कार्यवाहक जज का एक्स-पार्टी आदेश! क्या प्रक्रिया सही थी? SC ने मांगी रिपोर्ट
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संवाद 24 डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एक मामले में यह गंभीर प्रश्न उठाया है कि जब नियमित जज अवकाश पर थे, तब कार्यवाहक जज द्वारा किराये के एक मामले में निष्कासन (eviction) आदेश पारित करना क्या न्यायिक प्रक्रिया और नियमों के अनुरूप था? शीर्ष अदालत ने इस कार्यप्रणाली की प्राथमिक समीक्षा के आधार पर कहा कि ऐसा कदम “प्राथमिक रूप से स्वीकार्य नहीं” प्रतीत होता है।
मामला क्या है?
यह विवाद एक विशेष याचिका से जुड़ा है, जिसमें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक निर्णय को चुनौती दी गई थी। मूल विवाद किराये के एक मामले से संबंधित था, जहां एक किरायेदार को निष्कासित करने का आदेश पारित किया गया था। याचिकाकर्ता ने मामला सुप्रीम कोर्ट में तब लिया जब गंभीर प्रक्रिया-गत सवाल खड़े हुए कि आदेश पारित करने वाला जज उस समय अस्वस्थ या छुट्टी पर था और नियमित जज मौजूद नहीं थे।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कोई नियमित न्यायाधीश अवकाश पर हो, तो इन-चार्ज जज के पास केवल कुछ सीमित कार्य करने का अधिकार होता है जैसे तात्कालिक अंतरिम आदेश देना। लेकिन अंतिम निष्कासन आदेश जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर बिना पक्ष को नोटिस दिए निर्णय देना, संभवतः उचित न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के आदेशों में न्यायिक प्रक्रिया और संस्थागत नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
शीर्ष अदालत ने क्या आदेश दिया?
इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाना है कि:
न्यायाधीश अवकाश पर होने की स्थिति में किन नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए,
इन-चार्ज जज की सीमित शक्तियों का विस्तार क्या है,
संबंधित नियम, विनियम तथा प्रशासनिक निर्देश क्या हैं जिनके तहत यह कदम उठाया गया।
अदालत ने यह भी कहा कि इन प्रक्रियाओं के सही अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी चाहिए ताकि आगे की सुनवाई में विस्तृत समीक्षा संभव हो सके। अगली तारीख पर यह मामला फिर से सूचीबद्ध होगा।
न्यायपालिका के कामकाज और पारदर्शिता पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट का रुख इस मामले में केवल आदेश की वैधता को चुनौती नहीं दे रहा, बल्कि न्यायपालिका के प्रक्रियात्मक नियमों और संस्थागत उत्तरदायित्वों पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है। अदालत ने कहा कि चाहे याचिकाकर्ता ने स्वयं premises खाली करने का वचन दिया हो, फिर भी संवैधानिक प्रक्रिया और न्यायिक गरिमा की रक्षा करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
यह मामला न्यायपालिका के आंतरिक नियम और प्रक्रियात्मक अनुशासन पर एक बड़ा सवाल उठाता है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि नियमित जज की अनुपस्थिति में न्यायिक निर्णयों की व्यापक पहुंच सीमित होनी चाहिए और इन-चार्ज जज केवल आवश्यक कार्यों के लिए अधिकृत हैं। अदालत द्वारा मांगी गई रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आगे की प्रक्रिया और निर्णय किस प्रकार होंगे।






