25 साल में 26 गुना उछाल : ₹10 हजार की चांदी ने बना दिया लाखों का निवेश
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संवाद 24 नई दिल्ली। सोने की चमक के बीच चांदी ने पिछले ढाई दशकों में खुद को एक भरोसेमंद निवेश विकल्प के रूप में साबित किया है। साल 2000 में अगर किसी निवेशक ने चांदी में सिर्फ ₹10,000 लगाए होते और उन्हें बनाए रखा होता, तो आज उनकी कीमत ₹2.64 लाख से अधिक हो चुकी होती। यानी निवेश करीब 26 गुना बढ़ गया।
आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2000 में भारत में चांदी की औसत कीमत करीब ₹7,900 प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर ₹2.17 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गई है। इस दौरान चांदी ने 2,600% से ज्यादा का रिटर्न दिया है, जिसने दीर्घकालिक निवेशकों को चुपचाप मालामाल किया।
बाजार की गिरावट में भी बनी सुरक्षा कवच
विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी ने महंगाई और शेयर बाजार की अस्थिरता के दौर में एक मजबूत ढाल की तरह काम किया है। डॉट-कॉम संकट, वैश्विक वित्तीय मंदी, कोविड महामारी और हालिया भू-राजनीतिक तनाव जैसे दौर में भी इस धातु ने अपने मूल्य को काफी हद तक संभाले रखा। इसी कारण मल्टी-एसेट पोर्टफोलियो में इसकी भूमिका लगातार बढ़ी है।
औद्योगिक मांग से मिल रहा अतिरिक्त सहारा
हालिया रिपोर्ट में Yes Bank ने कहा है कि चांदी केवल सेफ हेवन नहीं रही, बल्कि अब यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर्स, सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा क्षेत्र जैसी उभरती जरूरतों का भी अहम हिस्सा बन चुकी है। इन सेक्टरों में बढ़ती खपत से 2026 तक इसकी मांग मजबूत बने रहने की उम्मीद जताई गई है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं कीमतें
साल 2025 में चांदी ने नए रिकॉर्ड बनाए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर पहली बार $70 प्रति औंस के पार गया, जबकि भारत में MCX पर चांदी ₹2.16 लाख प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंची। इसी अवधि में चांदी ने प्रदर्शन के मामले में सोने को भी पीछे छोड़ दिया—जहां सोने में करीब 76% तेजी आई, वहीं चांदी 140% तक चढ़ गई।
तेजी के पीछे क्या वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक तनाव, डॉलर में कमजोरी, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद और खनन आपूर्ति में कमी ने मिलकर चांदी की कीमतों को मजबूती दी है। अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर सालाना 2,500 टन से ज्यादा की आपूर्ति कमी बाजार को और कसा सकती है।
हालांकि चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहता है, लेकिन इसके लंबे समय के आंकड़े बताते हैं कि धैर्य रखने वाले निवेशकों को शानदार फायदा मिला है। यही वजह है कि मौजूदा अनिश्चित माहौल में चांदी एक मजबूत दीर्घकालिक निवेश और पोर्टफोलियो डायवर्सिफायर के रूप में उभरकर सामने आई है।






