विदेशी बिकवाली के बीच देसी निवेशकों का दम, 2025 में भारतीय शेयर बाजार संतुलन की मिसाल बना
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संवाद 24 डेस्क। भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2025 कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। एक तरफ जहां विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पूरे साल जमकर बिकवाली की, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और म्यूचुअल फंड्स ने मोर्चा संभालते हुए बाजार को बड़ी गिरावट से बचा लिया। आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में FIIs ने करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे, लेकिन इसके बावजूद बाजार में कोई बड़ी उथल-पुथल देखने को नहीं मिली।
विदेशी निवेशकों का मोहभंग
इस साल विदेशी निवेशकों का रुझान भारत से हटकर अमेरिका, चीन, जापान जैसे अन्य बाजारों की ओर रहा। ऊंचे वैल्यूएशन और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते FIIs लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालते रहे। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि घरेलू निवेशकों का मजबूत समर्थन नहीं होता, तो बाजार में भारी गिरावट तय थी।
म्यूचुअल फंड बना मजबूत ढाल
2025 में म्यूचुअल फंड और SIP निवेश ने बाजार को स्थिरता दी। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने न सिर्फ विदेशी बिकवाली की भरपाई की, बल्कि कई मौकों पर गिरते शेयरों में आक्रामक खरीदारी भी की। यही वजह रही कि सेंसेक्स और निफ्टी सीमित दायरे में ही उतार-चढ़ाव दिखाते रहे।
बदलता निवेश संतुलन
साल 2025 का सबसे बड़ा संरचनात्मक बदलाव यह रहा कि NSE में सूचीबद्ध कंपनियों में हिस्सेदारी के मामले में DIIs ने FIIs को पीछे छोड़ दिया। दस साल पहले जहां विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी करीब 21% और घरेलू निवेशकों की 11% थी, वहीं मार्च 2025 तक FIIs की हिस्सेदारी घटकर लगभग 17.5% रह गई, जबकि DIIs की बढ़कर 18.1% हो गई। यह बदलाव भारतीय निवेशकों के बढ़ते आत्मविश्वास का संकेत माना जा रहा है।
सेक्टरों में उलटफेर
इस साल बाजार में सेक्टोरल तस्वीर भी बदली। मीडिया, रियल एस्टेट, रेलवे, इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी जैसे सेक्टर कमजोर साबित हुए, जबकि फाइनेंशियल सर्विसेज, मेटल्स और ऑटो सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। रेलवे से जुड़े शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जहां कुल बाजार पूंजीकरण करीब 1.32 लाख करोड़ रुपये घट गया।
छोटे शेयरों का झटका
2025 में 120 से अधिक ऐसे शेयर रहे, जिनमें 25% से ज्यादा की गिरावट आई। इनमें बड़ी संख्या स्मॉल और माइक्रो कैप स्टॉक्स की रही। इससे यह धारणा भी टूटी कि छोटे शेयरों में जोखिम कम और मुनाफा तय होता है। कई निवेशक अब भी सही समय पर निकलने के इंतजार में हैं।
सोना-चांदी की चमक
शेयर बाजार की अस्थिरता के बीच गोल्ड और सिल्वर निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरे। दोनों की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला, जिससे बड़ी संख्या में निवेशक सुरक्षित विकल्प की ओर आकर्षित हुए।
रिटेल निवेशकों की सबसे बड़ी जीत, 2025 की सबसे बड़ी खासियत रही रिटेल निवेशकों का धैर्य। शुरुआती महीनों में 30 से 50 फीसदी तक की गिरावट के बावजूद अधिकांश निवेशक बाजार में टिके रहे। SIP के आंकड़े बता रहे हैं कि लंबी अवधि के निवेश की प्रवृत्ति और मजबूत हुई है।
निष्कर्ष: 2025 ने साफ संदेश दिया कि भारतीय शेयर बाजार अब केवल विदेशी पूंजी पर निर्भर नहीं है। देसी निवेशकों की मजबूती, म्यूचुअल फंड और SIP की निरंतरता ने यह साबित कर दिया कि बाजार को आगे बढ़ाने के लिए घरेलू विश्वास ही सबसे बड़ा इंजन बन चुका है।






