चीन की टेक्नोलॉजी पाबंदी से अटका अंबानी का ग्रीन मिशन: भारत में रिलायंस की लिथियम बैटरी सेल योजना पर ब्रेक

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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को अपने ग्रीन एनर्जी विस्तार में बड़ा झटका लगा है। कंपनी ने भारत में लिथियम-आयन बैटरी सेल निर्माण की अपनी योजना फिलहाल रोक दी है। इसकी मुख्य वजह चीन से आवश्यक बैटरी सेल तकनीक हासिल न हो पाना बताया जा रहा है।

उद्योग सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस इस वर्ष से ही बैटरी सेल उत्पादन शुरू करने की तैयारी में थी, लेकिन चीनी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता के कारण प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका।

चीनी नियम बने सबसे बड़ी बाधा
रिलायंस चीन की बैटरी कंपनी Xiamen Hithium Energy Storage Technology से सेल मैन्युफैक्चरिंग तकनीक लाइसेंस पर लेने के लिए बातचीत कर रही थी। हालांकि, चीन द्वारा रणनीतिक क्षेत्रों से जुड़ी तकनीकों के निर्यात पर सख्त नियंत्रण लगाए जाने के बाद यह समझौता रुक गया।

सूत्रों के अनुसार, रिलायंस ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज कंटेनर और उत्पादन से जुड़ी कुछ मशीनरी आयात कर ली है, लेकिन कोर सेल टेक्नोलॉजी के बिना उत्पादन शुरू करना संभव नहीं हो सका।

फोकस बदला, लेकिन चुनौती बरकरार
तकनीकी अड़चन के बाद रिलायंस ने फिलहाल Battery Energy Storage System (BESS) के निर्माण पर जोर बढ़ाया है, जिनका उपयोग उसकी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में बिजली भंडारण के लिए किया जाना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन क्लीन एनर्जी और बैटरी सेक्टर में अपनी रणनीतिक बढ़त बनाए रखने के लिए तकनीकी साझेदारियों पर सख्ती कर रहा है, जिससे भारत जैसे देशों की लोकल मैन्युफैक्चरिंग योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

कंपनी का पक्ष
रिलायंस के प्रवक्ता ने कहा है कि कंपनी की दीर्घकालिक योजनाओं में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उनके अनुसार,
“BESS, बैटरी पैक और सेल मैन्युफैक्चरिंग हमारी ऊर्जा भंडारण रणनीति का अभिन्न हिस्सा हैं और इन सभी क्षेत्रों में काम जारी है।” हालांकि, चीनी कंपनी के साथ बातचीत पर कंपनी ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया।

अंबानी का बड़ा दांव और अनिश्चित टाइमलाइन
भारत और एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी ने पहले घोषणा की थी कि रिलायंस की बैटरी गीगाफैक्ट्री 2026 से उत्पादन शुरू करेगी। कंपनी ने 2021 में ग्रीन एनर्जी कारोबार के तहत 10 अरब डॉलर निवेश और चार गीगाफैक्ट्री लगाने की योजना घोषित की थी।

सूत्रों का कहना है कि जापान, यूरोप और दक्षिण कोरिया की वैकल्पिक तकनीकों पर भी विचार किया गया, लेकिन वे भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए महंगी और कम प्रतिस्पर्धी साबित हुईं।

आत्मनिर्भरता की राह में नई चुनौती
गौरतलब है कि 2022 में रिलायंस की रिन्यूएबल यूनिट Reliance New Energy भारत सरकार की PLI योजना के तहत बैटरी सेल प्लांट लगाने वाली चुनिंदा कंपनियों में शामिल थी। यह योजना इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा भंडारण के लिए आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।

रिलायंस की इस योजना पर लगा ब्रेक यह संकेत देता है कि वैश्विक तकनीकी राजनीति और आपूर्ति-श्रृंखला प्रतिबंध भारत के ग्रीन एनर्जी और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग लक्ष्यों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं।

Samvad 24 Office
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