‘जी राम जी’ RSS का एजेंडा; कांग्रेस का BJP पर सीधा हमला, पप्पू यादव भी भड़के
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संवाद 24 नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में ग्रामीण रोजगार को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा 16 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किए गए VB-G RAM G विधेयक, 2025 को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। यह विधेयक वर्ष 2005 के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लाने का प्रस्ताव करता है। इसे लेकर सदन से लेकर सड़क तक विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं।
विपक्षी दलों का आरोप है कि मोदी सरकार ने पहले मनरेगा को कमजोर किया और अब उसे पूरी तरह खत्म करने की तैयारी कर ली है। उनका कहना है कि ग्रामीण गरीबों और किसानों को रोजगार की गारंटी देने वाली इस योजना को हटाना गरीब-विरोधी और किसान-विरोधी कदम है, जिसे देश का गरीब कभी माफ नहीं करेगा।
विपक्ष का हमला: गरीबों से रोजगार छीना जा रहा
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सेल्वाराज वी. ने कहा कि गरीबों के पास न भोजन है, न पैसे। काम नहीं मिलेगा तो वे कपड़े, दवाइयां और बच्चों के लिए दूध कैसे खरीदेंगे? उन्होंने कहा कि रोजगार की गारंटी छीनकर सरकार गरीबों को भूखा मरने के लिए मजबूर कर रही है।
कांग्रेस के बेन्नी बेहनान ने विधेयक को BJP और RSS का एजेंडा बताया। उन्होंने कहा कि गांधीजी गरीबों के बारे में सोचते थे और उनके विचारों के अनुरूप ही कांग्रेस सरकार ने मनरेगा कानून बनाया था। अब उसी गांधी के नाम और विचार दोनों को मिटाने की कोशिश हो रही है।
राज्यों पर बोझ डालने का आरोप
शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि मनरेगा खत्म कर सरकार गरीबों को चैरिटी पर लाना चाहती है। नए विधेयक में राज्यों को 40% खर्च उठाने की शर्त रखी गई है। पंजाब जैसे राज्यों के पास पहले से ही संसाधनों की कमी है, ऐसे में गरीबों को काम कैसे मिलेगा?
समाजवादी पार्टी की रुचि वीरा ने कहा कि नाम बदलने से सच्चाई नहीं बदलती। सरकार ने न केवल गांधीजी का नाम हटाया है, बल्कि उनके विचारों की भी हत्या की है। राज्यों पर 40% खर्च डालकर गरीबों का रोजगार छीना जा रहा है।
NDA और सहयोगी दलों की राय
भाजपा सांसद राजकुमार चाहर ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इससे गरीबों को अब 100 के बजाय 125 दिन का काम मिलेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
जनता दल (यूनाइटेड) की लवली आनंद ने कहा कि नीतियों का समय के साथ विकसित होना जरूरी है। यह विधेयक मनरेगा को खत्म नहीं करता, बल्कि उसे बेहतर बनाने का प्रयास है।
वाम दल और क्षेत्रीय दल भी विरोध में
CPI (ML) लिबरेशन के राजा राम सिंह ने कहा कि सरकार इस विधेयक के जरिए गरीबों के प्रति अपनी जवाबदेही से बचना चाहती है। उन्होंने मांग की कि गरीबों के लिए रोजगार के दिन 200 किए जाएं।
तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने इसे मनरेगा खत्म करने की खतरनाक साजिश बताया और कहा कि रोजगार के दिन कम से कम 150 होने चाहिए। साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल के मनरेगा बकाया भुगतान की मांग भी उठाई।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मनरेगा समाप्त होने से देश का गरीब भूखों मर जाएगा। यह सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है और बिहार जैसे राज्यों से पलायन और बढ़ेगा।
पप्पू यादव का तीखा तेवर
निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव इस मुद्दे पर सबसे ज्यादा आक्रामक नजर आए। उन्होंने कहा कि महंगाई पहले ही बढ़ चुकी है और अब गरीब-मजदूरों से काम छीना जा रहा है। देश में करोड़ों लोग गरीबी में हैं। बिहार के सीमांचल, कोसी और मिथिलांचल से हर साल करोड़ों लोग रोजी-रोटी के लिए पलायन करते हैं। अगर रोजगार नहीं मिला तो यह पलायन और बढ़ेगा। उन्होंने सरकार से गरीबों के अधिकार न छीनने की अपील की।
कुल मिलाकर, VB-G RAM G विधेयक को लेकर संसद में सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। जहां सरकार इसे सुधार और विकास की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे मनरेगा खत्म करने और गरीबों के अधिकार छीनने की साजिश करार दे रहा है। आने वाले दिनों में इस विधेयक पर सियासत और तेज होने के संकेत हैं।






