मनरेगा हटाने के खिलाफ संसद परिसर में विपक्ष का 12 घंटे का धरना, मोदी सरकार पर गरीबों की रोज़ी छीनने का आरोप
Share your love

संवाद 24 डेस्क। संसद परिसर में गुरुवार रात उस समय सियासी माहौल गरमा गया, जब विपक्षी दलों के सांसदों ने वीबी–जी रामजी विधेयक 2025 के खिलाफ 12 घंटे का धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। यह विधेयक मौजूदा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को समाप्त कर उसके स्थान पर नया ढांचा लागू करने का प्रस्ताव करता है।
धरने पर बैठे विपक्षी सांसदों का कहना है कि यह कानून ग्रामीण गरीबों के लिए बनाए गए सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा कवच को खत्म करने की कोशिश है। विपक्ष ने इसे “जनविरोधी फैसला” करार देते हुए संकेत दिया कि संसद के बाहर भी इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों गरीब परिवारों के लिए जीवनरेखा थी। उनके अनुसार, सरकार ने इसे खत्म कर न केवल ग्रामीण भारत की रोज़ी-रोटी पर चोट की है, बल्कि महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर की विरासत का भी अपमान किया है।
धरने में शामिल नेताओं ने आरोप लगाया कि नए विधेयक से रोजगार की कानूनी गारंटी कमजोर होगी और राज्यों की भूमिका सीमित हो जाएगी। उनका कहना है कि सरकार ने बिना व्यापक चर्चा और सहमति के यह फैसला थोपने की कोशिश की है।
विपक्ष ने स्पष्ट किया कि यदि विधेयक वापस नहीं लिया गया तो संसद से लेकर सड़कों तक आंदोलन तेज किया जाएगा। इस बीच सरकार की ओर से अभी तक विपक्ष के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।






