असम की राजनीति में नया समीकरण : ओवैसी – अजमल की नजदीकी से कांग्रेस की बढ़ी बेचैनी
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संवाद 24 गुवाहाटी। असम की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में प्रभाव रखने वाली ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के बीच संभावित गठबंधन के संकेत सामने आए हैं। AIUDF प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने स्पष्ट किया है कि आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से उनकी बातचीत हुई है और गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बदरुद्दीन अजमल के अनुसार, ओवैसी ने जनवरी के बाद असम में स्थिति का आकलन करने के लिए अपनी टीम भेजने की बात कही है। साथ ही यह भी संकेत दिए गए हैं कि यदि गठबंधन तय होता है तो ओवैसी स्वयं असम में AIUDF के पक्ष में प्रचार कर सकते हैं। इस संभावित नजदीकी ने राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है।
कांग्रेस में क्यों बढ़ी चिंता?
अजमल ने दावा किया कि ओवैसी को कई ई-मेल भेजे गए हैं, जिनमें उनसे AIUDF के लिए प्रचार न करने का आग्रह किया गया है। इन संदेशों में AIUDF को भाजपा की “बी-टीम” बताया गया है। माना जा रहा है कि यदि AIMIM और AIUDF साथ आते हैं तो इसका सीधा असर कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक पर पड़ सकता है, खासकर निचले असम और सीमावर्ती क्षेत्रों में।
2021 के विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस ने AIUDF से औपचारिक दूरी बना ली थी और उसे महागठबंधन से बाहर कर दिया गया था। हाल के महीनों में भी कांग्रेस नेतृत्व ने AIUDF के साथ किसी भी तरह के गठबंधन से साफ इनकार किया है।
विपक्षी एकता पर सवाल
हाल ही में 2026 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए कुछ विपक्षी दलों ने भाजपा के खिलाफ एकजुट मंच बनाने की बात कही थी। हालांकि, AIUDF का रुख अब भी यही है कि पार्टी अपने राजनीतिक फैसले स्वतंत्र रूप से लेगी। दूसरी ओर, असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई AIUDF को सांप्रदायिक बताते हुए उसके साथ किसी भी तालमेल को खारिज कर चुके हैं।
विधानसभा में मौजूदा स्थिति
126 सदस्यीय असम विधानसभा में सत्तारूढ़ भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है। उसके सहयोगी दल भी सरकार को मजबूती दे रहे हैं। विपक्ष में कांग्रेस और AIUDF प्रमुख ताकतें हैं, लेकिन आपसी मतभेदों के चलते संयुक्त रणनीति बनती नहीं दिख रही।
आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि AIMIM और AIUDF के बीच गठबंधन होता है तो असम की चुनावी राजनीति में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन सकती है। इससे न सिर्फ कांग्रेस बल्कि भाजपा की रणनीतियों पर भी असर पड़ेगा। आने वाले हफ्तों में ओवैसी की टीम की रिपोर्ट और औपचारिक ऐलान असम की सियासत की दिशा तय कर सकते हैं।






