India–Oman FTA : खाड़ी में भारत की ‘महाडील’, बदलेगा व्यापार का खेल, प्रतिद्वंद्वियों की बढ़ेगी बेचैनी
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत और ओमान के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA/CEPA) ने भारत की खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को नई मजबूती दी है। इस समझौते के जरिए दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह करार न सिर्फ भारत के निर्यात को बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक व्यापार संतुलन पर भी असर डालेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। भारत की ओर से वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ओमान की ओर से कैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ ने दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब भारत पहले ही यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और ईएफटीए जैसे साझेदारों के साथ व्यापार समझौते कर चुका है।
वित्त वर्ष 2024–25 में भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 10.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें भारत का निर्यात लगभग 4 अरब डॉलर, जबकि आयात 6.5 अरब डॉलर से अधिक रहा।
भारत ओमान से मुख्य रूप से: पेट्रोलियम उत्पाद, यूरिया, पेटकोक, जिप्सम, रसायन, लोहा-इस्पात और कच्चा एल्युमिनियम का आयात करता है, जो कुल आयात का बड़ा हिस्सा हैं।
वहीं भारत से ओमान को निर्यात होने वाले प्रमुख उत्पादों में: खनिज ईंधन और रसायन, मशीनरी, बिजली उपकरण, जहाज, बॉयलर, अनाज, चाय, कॉफी, मसाले, परिधान और खाद्य उत्पाद शामिल हैं।
महाडील से भारत को क्या फायदा?
नए समझौते के तहत कई भारतीय उत्पादों को ओमान के बाजार में शून्य या बेहद कम शुल्क पर पहुंच मिलेगी। खास तौर पर: टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट
लेबर-इंटेंसिव सेक्टर में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी। इससे रोजगार सृजन और निर्यात दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
किन देशों की बढ़ेगी चिंता?
इस समझौते का सबसे बड़ा असर उन देशों पर पड़ सकता है, जो अब तक खाड़ी बाजारों में मजबूत पकड़ बनाए हुए थे। विशेषज्ञों के मुताबिक: चीन को सबसे बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि भारतीय सामान अब ज्यादा सस्ते और प्रतिस्पर्धी होंगे। पाकिस्तान के लिए यह रणनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर नुकसानदेह माना जा रहा है। वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देश, जो टेक्सटाइल और श्रम आधारित उद्योगों में भारत के प्रतिद्वंद्वी हैं, उन्हें भी बाजार हिस्सेदारी घटने की आशंका है।
बदलते समीकरण
India–Oman FTA को केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि अरब सागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक उपस्थिति के रूप में देखा जा रहा है। यह डील आने वाले वर्षों में भारत को खाड़ी क्षेत्र का अहम आर्थिक भागीदार बना सकती है और “मेक इन इंडिया” को वैश्विक मंच पर नई ताकत दे सकती है।






