पहले विश्वयुद्ध से सेना की सेवा कर रहा परिवार, पांचवीं पीढ़ी में सरताज सिंह बने लेफ्टिनेंट
Share your love

संवाद 24 डेस्क: सेना में अधिकारी बनना हर युवा का सपना होता है, जिसे पूरा करने के लिए कड़े प्रशिक्षण और एसएसबी जैसी कठिन चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। शनिवार को देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA) में आयोजित पासिंग आउट परेड में 525 कैडेट्स को भारतीय सेना में कमीशन मिला। इन नव-नियुक्त अधिकारियों में लेफ्टिनेंट सरताज सिंह भी शामिल हैं, जिनका परिवार पिछले 125 वर्षों से लगातार देश की सेवा करता आ रहा है।
लेफ्टिनेंट सरताज सिंह 20 जाट रेजिमेंट में कमीशन हुए हैं। उनके परिवार की सैन्य परंपरा 1897 से शुरू होती है। उनके पूर्वज सिपाही किरपाल सिंह वर्ष 1897 में 36 सिख रेजिमेंट का हिस्सा बने थे और उन्होंने अफगान अभियान में भाग लिया था। इसके बाद उनके परदादा सूबेदार अजमेर सिंह ने दूसरे विश्वयुद्ध में ब्रिटिश सेना की ओर से युद्ध लड़ा और वीरता के लिए ब्रिटिश इंडिया गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित हुए।
सरताज सिंह के दादा ब्रिगेडियर हरवंत सिंह ने 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं उनके पिता ब्रिगेडियर उपिंदर पाल सिंह भी 20 जाट रेजिमेंट में अधिकारी रह चुके हैं। परिवार की इस सैन्य विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनके चाचा कर्नल हरविंदर पाल सिंह ने 1999 के कारगिल युद्ध में भाग लिया।
लेफ्टिनेंट सरताज सिंह की सैन्य परंपरा केवल पितृ पक्ष तक सीमित नहीं है। उनके ननिहाल में भी कई सदस्य भारतीय सेना में अधिकारी रह चुके हैं। उनके मामा पक्ष से कैप्टन हरभगत सिंह, कैप्टन गुरमेल सिंह, कर्नल गुरसेवक सिंह और कर्नल इंदरजीत सिंह सेना में सेवा दे चुके हैं। पहला और दूसरा विश्वयुद्ध हो या 1971 का भारत-पाक युद्ध, उनके ननिहाल से भी किसी न किसी सदस्य ने मोर्चे पर देश की रक्षा की है।
IMA की पासिंग आउट परेड में शामिल एक अन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट हरमनप्रीत सिंह रीन का परिवार भी सेना से गहराई से जुड़ा रहा है। उनके परदादा ने सिख रेजिमेंट जॉइन की थी। उनके दादा और दो भाइयों ने 1965 के भारत-पाक युद्ध में हिस्सा लिया, जिनमें से कैप्टन उजागर सिंह को सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। हरमनप्रीत के पिता हरमीत सिंह वर्तमान में मराठा लाइट इन्फैंट्री में कार्यरत हैं।
पीढ़ियों से सेना की सेवा करते आ रहे इन परिवारों की कहानियां न सिर्फ भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा को दर्शाती हैं, बल्कि यह भी साबित करती हैं कि देशसेवा की भावना कई बार विरासत बनकर अगली पीढ़ियों तक आगे बढ़ती है।






