चांदी का बंपर रन : 10 दिन में ₹45 हजार की छलांग, 2026 में ₹2.40 लाख का लक्ष्य! निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए

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संवाद 24 नई दिल्ली। कीमती धातुओं के बाजार में चांदी ने साल 2025 में इतिहास रच दिया है। इस साल चांदी ने निवेशकों को करीब 180 प्रतिशत का जबरदस्त रिटर्न देकर मल्टीबैगर एसेट के रूप में अपनी पहचान मजबूत की है। जनवरी 2025 में जहां चांदी का भाव करीब ₹79,000 प्रति किलो था, वहीं दिसंबर के अंत तक यह ₹2.11 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि केवल 10 दिनों में (10 से 20 दिसंबर के बीच) चांदी की कीमतों में करीब ₹45,000 प्रति किलो की तेज उछाल दर्ज की गई।
तेजी के पीछे क्या हैं बड़े कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार चांदी की इस तेज रफ्तार के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण एक साथ काम कर रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर मौद्रिक नीति में नरमी की उम्मीद
आर्थिक अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश की मांग
चांदी की औद्योगिक मांग में तेज बढ़ोतरी
चांदी अब केवल कीमती धातु नहीं, बल्कि एक अहम औद्योगिक धातु भी बन चुकी है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), इलेक्ट्रॉनिक्स और डेटा सेंटर जैसे सेक्टर्स में इसके उपयोग ने मांग को नई ऊंचाई दी है।
सप्लाई में कमी बनी बड़ा फैक्टर
विशेषज्ञ बताते हैं कि चांदी की सप्लाई मांग के अनुरूप नहीं बढ़ पा रही है।
करीब 70 प्रतिशत चांदी का उत्पादन अन्य धातुओं के साथ बाय-प्रोडक्ट के रूप में होता है, जिससे सप्लाई को तेजी से बढ़ाना मुश्किल हो जाता है। इस कारण बाजार में लगातार कमी बनी हुई है।
फेडरल रिजर्व की भूमिका अहम
अमेरिकी सेंट्रल बैंक Federal Reserve की ब्याज दर नीति भी चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही है।
तीन लगातार दर कटौती के बाद फेड ने 2026 में और कटौती के संकेत दिए हैं। बाजार को उम्मीद है कि मार्च और जून में 25-25 बेसिस पॉइंट की अतिरिक्त कटौती हो सकती है, जिससे कीमती धातुओं को और समर्थन मिलेगा।
चीन के निर्यात प्रतिबंध से बढ़ी चिंता
बुलिश सेंटीमेंट को और मजबूती तब मिली, जब चीन ने जनवरी 2026 से चांदी के निर्यात पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की।
2027 तक लागू रहने वाली इस नीति के तहत निर्यातकों को सरकारी लाइसेंस लेना होगा। विश्लेषकों का मानना है कि इससे ग्लोबल सप्लाई और सख्त हो सकती है।
भारत में रिकॉर्ड फिजिकल डिमांड
घरेलू मोर्चे पर भी चांदी की मांग मजबूत बनी हुई है। सितंबर–अक्टूबर के दौरान भारत का चांदी आयात 2,600 टन को पार कर गया, जिसमें अकेले अक्टूबर में 1,715 टन शामिल था। यह आंकड़ा उद्योग और निवेश दोनों स्तरों पर मजबूत मांग को दर्शाता है।
2026 के लिए कितना बड़ा लक्ष्य
ब्रोकरेज हाउस Axis Direct के अनुसार, चांदी ने कई सालों के कंसॉलिडेशन से बाहर निकलकर एक मजबूत स्ट्रक्चरल अपट्रेंड में प्रवेश किया है।
गिरावट पर ₹1.70 लाख–₹1.78 लाख के स्तर को खरीदारी का मौका माना जा रहा है
2026 के लिए ₹2.40 लाख प्रति किलो का टारगेट दिया गया है
ब्रोकरेज का कहना है कि 2021 से 2025 के बीच बाजार में करीब 70 करोड़ औंस की कमी रही है, जो 2026 में बढ़कर 100 करोड़ औंस से ज्यादा हो सकती है।
जोखिम को लेकर चेतावनी
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तेजी फंडामेंटल से ज्यादा तेज है और इसमें उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसलिए निवेशकों को तेजी का पीछा करने के बजाय गिरावट पर रणनीतिक खरीदारी की सलाह दी जा रही है।
निवेश का तरीका क्या हो
बाजार जानकारों के अनुसार, ज्यादा जोखिम सहने की क्षमता रखने वाले निवेशक अपने पोर्टफोलियो का 5–10 प्रतिशत हिस्सा चांदी में रख सकते हैं।
फिजिकल चांदी की बजाय सिल्वर ETF या डिजिटल सिल्वर फंड को प्राथमिकता देने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि इनमें शुद्धता की चिंता कम होती है और लिक्विडिटी बेहतर रहती है।

Samvad 24 Office
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