100% से ज्यादा मुनाफे के बाद दुविधा में सिल्वर ETF निवेशक, अब बेचें या बने रहें? जानिए एक्सपर्ट्स की रणनीति
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संवाद 24 नई दिल्ली। साल 2025 में चांदी ने निवेश की दुनिया में नया इतिहास रच दिया है। सिल्वर ETF में निवेश करने वालों को अब तक 100 फीसदी से भी ज्यादा का शानदार रिटर्न मिल चुका है। तेज उछाल के बाद निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह मुनाफा वसूलने का सही समय है या अभी निवेश बनाए रखना चाहिए?
रिकॉर्ड रिटर्न ने बढ़ाई उलझन
कमोडिटी बाजार में चांदी ने इस साल सभी प्रमुख एसेट क्लास को पीछे छोड़ दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में सिल्वर ETF ने औसतन करीब 127% का रिटर्न दिया है। कई फंड्स में यह रिटर्न 130% के आसपास तक पहुंच गया है। इस तेजी ने निवेशकों को खुश तो किया है, लेकिन साथ ही सही समय पर फैसला लेने की चुनौती भी खड़ी कर दी है।
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेज बढ़त के बाद पूरी तरह निवेश बनाए रखना जोखिम भरा हो सकता है।
पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग की सलाह देते हुए जानकार कहते हैं कि अगर चांदी का वजन तय सीमा से ज्यादा हो गया है, तो आंशिक मुनाफावसूली समझदारी होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, कुल निवेश का 25–33% मुनाफा निकालकर सुरक्षित करना बेहतर रणनीति हो सकती है, ताकि गिरावट आने पर दोबारा एंट्री ली जा सके।
अल्पकालिक निवेशकों को खासतौर पर उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहने की जरूरत है।
नए निवेशकों के लिए क्या रणनीति?
विशेषज्ञों की राय है कि अब एकमुश्त बड़ी रकम लगाने से बचना चाहिए।
चांदी को कुल पोर्टफोलियो का 5–9% तक ही सीमित रखना बेहतर माना जा रहा है।
नए निवेशक SIP या चरणबद्ध निवेश का रास्ता अपनाएं, ताकि कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर कम हो।
अगर कीमतों में गिरावट आती है और भाव 1.70 लाख से 1.78 लाख रुपये प्रति किलो के दायरे में आते हैं, तो इसे खरीदारी का बेहतर मौका माना जा सकता है।
आगे का रास्ता कैसा रहेगा?
बाजार जानकारों का मानना है कि चांदी अब 2 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंच चुकी है, ऐसे में 2026 में 2025 जैसी विस्फोटक तेजी दोहराना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि, सोलर सेक्टर से बढ़ती मांग, औद्योगिक उपयोग और वैश्विक स्तर पर सप्लाई की सीमाएं आने वाले समय में चांदी को मजबूती दे सकती हैं।
मतलब साफ है—आगे मुनाफा होगा, लेकिन रास्ता सीधा नहीं बल्कि उतार-चढ़ाव से भरा रहेगा।
निष्कर्ष
सिल्वर ETF निवेशकों के लिए यह समय भावनाओं में बहने का नहीं, बल्कि अनुशासित फैसले लेने का है। आंशिक मुनाफावसूली, संतुलित पोर्टफोलियो और चरणबद्ध निवेश—यही वो मंत्र हैं जो रिकॉर्ड रिटर्न के बाद भी निवेश को सुरक्षित और टिकाऊ बना सकते हैं।






