747 हेक्टेयर का गांव, 2880 हेक्टेयर की फसल! बुंदेलखंड में बीमा लूट का ‘हरा घोटाला’ उजागर
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संवाद 24 विशेष रिपोर्ट। बुंदेलखंड में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर एक ऐसा खेल सामने आया है, जिसने सरकारी तंत्र, बीमा कंपनियों और स्थानीय अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई गांवों में जमीन के वास्तविक रकबे से तीन से चार गुना अधिक क्षेत्रफल का फसल बीमा कराकर करोड़ों रुपये का क्लेम उठाया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि यह फर्जीवाड़ा एक-दो नहीं, बल्कि कई जिलों में सुनियोजित तरीके से वर्षों से चल रहा है।
संवाद24 की पड़ताल में सामने आया कि कहीं ग्राम सभा के कुल क्षेत्रफल से कई गुना अधिक खेतों का बीमा कराया गया, तो कहीं औद्योगिक क्षेत्र की जमीन पर भी फसल बीमा क्लेम पास हो गया। किसानों का आरोप है कि इस पूरे खेल में बीमा कंपनियों से लेकर राजस्व विभाग तक की मिलीभगत है।
लुहारी ग्राम सभा: कागजों में खेत, हकीकत में घोटाला
महोबा जिले की लुहारी ग्राम सभा इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार गांव का कुल क्षेत्रफल 747.364 हेक्टेयर है, लेकिन खरीफ 2024 में 396 किसानों के नाम 1138 हेक्टेयर का बीमा करा दिया गया। इसके एवज में व्यक्तिगत दावों से करीब 1.35 करोड़ रुपये और फसल कटाई प्रयोग के आधार पर लगभग 47 लाख रुपये का क्लेम लिया गया।
यहीं नहीं, खरीफ 2025 में तो हद ही पार हो गई। 686 किसानों के नाम 2880.06 हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा दर्ज हो गया, जो वास्तविक रकबे से लगभग चार गुना है। हालांकि, इस बार मामला उजागर होने पर क्लेम पर रोक लगा दी गई है।
किसानों का आरोप: बिना मिलीभगत यह संभव नहीं
ग्रामीण किसानों का कहना है कि यह सब बिना अधिकारियों की शह के संभव ही नहीं है। लुहारी के किसान राम सामुझ ने आरटीआई के जरिए ग्राम सभा का पूरा ब्योरा निकलवाया है। दस्तावेज दिखाते हुए वह सवाल उठाते हैं कि जब जमीन ही मौजूद नहीं है, तो उसका बीमा कैसे हो गया?
महुआ क्षेत्र के किसान अरविंद राजपूत बताते हैं कि पहले दोगुने क्षेत्रफल का बीमा हुआ, किसी ने कुछ नहीं पूछा। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो अगली बार चार गुना रकबे का बीमा करा दिया गया। झांसी के किसान अजित का आरोप है कि औद्योगिक क्षेत्र में गई जमीन पर भी किसी न किसी के नाम से फसल बीमा क्लेम पास करा लिया गया।
महोबा के अन्य गांवों में भी वही कहानी
चरखारी तहसील के भटेवराकला गांव में गांव का वास्तविक क्षेत्रफल 1129.377 हेक्टेयर है। खरीफ 2024 में यहां 499 किसानों ने 1534.770 हेक्टेयर का बीमा कराकर करीब 78 लाख रुपये का क्लेम लिया। खरीफ 2025 में यह आंकड़ा और चौंकाने वाला है—673 किसानों के नाम 3171.68 हेक्टेयर का बीमा दर्ज किया गया, जो वास्तविक क्षेत्रफल से 2042 हेक्टेयर अधिक है।
इसी तरह पनवाड़ी के लोदीपुरा स्थित ग्राम समिरिया में कुल रकबा मात्र 345.64 हेक्टेयर है। खरीफ 2024 में यहां 147 किसानों ने 383.53 हेक्टेयर का बीमा कराकर 1.19 करोड़ रुपये का क्लेम ले लिया। खरीफ 2025 में तो पांच गुना रकबे—1524.74 हेक्टेयर—का बीमा दर्ज हो गया।
बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
यह मामला अब सिर्फ फर्जीवाड़े का नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर सीधा हमला बन गया है। सवाल यह है कि जब गांव का रकबा सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, तो उससे कई गुना अधिक क्षेत्र का बीमा कैसे पास हो गया? क्या यह लापरवाही है या सुनियोजित घोटाला?
किसानों की मांग है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो, दोषी अधिकारियों, बीमा कंपनियों और दलालों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में सरकारी योजनाएं लूट का जरिया न बनें।






