भारत ने पार किया 1 लाख पेट्रोल पंप का आंकड़ा, दुनिया में तीसरे स्थान पर, अमेरिका-चीन आगे
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत ने ईंधन रिटेलिंग के क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल किया है। देश में पेट्रोल पंपों की संख्या अब 1 लाख के पार पहुंच गई है। नवंबर 2025 के अंत तक भारत में कुल 1,00,266 पेट्रोल पंप संचालित हो रहे हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2015 की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। इसी के साथ भारत पेट्रोल पंपों की संख्या के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
पहले और दूसरे नंबर पर कौन
वैश्विक स्तर पर पेट्रोल पंपों की संख्या में United States पहले स्थान पर है। उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका में करीब 1.96 लाख रिटेल गैस स्टेशन हैं।
दूसरे स्थान पर China है, जहां पेट्रोल पंपों की संख्या 1.15 लाख से अधिक बताई जाती है। चीन की सबसे बड़ी ईंधन रिटेलर Sinopec के पास ही 30,000 से ज्यादा स्टेशन हैं।
सरकारी कंपनियों का दबदबा
भारत में पेट्रोल पंप नेटवर्क पर अब भी सरकारी कंपनियों का वर्चस्व बना हुआ है। कुल पंपों में से 90 प्रतिशत से अधिक का संचालन सरकारी तेल विपणन कंपनियां कर रही हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
Indian Oil Corporation (IOC) – 41,664 आउटलेट
Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL) – 24,605 आउटलेट
Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) – 24,418 आउटलेट
निजी क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी
निजी कंपनियों की मौजूदगी भी लगातार बढ़ रही है। रूस की रोसनेफ्ट समर्थित Nayara Energy Limited देश की सबसे बड़ी निजी ईंधन रिटेलर बनकर उभरी है, जिसके 6,921 पेट्रोल पंप हैं।
इसके अलावा Reliance Industries Limited और BP के संयुक्त उद्यम के 2,114 स्टेशन हैं, जबकि Shell के 346 आउटलेट्स देश में संचालित हैं।
2015 में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी जहां करीब 5.9 प्रतिशत थी, वह अब बढ़कर 9.3 प्रतिशत हो चुकी है।
ग्रामीण भारत में तेजी से विस्तार
पिछले एक दशक में ग्रामीण इलाकों में पेट्रोल पंपों की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
अब कुल पंपों में से करीब 29 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में हैं
2015 में यह आंकड़ा लगभग 22 प्रतिशत था
सरकारी कंपनियों ने हाईवे और ग्रामीण इलाकों में ईंधन की पहुंच बढ़ाने के लिए तेजी से नए आउटलेट्स खोले हैं, जिसका सीधा संबंध वाहनों की बढ़ती संख्या से जोड़ा जा रहा है।
अब सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं
देश के पेट्रोल पंपों का स्वरूप भी बदल रहा है। अब ये केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रह गए हैं।
कई पंपों पर CNG की सुविधा
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए चार्जिंग स्टेशन
और वैकल्पिक ईंधन सेवाएं भी शुरू की जा चुकी हैं
निजी निवेश क्यों रहा सीमित
उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार भारत में ईंधन रिटेलिंग में निजी कंपनियों की भागीदारी सीमित रहने का एक बड़ा कारण ईंधन कीमतों पर सरकारी नियंत्रण रहा है।
हालांकि पेट्रोल-डीजल को बाजार आधारित प्रणाली में लाया गया था, लेकिन सरकारी कंपनियों में बहुमत हिस्सेदारी के चलते कीमतों पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण बना रहा। नवंबर 2021 के बाद सरकारी कंपनियों ने दैनिक मूल्य संशोधन भी बंद कर दिया था, जिससे निजी रिटेलर्स के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया।
इसके अलावा, पेट्रोल पंपों की संख्या तेजी से बढ़ने के कारण प्रति पंप बिक्री (थ्रूपुट) में गिरावट आई है, जिससे कम व्यस्त मार्गों पर कई आउटलेट्स की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित हुई है।
भारत का 1 लाख पेट्रोल पंप का आंकड़ा पार करना देश में बढ़ती ऊर्जा मांग, वाहन संख्या और ईंधन ढांचे के विस्तार की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है।






