UPI ऑटो-पे पर नकेल : अब सब्सक्रिप्शन छुपकर नहीं काट पाएंगे पैसे, नए साल से लागू होंगे सख्त नियम

Share your love

संवाद 24 नई दिल्ली। डिजिटल भुगतान के दौर में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी Unified Payments Interface देश की सबसे लोकप्रिय भुगतान प्रणाली बन चुका है। लेकिन बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही ऑटो-पे और सब्सक्रिप्शन से जुड़े ‘डार्क पैटर्न्स’ की शिकायतें भी तेजी से बढ़ीं। इन्हीं पर लगाम लगाने के लिए National Payments Corporation of India (NPCI) ने बड़ा कदम उठाया है, जो नए साल से लागू होगा।
ऑटो-पे पर बढ़ी सख्ती
NPCI ने UPI ऑटो-पे से जुड़े लगातार कटने वाले चार्जेज को पारदर्शी बनाने के लिए नए नियम तय किए हैं। इसका उद्देश्य उन बिलिंग तरीकों को रोकना है, जिनमें यूजर्स को बिना पूरी जानकारी के ऑटो-डेबिट में फंसा दिया जाता है। NPCI का कहना है कि इससे ग्राहकों को अपने सब्सक्रिप्शन और ऑटो-पेमेंट्स पर साफ और सीधा कंट्रोल मिलेगा।
सेंट्रल पोर्टल से मिलेगी पूरी जानकारी
NPCI ने upihelp.npci.org.in नाम से एक नया सेंट्रल पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के जरिए यूजर्स अपनी सभी UPI ऑटो-पे सेटिंग्स को एक ही जगह देख और मैनेज कर सकेंगे।
यह सुविधा खास तौर पर उन ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लगाम लगाने के लिए है, जो यूजर्स को ऐसे सब्सक्रिप्शन में डाल देते हैं, जिन्हें बंद करना या ट्रैक करना आसान नहीं होता।
31 दिसंबर तक लागू करने होंगे बदलाव
यह पहल NPCI द्वारा 7 अक्टूबर 2025 को जारी सर्कुलर के तहत की गई है। UPI नेटवर्क से जुड़ी सभी बैंकों और पेमेंट ऐप कंपनियों को 31 दिसंबर 2025 तक इन नियमों को लागू करना अनिवार्य होगा। तब तक मौजूदा नियमों के अनुसार ही ऑटो-पे काम करता रहेगा।
यूजर्स को क्या नई सुविधाएं मिलेंगी
नए नियमों के तहत ग्राहक किसी भी UPI ऐप के ‘मैनेज बैंक अकाउंट’ या ‘ऑटो-पे’ सेक्शन में जाकर अपने सभी एक्टिव ऑटो-पेमेंट देख सकेंगे।
सबसे अहम बदलाव यह है कि अब ऑटो-पे को एक UPI ऐप से दूसरे ऐप में पोर्ट किया जा सकेगा। यानी अगर कोई यूजर ऐप बदलता है, तो उसे सब्सक्रिप्शन दोबारा सेट करने की जरूरत नहीं होगी।
कारोबारियों के लिए भी बदलाव
नई व्यवस्था में कारोबारी भी अपने पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को बदल सकेंगे या अपनी UPI ID अपडेट कर पाएंगे। इससे व्यापारिक लेनदेन में लचीलापन बढ़ेगा, जबकि ग्राहकों को बिना जानकारी के चार्ज किए जाने की गुंजाइश कम होगी।
सुरक्षा और प्राइवेसी पर जोर
NPCI ने स्पष्ट किया है कि ऑटो-पे से जुड़े किसी भी बदलाव के लिए UPI पिन डालना अनिवार्य होगा।
एक ऑटो-पे को 90 दिनों में सिर्फ एक बार ही पोर्ट किया जा सकेगा।
ऐप्स कैशबैक या लालच देकर बार-बार ऐप बदलने का दबाव नहीं बना सकेंगे।
ऑटो-पे से जुड़ा डेटा सिर्फ यूजर को दिखाने के लिए इस्तेमाल होगा, किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं।
इसके साथ ही NPCI ने ‘UPI Help’ नाम से एक नया इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म भी शुरू किया है, जहां बातचीत के जरिए ग्राहकों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा।

Samvad 24 Office
Samvad 24 Office

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News