अलॉटमेंट के बाद बढ़ेगा लीज रेंट? कोर्ट के फैसले से खरीदारों को बड़ी राहत

Share your love

संवाद 24 डेस्क। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लीजहोल्ड प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए एक अहम सवाल अक्सर खड़ा होता है क्या प्रॉपर्टी अलॉट होने के बाद अथॉरिटी अतिरिक्त पैसे या बढ़ा हुआ लीज रेंट मांग सकती है? हालिया अदालती फैसलों और कानूनी विशेषज्ञों की राय ने इस मुद्दे पर स्थिति काफी हद तक साफ कर दी है।
राजस्थान में सामने आए एक मामले में हाईकोर्ट ने साफ कहा कि यदि सरकार या अथॉरिटी ने जमीन एकमुश्त प्रीमियम पर लीज पर दी है और लीज डीड में वार्षिक या आवर्ती किराए का कोई प्रावधान नहीं है, तो बाद में एकतरफा तरीके से नया लीज रेंट थोपना कानूनन सही नहीं माना जा सकता।
लीजहोल्ड प्रॉपर्टी का ढांचा क्या कहता है?
नोएडा जैसे नियोजित शहरों में अधिकतर प्लॉट और आवासीय संपत्तियां 90 या 99 साल की लीज पर दी जाती हैं। इस अवधि के दौरान खरीदार को संपत्ति का पूरा उपयोग अधिकार मिलता है, लेकिन मालिकाना हक अथॉरिटी के पास रहता है। कई मामलों में अथॉरिटी अलॉटमेंट के समय दो विकल्प देती है—
सालाना लीज रेंट
एकमुश्त लीज रेंट (One Time Lease Rent)
यदि खरीदार एकमुश्त लीज रेंट चुका देता है और लीज डीड में यह स्पष्ट लिखा है कि आगे कोई वार्षिक भुगतान देय नहीं होगा, तो बाद में अतिरिक्त शुल्क मांगने की गुंजाइश बेहद सीमित हो जाती है।
कानूनी नजरिया क्या है?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 के तहत लीज को वैध बनाने के लिए सालाना किराया अनिवार्य नहीं है। लीज की शुरुआत में दिया गया प्रीमियम ही पर्याप्त माना जाता है। अदालतों ने कई मामलों में यह दोहराया है कि—
अनुबंध की शर्तें दोनों पक्षों पर समान रूप से लागू होती हैं
बिना स्पष्ट क्लॉज के अथॉरिटी शर्तों में मनमाना बदलाव नहीं कर सकती
राजस्थान केस से क्या सीख मिलती है?
राजस्थान में एक मंडी समिति ने 99 साल की लीज पर दिए गए प्लॉट्स के लिए तीन साल बाद नया लीज डीड लागू करते हुए बाजार मूल्य का 5% वार्षिक लीज रेंट जोड़ने की कोशिश की। जबकि नीलामी की शर्तों में केवल एकमुश्त प्रीमियम का ही उल्लेख था। हाईकोर्ट ने इस अतिरिक्त बोझ को रद्द कर दिया और कहा कि अलॉटमेंट की मूल शर्तें ही अंतिम मानी जाएंगी।
नोएडा खरीदारों के लिए क्या मतलब?
अगर लीज डीड में बढ़ोतरी या संशोधन का क्लॉज है, तो अथॉरिटी शर्तों के अनुसार बदलाव कर सकती है
यदि एकमुश्त लीज रेंट चुका दिया गया है और कोई अतिरिक्त भुगतान का प्रावधान नहीं है, तो बिना सहमति नया शुल्क नहीं लगाया जा सकता
किसी भी नोटिस या मांग से पहले लीज डीड को ध्यान से पढ़ना जरूरी है
संवाद 24 की सलाह
लीजहोल्ड प्रॉपर्टी में निवेश करते समय केवल कीमत ही नहीं, बल्कि लीज डीड की हर शर्त समझना बेहद जरूरी है। किसी भी अस्पष्टता की स्थिति में कानूनी सलाह लेना भविष्य के बड़े विवादों से बचा सकता है। राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला यह याद दिलाता है कि सरकारी अथॉरिटी भी अनुबंध की सीमाओं से बाहर नहीं जा सकती।

Samvad 24 Office
Samvad 24 Office

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News