‘डॉ. डूम’ पीटर शिफ की चेतावनी : चांदी में फिलहाल जोखिम, सोने को बताया सुरक्षित निवेश
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संवाद 24 डेस्क। 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट की भविष्यवाणी कर चर्चा में आए अर्थशास्त्री पीटर शिफ ने निवेशकों को चांदी से दूरी बनाए रखने और सोने में निवेश पर जोर दिया है। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में शिफ ने कहा कि चांदी के बाजार में इस समय शॉर्ट-टर्म जोखिम अधिक है, जबकि सोने में अपेक्षाकृत कम गिरावट की आशंका है।
शिफ के अनुसार, मौजूदा स्तर पर सोना 4,534 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है, जिसे उन्होंने “सस्ता” बताया। उन्होंने लिखा कि मौजूदा परिस्थितियों में सोना खरीदना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है, जबकि चांदी में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
चांदी की अस्थिरता पर टिप्पणी करते हुए शिफ ने कहा कि हालिया ऊंचे स्तर से चांदी में तेज गिरावट आई है। उनके मुताबिक, चांदी उस स्तर से तीन डॉलर से अधिक नीचे आ चुकी थी, जहां से उन्होंने अपनी टिप्पणी साझा की थी। उन्होंने अनुमान जताया कि चांदी के लिए मजबूत सपोर्ट 70 से 75 डॉलर प्रति औंस के दायरे में बन सकता है। बाद में बाजार में चांदी करीब 79.30 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती देखी गई।
यूरोपैक के मुख्य अर्थशास्त्री और ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट शिफ ने यह भी कहा कि चांदी के बाजार में हाल के सत्रों के दौरान भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। एक समय चांदी 84 डॉलर के करीब नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची, जिसके बाद इसमें तेज गिरावट आई और यह 75 डॉलर के ऊपर स्थिर हुई। इसके बाद इसमें आंशिक रिकवरी देखी गई।
सोमवार को कीमती धातुओं में गिरावट दर्ज की गई। बाजार आंकड़ों के अनुसार, स्पॉट गोल्ड 0.4 प्रतिशत फिसलकर 4,512.74 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि इससे पहले यह 4,549.71 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा था। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी गिरकर 4,536.40 डॉलर पर आ गए। वहीं, स्पॉट सिल्वर 1.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78.12 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा, जबकि सत्र की शुरुआत में यह 83.62 डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था।
आंकड़ों के मुताबिक, गिरावट के बावजूद चांदी ने वर्ष 2025 में अब तक करीब 181 प्रतिशत की तेजी दर्ज की है, जबकि इसी अवधि में सोना लगभग 72 प्रतिशत चढ़ चुका है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, चांदी में औद्योगिक मांग और सीमित आपूर्ति का असर बना हुआ है, जबकि सोने को ब्याज दरों में संभावित कटौती, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से समर्थन मिल रहा है।






