केरल स्टोरी 2 पर बवाल, अनुराग के प्रोपेगेंडा वार पर डायरेक्टर का पलटवार बोले, सच चुभे तो क्या करें
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संवाद 24 डेस्क। फिल्मी दुनिया में एक बार फिर वैचारिक जंग छिड़ गई है। अपकमिंग फिल्म केरल स्टोरी 2 के ट्रेलर ने रिलीज से पहले ही ऐसा तूफान खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया से लेकर इंडस्ट्री के गलियारों तक गर्मी बढ़ गई है। एक सीन को लेकर मशहूर फिल्मकार अनुराग कश्यप की तीखी टिप्पणी सामने आई, जिसके बाद फिल्म के निर्देशक ने भी खुलकर जवाब दिया। अब यह मामला सिर्फ एक फिल्म तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अभिव्यक्ति की आज़ादी और सामाजिक जिम्मेदारी की बहस में बदल चुका है।
ट्रेलर का सीन बना तूफान की वजह
फिल्म के ट्रेलर में एक ऐसा दृश्य दिखाया गया है, जिसमें एक लड़की को कथित तौर पर उसकी इच्छा के विरुद्ध कुछ खाने के लिए मजबूर किया जाता है। इसी सीन को आधार बनाकर अनुराग कश्यप ने फिल्म पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि किसी को जबरदस्ती कुछ खिलाने जैसी बात अविश्वसनीय लगती है और इस तरह के दृश्य समाज में गलत संदेश फैला सकते हैं। उनकी यह टिप्पणी सामने आते ही इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोग उनके समर्थन में खड़े दिखे, तो कई लोगों ने इसे फिल्म की कहानी को समझे बिना की गई टिप्पणी बताया।
डायरेक्टर का करारा पलटवार
आलोचना पर चुप न रहते हुए फिल्म के निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह ने खुलकर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बहस तथ्यों और संवेदनशील मुद्दों पर होनी चाहिए, न कि किसी दृश्य को बिना संदर्भ के “प्रोपेगेंडा” बताकर खारिज कर देने पर। निर्देशक का कहना है कि फिल्म किसी समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं बनाई गई, बल्कि यह उन घटनाओं को दिखाने की कोशिश है जिन्हें वे सामाजिक सच्चाई मानते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर किसी को कहानी पर आपत्ति है, तो पहले पूरी फिल्म देखकर राय बनानी चाहिए।
आपकी कला और हमारा सच, बढ़ी बयानबाज़ी
निर्देशक ने अपने बयान में यह सवाल भी उठाया कि जब कुछ फिल्में संवेदनशील या विवादित विषयों को छूती हैं, तो उन्हें क्रिएटिव फ्रीडम कहा जाता है, लेकिन जब कोई फिल्म सामाजिक मुद्दों को सामने लाने का दावा करती है, तो उसे तुरंत प्रोपेगेंडा की संज्ञा दे दी जाती है।
इस टिप्पणी ने बहस को और तेज कर दिया। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए हैं। कोई इसे बोलने की आज़ादी बता रहा है, तो कोई इसे फिल्म रिलीज से पहले का प्रमोशनल शोर।
फिल्म से आगे बढ़ी वैचारिक लड़ाई
मामला अब सिर्फ एक सीन या बयान तक सीमित नहीं रहा। यह बहस इस बात तक पहुंच गई है कि सिनेमा की सीमाएं क्या होनी चाहिए? क्या फिल्मकारों को सामाजिक विषयों पर बोलने का पूरा अधिकार है, या उन्हें संभावित असर को देखते हुए सावधानी बरतनी चाहिए, विशेषज्ञ मानते हैं कि सिनेमा समाज का आईना भी है और प्रभावशाली माध्यम भी। ऐसे में हर संवेदनशील विषय पर बनी फिल्म अपने साथ बहस और जिम्मेदारी दोनों लेकर आती है।
सीक्वल पर बढ़ी निगाहें
केरल स्टोरी 2 अपने पहले भाग की सफलता के बाद आ रही है, इसलिए स्वाभाविक रूप से दर्शकों की उत्सुकता अधिक है। मेकर्स का दावा है कि इस बार कहानी और भी व्यापक दायरे में जाएगी और कुछ ऐसे पहलुओं को सामने लाएगी जिन पर पहले चर्चा कम हुई है। हालांकि विवाद ने फिल्म की चर्चा जरूर बढ़ा दी है। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि कभी-कभी विरोध भी फिल्म के लिए पब्लिसिटी का काम कर जाता है।
बॉलीवुड में बढ़ती बयानबाज़ी की संस्कृति
पिछले कुछ वर्षों में कई फिल्मों को रिलीज से पहले ही आलोचना और समर्थन की दो धाराओं का सामना करना पड़ा है। सोशल मीडिया ने हर बयान को तुरंत वायरल कर दिया है, जिससे बहस और तीखी हो जाती है। इस मामले में भी यही हुआ, एक टिप्पणी ने पूरे विमर्श को जन्म दे दिया। अब हर कोई अपने-अपने नजरिए से इस विवाद को देख रहा है।
फैसला दर्शकों के हाथ
फिलहाल फिल्म की रिलीज का इंतजार है। असली परीक्षा तब होगी जब दर्शक सिनेमाघरों में जाकर पूरी कहानी देखेंगे। क्या यह फिल्म समाज के किसी गंभीर मुद्दे पर प्रकाश डालेगी, या फिर इसे सिर्फ एक विवादित प्रोजेक्ट के रूप में याद किया जाएगा, यह आने वाला समय तय करेगा। इतना जरूर है कि केरल स्टोरी 2 ने रिलीज से पहले ही यह साबित कर दिया है कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि विचारों की जंग का मैदान भी बन सकता है। अब सबकी निगाहें पर्दा उठने पर टिकी हैंसच भारी पड़ेगा या विवाद?






