आठवीं फेल से ‘साइबर किंग’: गरीबी से करोड़ों तक का सफर, दुबई में बसाई ठगी की दुनिया
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संवाद 24 संवाददाता। कभी बेहद गरीबी में जिंदगी गुजारने वाला, महज आठवीं फेल युवक आज करोड़ों की अवैध संपत्ति का मालिक निकला। आगरा कमिश्नरेट पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में ऐसे ही एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने 300 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया। गिरोह का सरगना दुबई में बैठकर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था, जबकि भारत में उसके गुर्गे भोले-भाले लोगों को जाल में फंसाकर उनकी गाढ़ी कमाई लूट रहे थे।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आगरा का रहने वाला नितिन भगौर कुछ साल पहले तक एक मामूली व्यक्ति था। पढ़ाई आठवीं कक्षा से आगे नहीं बढ़ पाई, आर्थिक हालात भी बेहद कमजोर थे। लेकिन साइबर अपराध की दुनिया में कदम रखते ही उसकी किस्मत—या कहें अपराध की राह—तेजी से बदली। उसने दुबई जाकर ‘मेडलर ग्लोबल एक्सीलेंस’ और ‘मेडलर सर्विस ग्रुप’ के नाम से फर्जी कंपनियां खड़ी कीं और वहीं से साइबर ठगी का पूरा साम्राज्य संचालित करने लगा।
डिजिटल ठगी का संगठित नेटवर्क
नितिन भगौर ने भारत में अपने खास सहयोगी रवि राठौर को गैंग की कमान सौंप दी। गिरोह के सदस्य अलग-अलग तरीकों से लोगों को ठगते थे—
डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर
व्हाट्सएप व टेलीग्राम पर APK फाइल भेजकर
फर्जी UPI लिंक के जरिए रकम निकालकर
गूगल पर भ्रामक विज्ञापन चलाकर
क्रिप्टोकरेंसी में निवेश का झांसा देकर
ठगी से जुटाई गई रकम को पहले भारतीय खातों में मंगाया जाता, फिर उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर दुबई स्थित खातों तक पहुंचाया जाता। इस पूरे खेल में सरगना मोटी रकम खुद रखता और बाकी सदस्यों को कमीशन देता था।
24 गिरफ्तार, 100 से ज्यादा रडार पर
पुलिस ने ताजगंज क्षेत्र से 24 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से लैपटॉप, प्रिंटर, 26 मोबाइल फोन, चेकबुक, पासबुक, डेबिट कार्ड और फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए हैं। पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि गिरोह में बैंककर्मी, जनसेवा केंद्र संचालकों समेत 100 से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। ये लोग फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम, बैंक खाते और इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध कराते थे।
दुबई बैठे सरगना पर शिकंजा
एडीसीपी सिटी आदित्य कुमार के मुताबिक, पुलिस को रवि राठौर की लोकेशन मिल चुकी है, जबकि मुख्य सरगना नितिन भगौर के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने और उसे भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं।
यह मामला न सिर्फ साइबर अपराध की भयावहता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे डिजिटल तकनीक का दुरुपयोग कर एक साधारण व्यक्ति अपराध की दुनिया में ‘किंग’ बन बैठता है। पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर ठगों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।






