टेक्सटाइल रेस में भारत की बड़ी छलांग: बांग्लादेश की उथल-पुथल के बीच ग्लोबल ब्रांड्स का भरोसा भारत पर शिफ्ट
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संवाद 24 डेस्क। वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में भारत की स्थिति लगातार मजबूत होती जा रही है। नवंबर महीने में भारत के कपड़ा, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसने दक्षिण एशिया के पारंपरिक गारमेंट हब बांग्लादेश के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। राजनीतिक अस्थिरता और सप्लाई चेन संकट से जूझ रहे बांग्लादेश से कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स अब धीरे-धीरे भारत की ओर रुख कर रहे हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर में भारत का कपड़ा और परिधान निर्यात 285.58 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 9.4 प्रतिशत अधिक है। खास बात यह रही कि हस्तशिल्प निर्यात में जबरदस्त 29.7 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि भारत सिर्फ बड़े पैमाने पर उत्पादन ही नहीं, बल्कि वैल्यू-एडेड और हैंडमेड सेगमेंट में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।
हर सेगमेंट में बढ़त
नवंबर के दौरान रेडीमेड गारमेंट्स (RMG) निर्यात में 11.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। मैनमेड यार्न, फैब्रिक्स और मेड-अप्स में 15.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जबकि कॉटन यार्न, फैब्रिक्स, मेड-अप्स और हैंडलूम उत्पादों में 4.1 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली। यह दर्शाता है कि भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री की बढ़त किसी एक श्रेणी तक सीमित नहीं है।
जनवरी से नवंबर 2025 की अवधि में (हस्तशिल्प को छोड़कर) कपड़ा और परिधान निर्यात 3,256 करोड़ डॉलर रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले मामूली लेकिन स्थिर बढ़त को दर्शाता है। इसी दौरान रेडीमेड गारमेंट्स और जूट उत्पादों में भी सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।
अमेरिका बना सबसे बड़ा बाजार
भारी टैरिफ के बावजूद अमेरिका भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात के लिए सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। यह भारत की सप्लाई क्षमता, गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी को लेकर वैश्विक भरोसे को दर्शाता है। 2024-25 में भारत के टेक्सटाइल और परिधान सेक्टर का कुल आकार लगभग 179 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जिसमें घरेलू बाजार और निर्यात दोनों की अहम भूमिका है।
बांग्लादेश की मुश्किल, भारत का मौका
बीते कुछ महीनों में बांग्लादेश राजनीतिक अस्थिरता, श्रमिक आंदोलनों और ऊर्जा संकट से जूझता रहा है। इसका सीधा असर वहां की टेक्सटाइल सप्लाई चेन पर पड़ा है। चूंकि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा टेक्सटाइल निर्यात पर निर्भर है, इसलिए यह संकट उसके लिए गंभीर साबित हो सकता है।
इसके उलट भारत के पास कच्चे कपास की उपलब्धता, बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और हाल के श्रम सुधार जैसे कई संरचनात्मक फायदे हैं। यही वजह है कि जोखिम कम करने के इरादे से कई वैश्विक ब्रांड भारत को ‘सेफ और भरोसेमंद विकल्प’ के रूप में देख रहे हैं।
गारमेंट किंग बनने की राह पर भारत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत इसी रफ्तार से अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाता रहा और बांग्लादेश अपनी आंतरिक चुनौतियों से समय रहते नहीं निपटा, तो आने वाले वर्षों में दक्षिण एशिया के टेक्सटाइल मैप पर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नवंबर के आंकड़े इस ओर इशारा कर रहे हैं कि भारत न सिर्फ अस्थायी लाभ उठा रहा है, बल्कि लंबी अवधि में वैश्विक गारमेंट बाजार में नेतृत्व की भूमिका निभाने की ओर बढ़ रहा है।






