दांतों की पायरिया, एक सामान्य समस्या जिसे नज़रअंदाज़ करना महँगा पड़ सकता है

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संवाद 24 डेस्क। पायरिया, जिसे डेंटल चिकित्सा भाषा में पेरिओडोंटाइटिस (Periodontitis) कहा जाता है, मुंह के उन ऊतकों का संक्रमण है जो आपके दांतों को सहारा देते हैं। यदि समय पर सही देखभाल न की जाए, तो यह संक्रमण दांतों की हड्डी को भी नुकसान पहुँचाता है और दांत ढीले या गिर भी सकते हैं। इसकी मूल वजह, मुँह में रहने वाले बैक्टीरिया से बनने वाला प्लाक (Plaque), जो समय के साथ बढ़कर टार्टर (सख्त जमा) बन जाता है और मसूड़ों के नीचे की पेशियों को नुकसान पहुँचाता है।

पायरिया के प्रमुख लक्षण जिन्हें नजरअंदाज़ न करें
यहाँ वे चेतावनी संकेत हैं जिनसे आप प्रारंभिक स्थिति को पहचान सकते हैं:
✔️ मसूड़ों का सूज़ना, लाल या गहरा रंग होना
✔️ ब्रश करते समय या खाने के दौरान मसूड़ों से खून आना
✔️ लगातार मुंह से बदबू (बदबूदार सांस) आना
✔️ मसूड़े पीछे हटना या दांतों के बीच गैप बनना
✔️ दांत ढीले होना या चबाने में दर्द
✔️ मसूड़ों पर पस या गंदगी का जमाव
ये लक्षण सिर्फ “हल्की तकलीफ़” नहीं बल्कि यह संकेत हैं कि आपका मुँह संक्रमण की ओर बढ़ रहा है।

क्यों होती है पायरिया?
पायरिया के कई प्रमुख कारण हैं:

गलत ब्रशिंग और फ्लॉस न करना – प्लाक जमा होने देता है।खराब डेंटल हाइजीन – जीभ, मॉलिका और दांतों के बीच की सफ़ाई न करना।
अनहेल्दी डायट – अधिक मीठे, चिपचिपे खाद्य पदार्थ।
तम्बाकू, शराब और धूम्रपान – मसूड़ों में सूजन को बढ़ाते हैं
अनियमित डेंटल चेक-अप – समय पर समस्या न पकड़ पाना।
याद रखें: कई बार बिना दर्द के भी मसूड़े संक्रमित हो सकते हैं, इसलिए शुरुआती लक्षणों को हल्का न समझें।

पायरिया से बचाव सबसे कारगर उपाय
यहाँ वे प्रभावी दैनिक आदतें हैं जो आपको पायरिया से दूर रख सकती हैं:

  1. सही और नियमित ब्रशिंग
    दिन में दो बार सॉफ्ट ब्रश से धीरे-धीरे ब्रश करें।
    ब्रश करने के बाद फ्लॉसिंग अवश्य करें ताकि दांतों के बीच जमा खाद्य कण निकल जाएँ।
  2. रोज़ाना कुल्ला और एंटीसेप्टिक माउथवॉश
    एंटीसेप्टिक माउथवॉश से बुरे बैक्टीरिया कम होते हैं और बैक्टीरियल संक्रमण की गति धीमी पड़ती है।
  3. हेल्दी आहार अपनाएँ
    विटामिन C और D, कैल्शियम, प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ मसूड़ों को ताकत देते हैं।
    शुगर और जंक फूड कम करें।
  4. धूम्रपान और शराब से परहेज़
    ये आदतें मसूड़ों में सूजन को बढ़ाती हैं और इलाज को कठिन बनाती हैं।
  5. नियमित डेंटल चेक-अप
    हर 6 महीने में डेंटिस्ट से चेक-अप करवाएँ और अगर लक्षण दिखें तो तुरंत मिलें।

पायरिया का इलाज, डॉक्टर की देखरेख में
???? 1. डीप क्लीनिंग (Scaling & Root Planing)

डेंटल प्रोफेशनल प्लाक और टार्टर हटाकर मसूड़ों के नीचे-तक सफ़ाई करते हैं, जिससे संक्रमण के कारण कम होते हैं।
???? 2. एंटीबायोटिक्स

डॉक्टर कभी-कभी एंटीबायोटिक थैरेपी भी देते हैं जिससे बैक्टीरिया की वृद्धि रोकती है और सूजन कम होती है।
???? 3. लेज़र या सर्जिकल ट्रीटमेंट
गंभीर मामलों में आधुनिक तकनीकों जैसे लेज़र ट्रीटमेंट या सर्जिकल इंस्ट्रूमेंटेशन की जरूरत पड़ सकती है।

???? घरेलू और प्राकृतिक सुझाव
हालाँकि घरेलू उपाय डॉक्टर के इलाज का विकल्प नहीं हैं, लेकिन ये मददगार हो सकते हैं:
???? नीम की दातुन या मंजन – मसूड़ों को मजबूत और बैक्टीरिया कम करने में सहायक।
???? लौंग तेल – दर्द और बदबू को कम कर सकता है।
???? त्रिफला चूर्ण से कुल्ला – पारंपरिक आयुर्वेदिक सहारा।

ध्यान दें: ये उपाय चिकित्सकीय इलाज का विकल्प नहीं हैं। समस्या गंभीर हो तो डेंटल स्पेशलिस्ट से परामर्श ज़रूरी है।

पायरिया सिर्फ मसूड़ों का दर्द नहीं है, यह एक संक्रमण है जो दांतों को खोने और कुल मौखिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। अपनी रोज़ाना की दंत स्वच्छता पर ध्यान देना, संतुलित आहार, नियमित चेक-अप और समय पर इलाज इसे रोकने के सबसे प्रभावी उपाय हैं।

Samvad 24 Office
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