उत्तर प्रदेश सरकार की नई पहल: आयुष कॉलेजों को रिसर्च हब बनाकर लाइफस्टाइल रोगों पर शोध को मिलेगा बल
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संवाद 24 लखनऊ। प्रदेश सरकार ने राज्य में आयुष चिकित्सा शिक्षा संस्थानों को शोध‐केन्द्र (Research Hubs) के रूप में विकसित करने का बड़ा कदम उठाया है, जिसका उद्देश्य जीवनशैली से जुड़े गंभीर रोगों- जैसे डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कैंसर पर आयुष आधारित शोध को गति प्रदान करना है।
सरकार की इस नई नीति के तहत प्रमुख आयुष कॉलेजों और अस्पतालों को आधुनिक शोध सुविधाओं से लैस किया जाएगा और केंद्रीय अनुसंधान संस्थानों के साथ समझौते (MoU) भी किए जाएंगे, ताकि गंभीर बीमारियों पर डेटा आधारित अध्ययन, मानकीकृत उपचार प्रोटोकॉल और चिकित्सीय विधियों का वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव हो सके।
उद्देश्य यह है कि पारंपरिक आयुष चिकित्सा पद्धतियाँ सिर्फ उपचार तक सीमित न रहें, बल्कि वैज्ञानिक शोध और प्रमाण आधारित अभ्यास के माध्यम से वैश्विक स्तर पर अपनाए जाएँ। इसमें डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर तथा अन्य जीवनशैली से जुड़े रोगों पर आयुष चिकित्सा के प्रभाव, लाभ और उपचार परिणामों का विश्लेषण शामिल होगा।
राज्य स्वास्थ्य रणनीति में रिसर्च का मजबूत स्थान
मुख्य सचिव तथा आयुष विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया है कि निर्धारित संस्थानों में शोध सुविधाओं का विकास कर उन्हें इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर और रिसर्च सेंटर का रूप दिया जाएगा। इनमें क्लिनिकल ट्रायल, रोग विश्लेषण, रोकथाम रणनीतियों का विकास और आयुष तथा आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के बीच समन्वय पर काम किया जाएगा।
राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से न सिर्फ आयुष चिकित्सा की प्रतिष्ठा बढ़ेगी, बल्कि लाइफस्टाइल रोगों के उपचार में नये समाधान खोजने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति होगी। साथ ही यह कदम आयुष शिक्षा को भी शोध-उन्मुख बनाएगा, जिससे चिकित्सकों और विद्यार्थियों को शोध-क्षमता विकसित करने का अवसर मिलेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विकास
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र के व्यापक विस्तार का यह ही हिस्सा है। हाल ही में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित हेल्थटेक कॉन्क्लेव में यह लक्ष्य भी स्पष्ट किया गया कि प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य और मेडिकल टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे 35 करोड़ से अधिक लोगों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
सरकार की इस नीति से अपेक्षा है कि आयुष आधारित चिकित्सीय अध्ययन और शोध कार्यों की गुणवत्ता में सुधार, लाइफस्टाइल रोगों पर प्रभावी उपचार विधियों का विकास, तथा आयुष चिकित्सा के समग्र योगदान को वैज्ञानिक मानकों पर स्थापित करना संभव होगा।






