धरती पर स्वर्ग है भारत: द्वीपों से हिमशिखरों तक, जलप्रपातों से मरुस्थल तक, यहां मौजूद है दुनिया का हर नजारा

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संवाद 24 संजीव सोमवंशी। कहते हैं कि ईश्वर ने जब इस धरती को बनाया, तो उसने अपनी सबसे उत्कृष्ट कृतियाँ एक ही स्थान पर समेट दीं और उस स्थान का नाम रखा भारत। यह कोई काव्य-कल्पना नहीं, बल्कि एक ऐसी भौगोलिक सच्चाई है जो दुनिया भर के भूगोलवेत्ता और पर्यटन विशेषज्ञ स्वीकार करते हैं। भारत शायद विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जहाँ एक साथ बर्फीले पर्वत, रेगिस्तान, वर्षावन, नदी डेल्टा, समुद्री द्वीप, झरने, हिल स्टेशन, उपजाऊ मैदान और हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता के अवशेष एक साथ पाए जाते हैं।

फिर भी एक विचित्र विरोधाभास है भारतीय पर्यटक हर साल लगभग 35 अरब डॉलर विदेश यात्राओं पर खर्च कर देते हैं। मालदीव, बाली, दुबई, थाईलैंड, यूरोप ये गंतव्य भारतीयों के सबसे पसंदीदा बन गए हैं। जबकि उनके अपने देश में 1,380 से अधिक द्वीप हैं, सैकड़ों जलप्रपात हैं, दर्जनों विश्वस्तरीय हिल स्टेशन हैं, और हर प्रकार का मौसम अनुभव करने के अवसर हैं। इस लेख के माध्यम से संवाद 24 अपने पाठकों को उस भारत से मिलाना चाहता है जो उनके पास है, पर जिसे वे देख नहीं पाए हैं।

1,380 द्वीप: अपना समुद्री स्वर्ग, अपनी मालदीव

भारत में 1,380 से अधिक द्वीप हैं, जिनमें से 572 अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में, 39 लक्षद्वीप में, 26 महाराष्ट्र में, 23 केरल में, 20 पश्चिम बंगाल में, 15 तमिलनाडु में, 14 गोवा में, 9 गुजरात में और 7-7 उड़ीसा व आंध्र प्रदेश में हैं। इनमें से बहुत से द्वीप आज भी निर्जन और अनछुए हैं, ऐसे जहाँ मानवीय हस्तक्षेप ने प्रकृति को अभी तक नहीं छुआ है। अंडमान का हैवलॉक द्वीप (स्वराज द्वीप) जिसका राधानगर बीच ‘एशिया के सर्वश्रेष्ठ समुद्री तटों’ में गिना जाता है नीले-हरे पानी और सफेद रेत के लिए विश्व प्रसिद्ध है। 

बाराटांग द्वीप के चूना पत्थर की गुफाएँ और मड वॉल्कैनो किसी अन्य ग्रह जैसा अनुभव देते हैं। लक्षद्वीप का अगत्ती और मिनिकॉय द्वीप प्रवाल भित्तियों से भरे नीले लैगून के लिए अद्वितीय हैं, यहाँ 10-12 फुट की गहराई में भी समुद्री रंग स्पष्ट दिखते हैं। गोवा के द्वीप पुर्तगाली विरासत और भारतीय संस्कृति का संगम हैं। केरल के द्वीपों पर नारियल के झुरमुट, बैकवाटर और मछुआरों की जीवनशैली एक अलग ही संसार रचती है।

झरनों का देश: जहाँ पत्थर भी गाते हैं

भारत दुनिया के सबसे शानदार जलप्रपातों का घर है। पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर के पहाड़, विंध्य और सतपुड़ा की पर्वत-श्रृंखलाएँ, ये सब मिलकर ऐसे सैकड़ों जलप्रपात रचती हैं जो किसी भी देखने वाले को चमत्कृत कर दें। कर्नाटक के शिमोगा जिले में वराही नदी पर स्थित कुंचिकल जलप्रपात 455 मीटर की ऊँचाई से गिरता है और भारत का सबसे ऊँचा जलप्रपात होने का गौरव रखता है, यह एशिया का भी दूसरा सबसे ऊँचा जलप्रपात है। इसके आसपास का हरा-भरा वन-वातावरण इसे और भी मनोरम बनाता है।

कर्नाटक का जोग जलप्रपात (महात्मा गांधी जलप्रपात) जो शरावती नदी पर 255 मीटर की ऊँचाई से चार धाराओं में गिरता है, अपनी भव्यता में बेमिसाल है। इन चार धाराओं को राजा, रानी, रोअरर और रॉकेट नाम से जाना जाता है। मेघालय के चेरापूंजी के पास नोहकलिकाई जलप्रपात 335 मीटर से गिरता है और नीचे एक पन्ना हरे रंग की झील बनाता है जो पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। गोवा और कर्नाटक की सीमा पर मांडवी नदी पर दूधसागर जलप्रपात 310 मीटर से गिरता है, यहाँ दूध जैसा सफेद पानी हरे घने जंगल के बीच इस कदर खूबसूरत लगता है कि कोई इसे देखकर बरबस रुक जाता है।

मध्यप्रदेश में जबलपुर के पास नर्मदा नदी पर धुआंधार जलप्रपात, जहाँ पानी इतनी तेजी से गिरता है कि धुंए जैसा भाप बनती है, एक अलग ही अनुभव है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में इंद्रावती नदी पर चित्रकूट जलप्रपात को ‘भारत का नियाग्रा’ कहा जाता है, इसकी चौड़ाई 300 मीटर से भी अधिक है। मानसून में यह जलप्रपात जब पूरे उफान पर होता है, तब इसका दृश्य देखते ही बनता है। केरल का मीनमुट्टी जलप्रपात, उड़ीसा का बरेहीपानी जलप्रपात (399 मीटर), झारखंड का हुंडरू जलप्रपात ये सब प्रकृति की उत्कृष्ट कृतियाँ हैं जो भारत के अलग-अलग कोनों में बिखरी पड़ी हैं।

हिमालय की गोद: शिमला से लेह-लद्दाख तक का जादू

भारत के हिल स्टेशनों की बात करें तो यह सूची इतनी लंबी है कि इसे संक्षेप में समेटना कठिन है। हिमाचल प्रदेश का शिमला जिसे ‘पहाड़ियों की रानी’ कहा जाता है औपनिवेशिक वास्तुकला, देवदार के घने जंगल, और ब्रिटिशकालीन माल रोड के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ सर्दियों में बर्फ की चादर इसे किसी यूरोपीय नगर जैसा बना देती है। मसूरी उत्तराखंड में ‘पहाड़ों की रानी’ अपने जलप्रपातों, कैम्पटी फॉल, गन हिल, और हिमालय के मनोरम दृश्यों के लिए विख्यात है।

मनाली जहाँ रोहतांग दर्रे की बर्फ और ब्यास नदी का संगम होता है साहसिक खेलों, पैराग्लाइडिंग और स्कीइंग के शौकीनों का पसंदीदा गंतव्य है। कुल्लू घाटी के सेब के बागान और फूलों से लदी वादियाँ एक अलग ही सौंदर्य रचती हैं। उत्तराखंड का नैनीताल जहाँ नैनी झील के चारों ओर शहर बसा है और रानीखेत जो शांति और हरियाली के लिए अनुपम है इन हिल स्टेशनों पर एक बार जाने वाला व्यक्ति बार-बार लौटना चाहता है।

लेकिन भारत का सबसे अद्भुत हिल-डेस्टिनेशन शायद लेह-लद्दाख है। यह ठंडा मरुस्थल, जहाँ एक तरफ हिमालय की बर्फीली चोटियाँ हैं और दूसरी तरफ लद्दाखी पठार के भूरे-सुनहरे रंग यह धरती पर किसी और जगह नहीं मिलता। पैंगोंग त्सो झील जिसका नीला रंग किसी नीलम जैसा लगता है, नुब्रा घाटी के दो-कूबड़ वाले ऊँट, और यहाँ के बौद्ध मठ ये सब लेह-लद्दाख को एक स्वप्निल गंतव्य बनाते हैं। जम्मू-कश्मीर की डल झील, गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग ये तो जैसे धरती के टुकड़े नहीं, किसी चित्रकार का कैनवास हों।

दक्षिण के हिल स्टेशन: ऊटी, मुन्नार, कुर्ग और कोडाइकनाल

उत्तर के हिल स्टेशनों की तरह दक्षिण भारत के हिल स्टेशन भी किसी स्वर्ग से कम नहीं। तमिलनाडु का ऊटी जिसे नीलगिरी पर्वतों की रानी कहा जाता है समुद्र तल से 2,623 मीटर की ऊँचाई पर है। यहाँ का नीलगिरी माउंटेन रेलवे (टॉय ट्रेन) यूनेस्को विश्व धरोहर है। चाय बागान, बोटनिकल गार्डन और दूर-दूर तक फैली हरियाली ऊटी को एक ऐसा अनुभव देती है जो आजीवन स्मरण रहे। हर 12 साल में एक बार खिलने वाला नीलकुरिंजी फूल जब इन पहाड़ियों को नीले रंग से ढक देता है, तब इस दृश्य को देखने दुनिया भर से पर्यटक आते हैं।

केरल का मुन्नार जहाँ तीन नदियाँ मुथिरपुझा, नल्लथन्नी और कुंडल मिलती हैं चाय के बागानों, दुधिया जलप्रपातों और शोला वनों के लिए विख्यात है। इरविकुलम राष्ट्रीय उद्यान जहाँ लुप्तप्राय नीलगिरी टार की बड़ी आबादी है यहाँ का एक विशेष आकर्षण है। कर्नाटक का कुर्ग (कोडगु) जिसे ‘भारत का स्कॉटलैंड’ कहते हैं, कॉफी के बागानों, मसालों की सुगंध और कावेरी नदी के उद्गम के लिए प्रसिद्ध है। तमिलनाडु का कोडाइकनाल जिसे ‘हिल स्टेशनों की राजकुमारी’ कहते हैं अपनी कृत्रिम झील और घाटी दृश्यों के लिए अनुपम है।

पूर्वोत्तर भारत: बादलों का घर, जहाँ प्रकृति अपने सबसे कच्चे रूप में मिलती है

मेघालय का अर्थ ही है बादलों का घर। और यह नाम सार्थक भी है। यहाँ की राजधानी शिलांग को ‘पूर्व का स्कॉटलैंड’ कहा जाता है। वार्ड्स लेक, एलीफेंटा फॉल, शिलांग पीक ये सब पर्यटकों को बार-बार बुलाते हैं। शिलांग से 56 किलोमीटर दूर चेरापूंजी जो विश्व में सर्वाधिक वर्षा के लिए जाना जाता है, में नोहकलिकाई जलप्रपात, डबल डेकर रूट ब्रिज और बादलों से भरी खाइयाँ एक अलौकिक अनुभव हैं। चेरापूंजी के पास मावलिन्नोंग गाँव को ‘एशिया का सबसे स्वच्छ गाँव’ का दर्जा मिला है।

असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जो विश्व का एकमात्र स्थान है जहाँ एक-सींग वाले गैंडे की सर्वाधिक संख्या है ब्रह्मपुत्र के किनारे फैला एक जीवंत जंगल है। यहाँ हाथी, बाघ, जंगली भैंसे और सैकड़ों प्रजाति के पक्षी पाए जाते हैं। असम की चाय बागानों में सुबह की धुंध में उठती भाप और हरी-हरी पत्तियों का दृश्य किसी भी फोटोग्राफर का सपना होता है। अरुणाचल प्रदेश की तवांग घाटी जहाँ विश्व के सबसे बड़े बौद्ध मठों में से एक स्थित है सूर्योदय के समय जब बर्फ सुनहरी होती है, तब यह दृश्य जीवन में एक बार जरूर देखा जाना चाहिए।

राजस्थान: रेत के टीलों से उठती भव्यता की कहानी

भारत के उत्तर-पश्चिम में थार मरुस्थल जो विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा मरुस्थल है, राजस्थान के एक बड़े हिस्से में फैला है। यह मरुस्थल जितना शुष्क और कठोर है, उतना ही आकर्षक भी है। जैसलमेर जिसे ‘सोनार किला’ या ‘स्वर्ण नगरी’ कहते हैं रेत के टीलों के बीच उगे एक मध्यकालीन किले का शहर है। यहाँ की हवेलियाँ, संकरी गलियाँ और शाम को रेत के टीलों पर उगता चाँद यह दृश्य किसी रहस्यमयी परीकथा जैसा लगता है।

जोधपुर ‘नीला शहर’ जहाँ घरों की दीवारें नीले रंग से पुती हैं, और मेहरानगढ़ किला ऊँची चट्टान पर अभेद्य योद्धा जैसा खड़ा है भारत की शौर्यगाथा का जीवंत साक्षी है। उदयपुर ‘झीलों का शहर’ जहाँ पिछोला झील और फतेह सागर झील शहर को आईना दिखाती हैं दुनिया के सबसे रोमांटिक शहरों में गिना जाता है। जयपुर ‘गुलाबी नगरी’ का हवामहल, जल महल और आमेर किला देश-विदेश से लाखों पर्यटकों को खींचते हैं। माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन अरावली की पहाड़ियों में बसा है और दिलवाड़ा के जैन मंदिर यहाँ की सबसे बड़ी धरोहर हैं।

उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़: इतिहास, प्रकृति और आदिम संस्कृति

उत्तर प्रदेश में आगरा का ताजमहल मुग़ल सम्राट शाहजहाँ द्वारा प्रेम की अमर निशानी के रूप में बनाया गया विश्व के सात आश्चर्यों में शामिल है। सूर्योदय के समय सफेद संगमरमर पर पड़ती गुलाबी रोशनी और सूर्यास्त में नारंगी आभा ताजमहल का यह रूप देखकर आँखें नम हो जाती हैं। फतेहपुर सीकरी, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज का त्रिवेणी संगम ये सब उत्तर प्रदेश की विरासत के अनमोल रत्न हैं।

मध्यप्रदेश जिसे ‘भारत का दिल’ कहते हैं में खजुराहो के मंदिर (यूनेस्को विश्व धरोहर), साँची का बौद्ध स्तूप, ओरछा के किले, और पचमढ़ी हिल स्टेशन सब मिलकर इसे भारत का सबसे विविध राज्य बनाते हैं। जबलपुर के पास नर्मदा नदी के दोनों तटों पर खड़ी संगमरमर की सफेद चट्टानों के बीच नौका विहार यह अनुभव किसी स्वप्न जैसा होता है। छत्तीसगढ़ का बस्तर जहाँ जनजातीय संस्कृति, घने जंगल, चित्रकूट जलप्रपात और इंद्रावती नदी एक साथ मिलती हैं भारत के सबसे अनछुए पर्यटन स्थलों में से एक है।

केरल: ईश्वर का अपना देश बैकवाटर, वर्षावन और आयुर्वेद

केरल को ‘ईश्वर का अपना देश’ (God’s Own Country) कहा जाता है और इस नाम में रत्तीभर भी अतिशयोक्ति नहीं है। यहाँ का बैकवाटर क्षेत्र जिसमें नदियाँ, झीलें और नहरें एक जाल-सी बनाती हैं केरल की सबसे अनोखी पहचान है। हाउसबोट पर रात बिताते हुए नारियल के पेड़ों के बीच तारों भरे आसमान को देखना यह अनुभव किसी और देश में नहीं मिलता। अल्लेप्पी और कुमारकोम इस बैकवाटर पर्यटन के केंद्र हैं।

केरल का वायनाड जहाँ चाय, कॉफी और मसालों के बागान हैं, झरने हैं और हाथियों की आवाजाही है एक आदर्श इको-टूरिज्म गंतव्य है। पेरियार राष्ट्रीय उद्यान जहाँ हाथियों के झुंड नदी में स्नान करते दिखते हैं एक अनुपम प्राकृतिक दृश्य प्रस्तुत करता है। इसके अलावा केरल का आयुर्वेदिक पर्यटन भी वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है यहाँ विदेशों से लोग केवल आयुर्वेदिक उपचार और पंचकर्म के लिए आते हैं।

गोवा और कर्नाटक का तटीय सौंदर्य: समुद्र, रेत और इतिहास

गोवा भारत का सबसे छोटा राज्य दुनिया भर के पर्यटकों की पसंदीदा जगह है। यहाँ के समुद्री तट पणजी, कलंगुट, बागा, अंजुना, पालोलेम अपने-अपने स्वभाव और सौंदर्य में अनूठे हैं। पुर्तगाली चर्च, पुराने किले, रंग-बिरंगे घर और काजू-फेनी की सुगंध गोवा की यह पहचान अन्यत्र दुर्लभ है। ओल्ड गोवा का बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस यूनेस्को विश्व धरोहर है। कर्नाटक का हम्पी विजयनगर साम्राज्य की पूर्व राजधानी अपने विशाल खंडहरों, मंदिरों और विचित्र शिलाखंडों के लिए यूनेस्को सूची में है।

कर्नाटक का कूर्ग, मैसूर और चिकमगलूर ये तीनों स्थान भारत के सबसे आकर्षक पर्यटन केंद्रों में गिने जाते हैं। मैसूर के महाराजा का महल जो रात में हजारों बल्बों से जगमगाता है देश के सबसे भव्य महलों में एक है। यहाँ की दशहरा शोभायात्रा को देखना एक जीवनकाल का अनुभव है। आंध्र प्रदेश का विशाखापत्तनम जहाँ पहाड़ और समुद्र एक साथ मिलते हैं और तिरुपति का वेंकटेश्वर मंदिर जो विश्व का सबसे अधिक देखा जाने वाला धार्मिक स्थल है इस क्षेत्र के दो महत्त्वपूर्ण पर्यटन केंद्र हैं।

हिम-पर्यटन और विंटर स्पॉट: जहाँ बर्फ में बन जाता है स्वर्ग

भारत में शीतकालीन पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं। हिमाचल प्रदेश का कुफरी, सोलांग वैली (मनाली), रोहतांग दर्रा और खज्जियार जिसे ‘भारत का मिनी स्विट्जरलैंड’ कहते हैं सर्दियों में बर्फ से ढक जाते हैं और स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग जैसे खेलों के लिए आदर्श बन जाते हैं। खज्जियार की गोल घासभरी घाटी, देवदार के घेरे और बीच में झील यह नजारा देखकर कोई भी यूरोप की याद भूल जाए।

उत्तराखंड में औली जो गढ़वाल हिमालय में है भारत का सर्वश्रेष्ठ स्की रिसोर्ट माना जाता है। यहाँ से नंदादेवी, माना और कामेत जैसी हिमशिखरों का दृश्य दिखता है। गुलमर्ग (जम्मू-कश्मीर) जिसे ‘फूलों की घाटी’ कहते हैं सर्दियों में बर्फ की गहरी परत से ढका विश्वस्तरीय स्की डेस्टिनेशन बन जाता है। लद्दाख में सर्दियों में जमी हुई जांस्कर नदी पर ‘चादर ट्रेक’ जिसमें पर्यटक जमी बर्फ पर चलते हैं दुनिया के सबसे रोमांचक ट्रेक में से एक माना जाता है।

धार्मिक पर्यटन: आत्मा को तृप्त करने वाली यात्राएँ

भारत के धार्मिक पर्यटन की विविधता और गहराई अतुलनीय है। वाराणसी जो विश्व के सबसे प्राचीन जीवंत नगरों में से एक है, की गंगा आरती देखकर हर आस्थावान व्यक्ति भाव-विभोर हो जाता है। यहाँ के 84 घाट, सुबह की भोर में स्नान करते श्रद्धालु, नाव पर बैठकर गंगा की चौड़ाई का अनुभव यह वाराणसी है जो मृत्यु को भी उत्सव बना देता है। चार धाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री हर वर्ष लाखों तीर्थयात्रियों को अपनी ओर खींचते हैं।

नर्मदा नदी के बीच ओमकारेश्वर द्वीप पर स्थित ज्योतिर्लिंग, मध्यप्रदेश का उज्जैन (महाकालेश्वर), अमृतसर का स्वर्ण मंदिर जहाँ हर दिन लगभग एक लाख श्रद्धालु लंगर में भोजन करते हैं बोधगया का महाबोधि मंदिर और अजमेर की दरगाह ये सभी स्थल भारत की धार्मिक एकता और विविधता के प्रतीक हैं। तिरुपति का वेंकटेश्वर मंदिर प्रतिदिन सबसे अधिक दर्शनार्थियों को आकर्षित करने वाला मंदिर है। रामेश्वरम, द्वारका, पुरी, माता वैष्णो देवी ये सब भारत की आत्मा के केंद्र हैं।

विरासत पर्यटन: पत्थर भी बोलते हैं यहाँ

भारत में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल 42 से अधिक स्थल हैं जो भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक समृद्धि का अंतरराष्ट्रीय प्रमाण है। ताजमहल, लाल किला, कुतुबमीनार, हम्पी, अजंता-एलोरा की गुफाएँ, खजुराहो के मंदिर, साँची का स्तूप, चोल राजवंश के जीवंत मंदिर, महाबलिपुरम के रथ मंदिर, फतेहपुर सीकरी, राजस्थान के पहाड़ी किले ये सब मिलकर भारत को ‘विरासत पर्यटन’ का सबसे समृद्ध देश बनाते हैं।

अजंता की गुफाओं में ईसा से 200 वर्ष पूर्व उकेरी गई भित्तिचित्र आज भी इतनी जीवंत और सुंदर हैं कि आधुनिक चित्रकार भी दंग रह जाते हैं। एलोरा में हिंदू, बौद्ध और जैन तीनों धर्मों की गुफाएँ एक ही स्थान पर हैं। कैलाश मंदिर जो एक विशाल चट्टान को काटकर बनाया गया है मानव इतिहास की सबसे असाधारण वास्तुकला उपलब्धि है। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ और रणथंभौर के किले वीरता और बलिदान की कहानियाँ सुनाते हैं।

साहसिक पर्यटन: हर रोमांचप्रेमी के लिए भारत में है एक गंतव्य

भारत साहसिक पर्यटन (adventure tourism) के लिए भी विश्व के सर्वोत्तम गंतव्यों में है। हिमालय में ट्रेकिंग चाहे वह उत्तराखंड का हेमकुंड साहिब हो, हिमाचल का पिन पार्वती पास हो, या कश्मीर का ग्रेट लेक ट्रेक ये सब अनुभव जीवन भर याद रहते हैं। ऋषिकेश जिसे ‘विश्व की योग राजधानी’ कहते हैं गंगा में रिवर राफ्टिंग, बंजी जंपिंग, रॉक क्लाइंबिंग और कैंपिंग के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है।

स्कूबा डाइविंग के लिए अंडमान और लक्षद्वीप के समुद्री जल; पैराग्लाइडिंग के लिए हिमाचल का बीर-बिलिंग जो विश्व के सर्वश्रेष्ठ पैराग्लाइडिंग स्थलों में गिना जाता है; सफारी के लिए राजस्थान का रणथंभौर, मध्यप्रदेश का कान्हा और बांधवगढ़, उत्तराखंड का जिम कॉर्बेट ये सब भारत में साहसिक और वन्यजीव पर्यटन को विश्वस्तरीय बनाते हैं। बांधवगढ़ में बाघों का घनत्व दुनिया में सबसे अधिक है।

भारत को जानिए, भारत को महसूस कीजिए: 

भारत केवल एक देश नहीं है यह एक जीवंत सभ्यता है जो प्रकृति, इतिहास, आस्था और रोमांच को एक सूत्र में पिरोती है। इस देश में ऐसा कुछ भी नहीं जो यहाँ न हो बर्फ भी है, रेत भी है, समुद्र भी है, पर्वत भी हैं, जलप्रपात भी हैं, मरुस्थल भी है, मंदिर भी हैं, चाय बागान भी हैं, कॉफी बागान भी, जंगल भी हैं, झीलें भी। एक देश में पूरी दुनिया का अनुभव यही है भारत की सबसे बड़ी पूँजी।

यदि भारतीय पर्यटक प्रति वर्ष खर्च होने वाले 35 अरब डॉलर का आधा भाग भी अपने देश में पर्यटन पर लगाएँ, तो इससे लाखों रोजगार सृजित होंगे, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, और देश का पर्यटन उद्योग विश्व के शीर्ष तीन में स्थान पा सकता है। ‘देखो अपना देश’ केवल एक सरकारी नारा नहीं होना चाहिए यह एक राष्ट्रीय संकल्प बनना चाहिए।

संवाद 24 की ओर से यह विनम्र आग्रह है अगली बार जब भी यात्रा का मन बने, पहले भारत का नक्शा खोलें। इस देश के किसी कोने में किसी अनछुए झरने के पास, किसी हिल स्टेशन की सुबह में, किसी द्वीप के नीले जल में, किसी प्राचीन मंदिर की शांति में आपको वह सब मिलेगा जो आप विदेश में ढूंढ रहे हैं। धरती पर स्वर्ग है और उस स्वर्ग का नाम भारत है।

Samvad 24 Office
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