडनी को, बल्कि अपने पूरे शरीर के स्वास्थ्य को बचाते हैं।

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