ठग को ठगने वाले कानपुर के भूपेन्द्र की कहानी अब फिल्म में, नाना पाटेकर बने मुख्य किरदार
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संवाद 24 संवाददाता। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच जागरूकता की एक मिसाल बनी कानपुर के भूपेन्द्र सिंह की कहानी अब रियल लाइफ से रील लाइफ तक पहुंच गई है। साइबर ठगों को उन्हीं की चाल में मात देने वाले इस कनपुरिया युवक की कहानी पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक लघु फिल्म तैयार की है, जिसमें दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर मुख्य भूमिका निभाते नजर आएंगे।
यह लघु फिल्म लोगों को साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से बनाई गई है। फिल्म के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि कोई भी सरकारी जांच एजेंसी न तो “डिजिटल अरेस्ट” करती है और न ही वीडियो कॉल के माध्यम से वारंट या नोटिस भेजती है।
कैसे ठगा ठग को
बर्रा विश्वबैंक निवासी भूपेन्द्र सिंह के पास बीते वर्ष छह मार्च को एक अनजान नंबर से कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए आरोप लगाया कि भूपेन्द्र इंटरनेट पर आपत्तिजनक सामग्री देखते हैं और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है। साथ ही मामले को “रफा-दफा” करने के लिए 16 हजार रुपये की मांग की गई।
हालांकि भूपेन्द्र पहले से ही साइबर ठगी के तरीकों के प्रति जागरूक थे। उन्होंने अपनी असली पहचान छिपाते हुए खुद को इंटर का छात्र बताया और बातचीत को आगे बढ़ाया। जल्द ही उन्हें यकीन हो गया कि सामने वाला साइबर ठग है। इसके बाद उन्होंने ठग को सबक सिखाने की ठान ली।
भूपेन्द्र ने ठग से कहा कि उनके पास फिलहाल पैसे नहीं हैं, लेकिन एक चेन गिरवी रखी है, जिसे छुड़ाने के लिए तीन हजार रुपये चाहिए। लालच में आकर साइबर ठग ने तुरंत उनके खाते में पैसे ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद अलग-अलग बहाने बनाकर भूपेन्द्र ने उससे कुल दस हजार रुपये अपने खाते में मंगवा लिए। जब ठग को एहसास हुआ कि वह खुद ठगा जा चुका है, तो वह पैसे वापस करने की गुहार लगाने लगा।
जागरूकता से मिली जीत
भूपेन्द्र का कहना है कि साइबर ठगी के पैंतरों की जानकारी उन्हें दैनिक जागरण पढ़कर मिली थी। अखबार में प्रकाशित खबरों के जरिए वे पहले से सतर्क थे, जिससे वे ठग की चाल समझ पाए। दैनिक जागरण के माध्यम से ही उनकी कहानी लोगों तक पहुंची और अब उस पर फिल्म बनना उनके लिए गर्व की बात है।
फिल्म से मिलेगा अहम संदेश
राजा शांडिल्य द्वारा निर्देशित इस लघु फिल्म में नाना पाटेकर के साथ अभिनेता किशोरी सोनी और आदिल ईरानी भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। उत्तर प्रदेश पुलिस की इस पहल का उद्देश्य है कि लोग डरने के बजाय जागरूक बनें और साइबर ठगों के झांसे में न आएं।
भूपेन्द्र का मानना है कि यह फिल्म हर व्यक्ति को खुद से पहल करके जरूर देखनी चाहिए, ताकि साइबर ठगों की चालों को समझा जा सके और खुद को सुरक्षित रखा जा सके। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही जानकारी और सतर्कता से न सिर्फ ठगी से बचा जा सकता है, बल्कि ठगों को उन्हीं की भाषा में जवाब भी दिया जा सकता है।






