मुनाफे के लालच में फंसकर खोए 2.50 करोड़: कानपुर में साइबर ठगों की बड़ी वारदात
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संवाद 24 संवाददाता। साइबर ठगों की शातिराना करतूत एक बार फिर सामने आई है। मुनाफे का लालच देकर ठगों ने चकेरी थाना क्षेत्र के एक निवासी को करीब 2.50 करोड़ रुपये की चपत लगा दी। पीड़ित राहुल केसरवानी ने पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के आदेश पर चकेरी थाने में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर साइबर सेल की मदद से जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित राहुल केसरवानी, जो सफीपुर फर्स्ट के रहने वाले हैं, ने बताया कि मई 2025 में उनके फेसबुक अकाउंट पर एक महिला की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करने के बाद ठगों ने उन्हें व्हाट्सएप पर संपर्क किया और ट्रेडिंग इन्वेस्टमेंट के नाम पर एक फर्जी वेबसाइट में जोड़ा। वहां भारी मुनाफे का लालच देकर यूपीआई, नेफ्ट, आरटीजीएस जैसे विभिन्न तरीकों से 14 जून 2025 से 9 दिसंबर 2025 तक कुल 2.50 करोड़ रुपये जमा करवाए गए।
जब राहुल ने अपना निवेश वापस मांगा और मुनाफे की बात की, तो ठगों ने धमकी देना शुरू कर दिया। उन्होंने पीड़ित और उनके परिवार की तस्वीरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से एडिट करके बदनाम करने की धमकी दी। डर के मारे पीड़ित चुप रहा, लेकिन जब हद हो गई तो थाने का रुख किया। चकेरी थाने में पहले सुनवाई नहीं होने पर राहुल ने पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से गुहार लगाई। कमिश्नर के निर्देश पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज की गई।
थाना प्रभारी अजय प्रकाश मिश्र ने बताया कि मामला गंभीर है और साइबर सेल की टीम ठगों की तलाश में जुटी हुई है। ऐसे फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म अक्सर विदेशी सर्वर पर चलते हैं, इसलिए जांच में समय लग सकता है।
साइबर ठगी के बढ़ते मामले: एक चेतावनी
यह मामला कानपुर में साइबर ठगी के बढ़ते खतरे को उजागर करता है। हाल के महीनों में शहर में निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी के कई मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर अजनबी फ्रेंड रिक्वेस्ट, व्हाट्सएप ग्रुप में निवेश के लिंक और भारी रिटर्न का वादा
ये ठगों के आम हथियार हैं। एआई का इस्तेमाल करके ब्लैकमेल करना नया ट्रेंड बन रहा है, जो पीड़ितों को चुप रहने पर मजबूर करता है।
पुलिस बार-बार अपील कर रही है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी या बैंक डिटेल्स शेयर न करें और निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की वैधता जांचें। साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत करें।






