यमुना एक्सप्रेसवे हादसा: DNA से मिली अनुज की पहचान, मां का इनकार और एक परिवार का अथाह दर्द
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संवाद 24 संवाददाता। 16 दिसंबर 2025 की उस भयावह सुबह ने उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। मथुरा के यमुना एक्सप्रेसवे पर घने कोहरे की चादर में छिपी मौत ने एक के बाद एक कई वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। आठ बसें और तीन कारें आपस में टकराईं, और देखते-देखते आग की लपटें आसमान छूने लगीं। इस त्रासदी में 19 लोगों की जान चली गई, जबकि सौ से अधिक घायल हुए। जले हुए शव इतने विकृत हो चुके थे कि पहचानना असंभव था। प्रशासन ने DNA टेस्ट का सहारा लिया, और अब धीरे-धीरे अपनों के चेहरे उजागर हो रहे हैं लेकिन हर पहचान के साथ एक परिवार का आंसू बह रहा है।
इनमें एक नाम है कानपुर के दादानगर सेवाग्राम कॉलोनी निवासी अनुज श्रीवास्तव का। इवेंट और डेकोरेशन का कारोबार चलाने वाले 32 वर्षीय अनुज 15 दिसंबर की रात करीब साढ़े नौ बजे पड़ोसी सोनू वर्मा के साथ दिल्ली के लिए शताब्दी ट्रैवल्स की स्लीपर बस में सवार हुए थे। विजय नगर चौराहे से चढ़ी बस मथुरा के पास उस मौत की चपेट में आ गई। हादसे के बाद अनुज लापता हो गए। परिवार दिन-रात अस्पतालों और पोस्टमार्टम हाउस के चक्कर काटता रहा।
आखिरकार, सोमवार को DNA रिपोर्ट आई। एक जले हुए शव का मिलान अनुज से हो गया। खबर जैसे ही घर पहुंची, कोहराम मच गया। पत्नी ज्योति, छोटा भाई शुभम, पोती आराध्या और पोता रुद्र – सब बिलख पड़े। लेकिन सबसे दिल दहला देने वाली थी मां लक्ष्मी श्रीवास्तव की प्रतिक्रिया। दो बेटों – बड़े अनुज और छोटे शुभम – के साथ रहने वाली लक्ष्मी ने रिपोर्ट को मानने से इनकार कर दिया। आंसुओं के बीच उन्होंने कहा, “मेरा बेटा जिंदा है। मथुरा-वृंदावन के प्रशासन पर विश्वास नहीं है। कानपुर लाकर दोबारा DNA टेस्ट कराओ, तभी यकीन होगा।”
यह इनकार सिर्फ एक मां का दर्द नहीं, बल्कि उस अविश्वास की अभिव्यक्ति है जो ऐसे हादसों के बाद परिवारों में घर कर जाता है। शव इतने जल चुके हैं कि देखकर भी यकीन नहीं होता। कई परिजन आज भी इंतजार कर रहे हैं – कुछ को उम्मीद है कि उनका अपना कहीं घायल पड़ा है, कुछ को डर कि DNA की रिपोर्ट सच न निकले।
यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। घने कोहरे में कम विजिबिलिटी, तेज रफ्तार और ब्लैक स्पॉट जांच रिपोर्ट में ये कारण सामने आए हैं। प्रशासन ने अब एक्सप्रेसवे पर सीसीटीवी और बेहतर साइनेज के आदेश दिए हैं, लेकिन क्या ये देर से आए कदम उन 19 जानों को वापस ला पाएंगे?






