न दुकान न गोदाम, फिर भी करोड़ों का टर्नओवर: कानपुर में फर्जी फर्मों का बड़ा खुलासा
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संवाद 24 संवाददाता। उत्तर प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी कानपुर में एक बार फिर जीएसटी चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। दो फर्मों ने बिना किसी दुकान, गोदाम या व्यापारिक गतिविधि के कागजों पर करोड़ों रुपये का टर्नओवर दिखाकर करीब 6.46 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की। ये फर्में आवासीय पते पर रजिस्टर्ड थीं और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का गलत लाभ उठाया गया। राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) विभाग के उपायुक्त धीरेंद्र कुमार ने तीन महिलाओं सहित पांच लोगों के खिलाफ बेकनगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। जांच में संगठित गैंग की संलिप्तता की आशंका गहरा गई है।
फर्जी फर्मों की करतूत
जांच के अनुसार, हीरामनपुरवा इलाके में एक आवासीय पते पर 2018 से संचालित दिखाई गई ‘कोमल ट्रेडर्स’ फर्म शबाना नाम की महिला के नाम पर रजिस्टर्ड थी। यह फर्म फुटवियर और प्लास्टिक आइटम्स का कारोबार करने का दावा करती थी।
2018-19 में इसने 9 करोड़ 71 लाख रुपये का टर्नओवर दिखाया। 2019-20 में टर्नओवर 19 करोड़ 9 लाख रुपये बताया गया।
इस हिसाब से दो सालों में करीब 5 करोड़ 14 लाख रुपये का जीएसटी देय था, लेकिन फर्म ने बोगस दस्तावेजों के जरिए इतनी ही रकम का फर्जी आईटीसी क्लेम कर टैक्स में समायोजित कर लिया।
इसी इलाके में दूसरी फर्म ‘स्टार इंटरप्राइजेज’ तब्बुसम फातिमा के नाम पर चल रही थी। इसने 2019-20 में 7 करोड़ 35 लाख रुपये का कारोबार दिखाया और 1 करोड़ 32 लाख रुपये का फर्जी आईटीसी हासिल किया। दोनों फर्मों की कुल चोरी 6.46 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
छापे में नहीं मिला कोई साक्ष्य
एसजीएसटी की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन ब्रांच (एसआईबी) ने कई साल पहले इन फर्मों के रजिस्टर्ड पते पर छापा मारा था। वहां कोई व्यापारिक गतिविधि नहीं मिली। पता पूरी तरह आवासीय था और आसपास के लोगों ने भी इन फर्मों के संचालन की कोई जानकारी नहीं दी। फिर भी कागजों पर ये फर्में वर्षों से सक्रिय दिखाई जा रही थीं।
पति-पत्नी सहित गैंग का शक
उपायुक्त धीरेंद्र कुमार के अनुसार, जांच में संगठित गिरोह की संलिप्तता के मजबूत संकेत मिले हैं। नामजद आरोपियों में गदरिया मोहाल निवासी शबाना, काकादेव की तब्बुसम फातिमा, दिलशाद आलम, नौशाद, अनवरगंज के महफूज और मर्सरत शामिल हैं। दिलशाद और मर्सरत पति-पत्नी हैं। आशंका है कि महिलाओं के नाम पर फर्में रजिस्टर्ड कराकर उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया। आगे की जांच में यह साफ होगा कि ये महिलाएं जानबूझकर शामिल थीं या उनके कागजात धोखे से इस्तेमाल किए गए।
बढ़ते फर्जीवाड़े पर सख्ती जरूरी
यह मामला कानपुर में जीएसटी फर्जीवाड़े की बढ़ती घटनाओं को उजागर करता है। पिछले कुछ महीनों में ही शहर में कई फर्जी फर्मों का भंडाफोड़ हुआ है, जिनमें करोड़ों की आईटीसी चोरी सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में सख्त सत्यापन, नियमित ऑडिट और डेटा एनालिसिस से ऐसे गिरोहों पर लगाम लगाई जा सकती है। विभाग की यह कार्रवाई अन्य फर्जी कारोबारियों के लिए चेतावनी है कि अब कागजी खेल ज्यादा दिन नहीं चल सकेगा।
पुलिस और एसजीएसटी विभाग की संयुक्त जांच जारी है। जल्द ही गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की उम्मीद है।






