मोटे अनाज की वापसी: कानपुर का CSA विश्वविद्यालय ला रहा है श्रीअन्न क्रांति
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संवाद 24 संवाददाता। भारत में मोटे अनाज या श्रीअन्न को सुपरफूड का दर्जा मिला हुआ है, लेकिन गेहूं और चावल की उच्च उत्पादक प्रजातियों के दबदबे में ये अनाज लगभग लुप्त हो गए थे। अब कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) इनकी पुरानी विरासत को पुनर्जीवित करने में जुट गया है। विश्वविद्यालय मोटे अनाज जैसे कोदो, सांवा, कुटकी, काकुन और रागी के बीज उत्पादन, बीज बैंक स्थापना और किसानों को वैज्ञानिक खेती सिखाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।
CSA विश्वविद्यालय का हरा-भरा कैंपस अब मोटे अनाज के प्रक्षेत्रों से सजने वाला है। यहां लगभग 40 वर्ष पहले वैज्ञानिकों ने कोदो की KK-1, KK-2; सांवा की अनुराग, कंचन, चंदन; और काकुन की निश्चल जैसी प्रजातियां विकसित की थीं। अब दोबारा ये संस्थान अग्रणी भूमिका निभाने को तैयार है। विश्वविद्यालय ने हैदराबाद के भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIMR) से विभिन्न मोटे अनाजों के बीज मंगवाए हैं। साथ ही, अयोध्या के आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय से JT सांवा की प्रजाति भी प्राप्त की गई है।
ये विभिन्न मोटे अनाज की प्रजातियां सुपरफूड के रूप में जानी जाती हैं।
मोटे अनाज क्यों हैं खास?
ये अनाज न केवल पौष्टिक हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अनुकूल हैं:
कोदो → पोषण से भरपूर, कैंसर रोधी गुण, मधुमेह नियंत्रण, वजन घटाने और जोड़ों के दर्द में लाभकारी।
सांवा → उच्च प्रोटीन, कम कैलोरी, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत।
रागी → कैल्शियम से भरपूर, हड्डियों के लिए उत्तम।
काकुन → जलवायु अनुकूल, कम पानी में उगने वाली फसल।
ये फसलें बिना सिंचाई के भी बारिश पर निर्भर होकर अच्छी पैदावार दे सकती हैं, जो जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए वरदान हैं।
कोदो, सांवा, रागी और काकुन के पौधे व अनाज – प्रकृति का अनमोल उपहार।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष घोषित किया गया था, जिसने इन फसलों को वैश्विक पटल पर ला दिया। उत्तर प्रदेश में अब ज्वार, बाजरा और मक्का के अलावा अन्य मोटे अनाजों की खेती लगभग बंद हो चुकी थी, लेकिन बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है। केंद्र सरकार की प्रोत्साहन योजना के तहत उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद को 500 करोड़ रुपये का बजट मिला है। इसी के अंतर्गत CSA में मोटा अनाज बीज बैंक स्थापित किया जाएगा, जहां कानपुर और आसपास के जिलों के लिए उपयुक्त प्रजातियों के गुणवत्ता युक्त बीज किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
विश्वविद्यालय किसानों को वैज्ञानिक खेती के तरीके सिखाने के लिए भी सक्रिय है। जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में (5 तारीख को) किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जहां इन फसलों की बुवाई, देखभाल और उत्पादन बढ़ाने की तकनीकें सिखाई जाएंगी।
CSA के शोध एवं प्रसार निदेशक प्रो. आरके यादव का कहना है कि ये अनाज चलन से बाहर हो चुके थे, लेकिन सुपरफूड के रूप में इनकी मांग ने नई उम्मीद जगाई है। बीज बैंक से किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज मिलेंगे, जिससे उत्पादन और आय दोनों बढ़ेगी।
यह पहल न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल है। मोटे अनाज की यह वापसी पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की समृद्धि का प्रतीक बनेगी। CSA विश्वविद्यालय की यह क्रांति श्रीअन्न को फिर से भारतीय थाली का हिस्सा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।






