यूपी का नया ‘जामताड़ा’: चंबल के बीहड़ों से चल रहा साइबर ठगों का खतरनाक नेटवर्क
Share your love

संवाद 24 संवाददाता। एक समय चंबल का नाम सुनते ही डाकुओं की याद आती थी, लेकिन अब यह क्षेत्र साइबर ठगी का नया गढ़ बन चुका है। झारखंड के जामताड़ा की तरह उत्तर प्रदेश के मथुरा और आगरा के गांवों में साइबर अपराधियों का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। “हेलो… बैंक से बोल रहा हूं” या “नौकरी/निवेश का शानदार मौका” जैसे बहाने से ये ठग लोगों के बैंक खाते खाली कर रहे हैं। हाल के दिनों में पुलिस की बड़ी कार्रवाइयों ने इस नेटवर्क की हकीकत उजागर की है।
मथुरा: ‘मिनी जामताड़ा’ में पुलिस का मेगा ऑपरेशन
दिसंबर 2025 में मथुरा पुलिस ने गोवर्धन थाना क्षेत्र के चार गांवों—देवसेरस, मुड़सेरस (या मडोरा), नगला अकातिया (या नगला कातिया) और दौलतपुर—में बड़े पैमाने पर छापेमारी की। 4 IPS अधिकारियों सहित 400 पुलिसकर्मियों की टीम ने सुबह-सुबह गांवों को घेर लिया और पगडंडियों से अंदर घुसकर 37 से 42 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया। इन गांवों को ‘मिनी जामताड़ा’ कहा जा रहा है, जहां कम पढ़े-लिखे युवा भी साइबर जालसाजी में माहिर हो गए हैं। घरों और खेतों में छिपे ठिकानों से दर्जनों मोबाइल, सिम कार्ड और अन्य उपकरण बरामद हुए।
ये ठग फर्जी ऐप्स, वेबसाइट्स और फोन कॉल्स के जरिए निवेश, लोन या पुरस्कार का लालच देकर ठगी करते थे। गांवों में आलीशान घर, महंगी गाड़ियां और ऐशोआराम की जिंदगी जी रहे ये युवा आसानी से अमीर बन रहे थे, लेकिन अब पुलिस की सख्ती से उनका नेटवर्क ध्वस्त हो रहा है।
आगरा: अंतरराष्ट्रीय गिरोह तक कार्रवाई
मथुरा के बाद आगरा पुलिस ने भी कमर कसी। दिसंबर 2025 में ही 32 साइबर अपराधियों को पकड़ा गया, जिनमें दुबई से गिरोह चलाने वाले सरगना के साथी शामिल थे। ये गिरोह 300 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुके थे। बसई अरेला और अन्य क्षेत्रों में नौकरी या निवेश के झांसे में लोगों को फंसाया जाता था। फर्जी सिम, बैंक खाते और वाई-फाई से ये ठग अपना काम चलाते थे। पुलिस ने कई फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी है।
पहले 2020 में आगरा के बाह, पिनाहट और आसपास के गांवों (जैसे पिढ़ौरा, जैतपुर, खेड़ा राठौर) में ‘हेलो गैंग’ सक्रिय था, जहां से 50 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं थीं। तत्कालीन IG ने जागरुकता अभियान भी चलाया था। अब फिर से ऐसे नेटवर्क उभर रहे हैं, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी से इन्हें कुचला जा रहा है।
ठगी के तरीके और पुलिस की रणनीति
ये साइबर ठग फर्जी ID से सिम और खाते खुलवाते हैं, सोशल मीडिया पर प्रचार करते हैं और लोगों को लालच या डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। डीसीपी पूर्वी जोन अभिषेक अग्रवाल के अनुसार, पुलिस अब गांव-गांव जाकर युवाओं को जागरुक करेगी। जो गिरोह में फंसे हैं, उन्हें चिह्नित कर परिजनों को चेतावनी दी जाएगी—एक बार पकड़े गए तो जेल के साथ संपत्ति जब्त हो जाएगी।
साइबर ठगी से बचाव के टिप्स
अंजान नंबर से फोन आए तो सावधान रहें, खासकर अगर रकम या OTP मांगा जाए।
सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से निजी जानकारी शेयर न करें।
पुलिस या बैंक कभी फोन पर OTP या डिजिटल अरेस्ट की बात नहीं करते।
कोई लिंक या ऐप डाउनलोड करने को कहे तो न करें।
ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन 1930 डायल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
चंबल के बीहड़ अब डाकुओं से नहीं, साइबर ठगों से खतरा पैदा कर रहे हैं। पुलिस की सतत कार्रवाइयां और जन जागरुकता ही इस समस्या का स्थायी समाधान है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें!






