टूटे कंटीले तार, गायब फॉग लाइटें और बेपरवाह प्रबंधन यमुना एक्सप्रेस-वे पर हर सफर बना जोखिम
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संवाद 24 संवाददाता। 165 किलोमीटर लंबा यमुना एक्सप्रेस-वे—जिसे सुरक्षित और तेज रफ्तार यात्रा का प्रतीक माना जाता है—आज प्रबंधन की लापरवाही के चलते खतरे के रास्ते में बदलता जा रहा है। कोहरे के मौसम में जहां अतिरिक्त सतर्कता और मजबूत इंतजाम जरूरी होते हैं, वहीं जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट दिखाई दे रही है। टूटे कंटीले तार, गायब फॉग लाइटें और अधूरे सुरक्षा उपाय किसी बड़े हादसे को खुला न्योता दे रहे हैं।
मथुरा में हालिया घटना के बाद खंदौली टोल प्लाजा से कुबेरपुर तक एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल की गई। इस दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं। खंदौली इंटरचेंज, मुड़ी समेत कई स्थानों पर फेंसिंग पूरी तरह गायब या टूटी हुई मिली। नतीजतन, आवारा पशुओं के कभी भी एक्सप्रेस-वे पर आ जाने का खतरा बना हुआ है—जो तेज रफ्तार वाहनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
फॉग लाइट के नाम पर सिर्फ दावे
एक्सप्रेस-वे प्रबंधन का दावा है कि हर कट और संवेदनशील स्थान पर फॉग लाइटें लगाई गई हैं, लेकिन हकीकत में अधिकांश जगहों पर न तो फॉग लाइट दिखीं और न ही उनसे जुड़े चेतावनी संकेतक। घने कोहरे में वाहन चालकों को गति कम करने या सावधानी बरतने के लिए ठोस दृश्य संकेतों का अभाव साफ नजर आया। अनाउंसमेंट और चेतावनी के दावे कागजों तक सीमित दिखे।
आंकड़े बताते हैं डरावनी तस्वीर
टोल इंचार्ज तुलसीराम गुर्जर के अनुसार, आगरा सेक्टर (148 से 165 किलोमीटर) में 1 जनवरी से 15 दिसंबर के बीच 50 सड़क हादसे हुए। इनमें 100 लोग घायल हुए और 6 लोगों की जान चली गई। ये आंकड़े बताते हैं कि खतरा वास्तविक है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
हालांकि, एक्सप्रेस-वे पर कुल छह एंबुलेंस तैनात हैं, जिनमें से एक खंदौली-आगरा क्षेत्र में रहती है। सभी एंबुलेंस एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस बताई गई हैं। इसके अलावा पेट्रोलिंग वाहन गश्त कर चालकों को अलर्ट करते हैं, लेकिन जब मूलभूत सुरक्षा ढांचा ही कमजोर हो, तो ये उपाय पर्याप्त नहीं लगते।
गति सीमा घटी, पर क्या काफी है?
कोहरे में हादसों को रोकने के लिए छोटे वाहनों की अधिकतम गति सीमा 100 से घटाकर 60 किमी/घंटा कर दी गई है। टोल प्लाजा पर फॉग लाइटें लगाने और पुराने साइन बोर्ड हटाकर नए लगाने की बात भी कही गई है। मगर सवाल यह है कि क्या ये कदम जमीन पर समान रूप से लागू हुए हैं? क्योंकि निरीक्षण में कई जगहों पर व्यवस्थाएं नदारद मिलीं।
जरूरी है जवाबदेही
यमुना एक्सप्रेस-वे पर रोजाना हजारों वाहन दौड़ते हैं। ऐसे में टूटी फेंसिंग की तत्काल मरम्मत, सभी कट्स पर कारगर फॉग लाइटें, स्पष्ट चेतावनी संकेत, और कोहरे में सख्त निगरानी अब विकल्प नहीं, जरूरत बन चुकी है। यदि प्रबंधन ने समय रहते ध्यान नहीं दिया, तो ये लापरवाही किसी बड़े हादसे की कीमत पर सामने आ सकती है, जिसकी जिम्मेदारी तय करना फिर मुश्किल होगा।
एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षित सफर का वादा तभी सार्थक होगा, जब दावे नहीं, दिखने वाले और काम करने वाले इंतजाम हों।






