विधवा पेंशन योजना में बड़ा खुलासा: आयकर दाता महिलाएं उठा रही थीं सरकारी लाभ
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संवाद 24 संवाददाता। उत्तर प्रदेश की विधवा पेंशन योजना गरीब और निराश्रित विधवा महिलाओं को आर्थिक सहारा देने के लिए शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये (हर तिमाही 3000 रुपये) की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। कानपुर जिले में ही 68 हजार से अधिक महिलाएं इस योजना का लाभ ले रही हैं। लेकिन हाल ही में फैमिली आईडी और केवाईसी सत्यापन प्रक्रिया के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जो सरकारी योजनाओं में अनियमितताओं की गहराई को उजागर करता है।
कानपुर मंडल में सत्यापन के दौरान पता चला कि 3,392 विधवा महिलाएं आयकर (इनकम टैक्स) भरने के बावजूद सरकारी पेंशन का लाभ उठा रही हैं। इनमें सबसे अधिक कानपुर नगर की 1,881 महिलाएं शामिल हैं। अन्य जिलों में कानपुर देहात में 333, इटावा में 337, फर्रुखाबाद में 307, कन्नौज में 276 और औरैया में 258 महिलाएं ऐसी पाई गईं। पूरे प्रदेश की बात करें तो ऐसी अपात्र महिलाओं की संख्या 44,227 तक पहुंच गई है।
उदाहरण
केस 1: कृष्णा बिहार निवासी सुमन देवी आयकर दाता होने के बावजूद विधवा पेंशन ले रही थीं।
केस 2: केशवपुरम, रावतपुर की नीलम दीक्षित भी इनकम टैक्स भरते हुए पेंशन का लाभ उठा रही थीं।
ये मामले सिर्फ उदाहरण हैं, जो दिखाते हैं कि कैसे आर्थिक रूप से सक्षम महिलाएं गरीबों के लिए बनी योजना का दुरुपयोग कर रही थीं।
निदेशालय की सख्ती
मामला सामने आने के बाद महिला कल्याण निदेशालय ने तुरंत कार्रवाई की। सभी जिलों के जिला प्रोबेशन अधिकारियों (डीपीओ) को अपात्र लाभार्थियों की सूची भेजकर गहन सत्यापन के निर्देश दिए गए। सत्यापन में अपात्र पाई जाने वाली महिलाओं के नाम पेंशन सूची से हटा दिए जाएंगे। कानपुर के जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास सिंह ने बताया कि सूची तहसील और ब्लॉक स्तर पर भेज दी गई है, और कर्मचारियों से भी सत्यापन कराया जा रहा है।
क्यों जरूरी है सत्यापन?
पिछले डेढ़ साल से योजना के लाभार्थियों का केवाईसी अपडेट और फैमिली आईडी जनरेशन का काम चल रहा है। इसी प्रक्रिया में यह गड़बड़ी पकड़ी गई। आयकर दाता होना स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि ये महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर नहीं हैं, इसलिए वे योजना की पात्रता मानदंडों पर खरी नहीं उतरतीं। ऐसे दुरुपयोग से वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं का हक छिनता है।
यह घटना उत्तर प्रदेश ही नहीं, पूरे देश में चल रही सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए एक सबक है। अन्य राज्यों में भी इसी तरह की अनियमितताएं सामने आ रही हैं, जैसे दिल्ली में महिलाओं की पेंशन योजना में हजारों अपात्र पाए जाना या बरेली में सुहागिन महिलाओं का विधवा पेंशन लेना। डिजिटल सत्यापन, आधार लिंकिंग और नियमित ऑडिट जैसी प्रक्रियाओं को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग हो और वाकई जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचे।
यह कार्रवाई सराहनीय है। उम्मीद है कि इससे योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और गरीब विधवाओं को उनका वास्तविक हक मिलेगा।






