WTO में भारत–चीन टकराव तेज, ड्रैगन ने उठाया टैरिफ और सब्सिडी का मुद्दा
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच व्यापारिक मोर्चे पर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। चीन ने भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन में नई याचिका दायर करते हुए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ और सौर ऊर्जा क्षेत्र में दी जा रही सब्सिडी पर आपत्ति जताई है।
चीन का आरोप है कि भारत की ये नीतियां डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुरूप नहीं हैं और इससे भारतीय घरेलू उद्योगों को अनुचित लाभ मिल रहा है। बीजिंग का कहना है कि इन कदमों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में समानता के सिद्धांत, विशेषकर नेशनल ट्रीटमेंट नियम का उल्लंघन होता है, जिसके तहत सभी सदस्य देशों के साथ समान व्यवहार अनिवार्य है।
चीन की आपत्ति क्या है?
चीनी वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारत द्वारा आईसीटी उत्पादों पर लगाए गए शुल्क और सौर क्षेत्र को दी जा रही सहायता ऐसी सब्सिडी की श्रेणी में आती है, जिन्हें डब्ल्यूटीओ नियमों के तहत प्रतिबंधित माना जाता है। चीन का दावा है कि इन उपायों से उसके उद्योगों को नुकसान पहुंच रहा है और भारत को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल रही है।
मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान में कहा कि भारत के ये कदम उसकी डब्ल्यूटीओ प्रतिबद्धताओं के विपरीत हैं और इन्हें तत्काल संशोधित किए जाने की आवश्यकता है। इसी के तहत चीन ने औपचारिक परामर्श (कंसल्टेशन) की मांग की है।
2025 में दूसरी बार WTO का दरवाजा
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में यह भारत के खिलाफ चीन की दूसरी शिकायत है। इससे पहले चीन ने इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और बैटरी सेक्टर में भारत द्वारा दी जा रही सब्सिडी को लेकर भी डब्ल्यूटीओ में मामला उठाया था। उस समय भी चीन ने भारतीय नीतियों को अपने आर्थिक हितों के लिए नुकसानदेह बताया था।
चीन की वैश्विक रणनीति
चीन लगातार डब्ल्यूटीओ मंच के जरिए विभिन्न देशों की व्यापार नीतियों को चुनौती देता रहा है। इससे पहले उसने संयुक्त राज्य अमेरिका के स्टील और एल्यूमीनियम टैरिफ तथा यूरोपीय संघ द्वारा चीनी उत्पादों पर लगाए गए एंटी-डंपिंग शुल्क के खिलाफ भी शिकायतें दर्ज कराई हैं।
आगे क्या?
अब इस विवाद में अगला कदम दोनों देशों के बीच परामर्श का होगा। यदि बातचीत से समाधान नहीं निकलता, तो मामला डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान पैनल तक जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह विवाद भारत–चीन व्यापार संबंधों पर असर डाल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं पहले से ही दबाव में हैं।
संवाद24 इस मामले पर आगे के घटनाक्रम पर नजर बनाए रखेगा।






