पौष पूर्णिमा से माघ स्नान का महापर्व प्रारंभ, 3 जनवरी से 1 फरवरी 2026 तक आस्था, संयम और साधना का पुण्यकाल
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संवाद 24 आचार्य मधुसूदन अग्निहोत्री। पौष मास की पूर्णिमा (3 जनवरी) से पवित्र माघ स्नान महापर्व का शुभारंभ हो रहा है, जो 1 फरवरी 2026, माघ पूर्णिमा तक चलेगा। सनातन हिंदू परंपरा में माघ मास को ‘माधव मास’ कहा गया है, जो स्वयं भगवान श्रीहरि विष्णु का ही एक पावन स्वरूप माना जाता है। यह काल केवल शारीरिक शुद्धि का नहीं, बल्कि आत्मा के उत्थान, मन के संयम और लोक–परलोक सुधार का एक दुर्लभ अवसर है।
माघ स्नान : लोक और परलोक सुधारने का मार्ग
धार्मिक शास्त्रों में वर्णन है कि माघ मास में –
माघे निमग्ना: सलिले सुशीते विमुक्तपापास्त्रिदिवं प्रयान्ति।
अर्थात माघ मास के शीतल जल में स्नान करने वाला व्यक्ति पापों से मुक्त होकर श्रेष्ठ गति को प्राप्त करता है।
माघ स्नान का आध्यात्मिक महत्व
सभी तीर्थों का जल अमृत तुल्य माना जाता है
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान से पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है
कल्पवास करने वालों के लिए यह आत्म-साधना का श्रेष्ठ काल है।
माघ स्नान के चमत्कारी लाभ
शारीरिक लाभ
रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि
आलस्य और जड़ता का नाश
शरीर में नई ऊर्जा का संचार
मानसिक लाभ
तनाव और चिंता में कमी
मन की एकाग्रता बढ़ती है
नकारात्मक विचारों से मुक्ति
आध्यात्मिक लाभ
दान–स्नान से महापुण्य की प्राप्ति
अश्वमेध यज्ञ के समान फल की मान्यता
ईश्वर के सान्निध्य की अनुभूति
माघ मास में ग्रह शांति के सरल ज्योतिषीय उपाय
ग्रह समस्या अचूक उपाय
सूर्य – मान सम्मान, स्वास्थ्य तांबे के लोटे से अर्घ्य,
मंत्र – ॐ घृणि सूर्याय नमः
चंद्रमा – मानसिक अशांति
पूर्णिमा पर दूध–चावल दान, शिव अभिषेक
शनि/राहु – बाधा, विलंब काले तिल, तेल, कंबल का दान
बृहस्पति – भाग्य, शिक्षा पीले वस्त्र, विष्णु सहस्रनाम पाठ
माघ मास के प्रमुख व्रत और पर्व (3 जनवरी – 1 फरवरी 2026)
6 जनवरी 2026 सकट चतुर्थी – संतान सुरक्षा और गणेश पूजन
14 जनवरी 2026 षटतिला एकादशी – तिल के छह प्रयोगों से पाप नाश
18 जनवरी मौनी अमावस्या – माघ मास का सबसे बड़ा स्नान पर्व
23 जनवरी बसंत पंचमी – विद्या और वाणी की देवी सरस्वती पूजन
26 जनवरी भीष्म अष्टमी – पितामह भीष्म की पुण्य स्मृति ।
1 फरवरी 2026 माघ पूर्णिमा – माघ स्नान का पूर्णाहुति दिवस
साधकों और गृहस्थों के लिए विशेष निर्देश
सात्विक भोजन और संयमित जीवन तिल का प्रयोग, दान, उबटन और स्नान
प्रतिदिन मानसिक जप –
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
यथाशक्ति अन्न, वस्त्र और सेवा–दान
माघ मास वह सेतु है, जो मनुष्य को भौतिकता से अध्यात्म की ओर ले जाता है। यह समय है, प्रकृति के निकट आने, अहंकार त्यागने और आत्मशुद्धि का। जो माघ को समझ लेता है, वह जीवन की दिशा भी समझ लेता है।







