‘हर्बल टी’ के नाम पर भ्रम नहीं चलेगा : FSSAI ने कंपनियों को चेताया, नियम तोड़े तो होगी कार्रवाई
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संवाद 24 नई दिल्ली। हर्बल और फ्लावर ड्रिंक्स को ‘चाय’ बताकर बेचने वाली कंपनियों पर अब शिकंजा कसने की तैयारी है। Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने साफ शब्दों में कहा है कि जो उत्पाद असली चाय के पौधे कैमेलिया सिनेंसिस (Camellia sinensis) से तैयार नहीं किए गए हैं, उन्हें किसी भी रूप में ‘टी’ कहना नियमों का उल्लंघन है।
क्यों जारी की गई सख्त चेतावनी
FSSAI के अनुसार, बाजार में कई कंपनियां अपने उत्पादों को ‘रुइबोस टी’, ‘हर्बल टी’ और ‘फ्लावर टी’ जैसे नामों से बेच रही हैं, जबकि ये वास्तव में जड़ी-बूटियों, फूलों या अन्य पौधों से बने घोल (हर्बल इन्फ्यूजन) हैं। नियामक का कहना है कि इस तरह की लेबलिंग और मार्केटिंग उपभोक्ताओं को गुमराह करती है और खाद्य सुरक्षा कानूनों के खिलाफ है।
‘चाय’ शब्द के इस्तेमाल पर रोक
रेगुलेटर ने निर्देश दिया है कि जो उत्पाद असली चाय के पौधे से तैयार नहीं होते, उनके लिए सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से ‘चाय’ शब्द का इस्तेमाल न किया जाए। इसमें पैकेजिंग, विज्ञापन, ऑनलाइन लिस्टिंग और प्रमोशनल कंटेंट—सब शामिल हैं।
किस-किस पर लागू होंगे नियम
FSSAI ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश केवल निर्माताओं तक सीमित नहीं है।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म
पैकिंग और लेबलिंग करने वाली कंपनियां
मार्केटिंग एजेंसियां
आयातक और विक्रेता
सभी को इन नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
राज्यों को भी दिए गए निर्देश
नियामक ने राज्य खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों बाजारों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। गलत नाम या भ्रामक लेबलिंग पाए जाने पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने
FSSAI का कहना है कि उपभोक्ताओं को यह साफ जानकारी मिलनी चाहिए कि वे जो पी रहे हैं, वह असली चाय है या केवल हर्बल ड्रिंक। इससे खरीदारी के दौरान भ्रम की स्थिति खत्म होगी और पारदर्शिता बनी रहेगी।
यह निर्देश ऐसे समय आया है, जब देश में हर्बल और हेल्थ ड्रिंक्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और ‘टी’ शब्द का इस्तेमाल बिक्री बढ़ाने का आसान जरिया बनता जा रहा है।






