यूपी भाजपा को नया अध्यक्ष मिलने की तैयारी: पंकज चौधरी बनेंगे 16वें प्रदेश अध्यक्ष, अब तक दो अध्यक्ष बने मुख्यमंत्री
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संवाद 24, लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश इकाई को जल्द ही नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। पंकज चौधरी का प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनना लगभग तय माना जा रहा है। औपचारिक घोषणा 14 दिसंबर को की जाएगी। इसके साथ ही वह 1980 में पार्टी की स्थापना के बाद उत्तर प्रदेश भाजपा के 16वें प्रदेश अध्यक्ष होंगे। सात बार के विधायक पंकज चौधरी को संगठनात्मक अनुभव और जमीनी पकड़ वाले नेता के रूप में देखा जाता है।
45 वर्षों में 16 अध्यक्ष, दो बने मुख्यमंत्री
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद का इतिहास गौरवशाली रहा है। अब तक इस पद पर आसीन 15 नेताओं में से दो को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला।
कल्याण सिंह, जो 1982 से 1984 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे, दो बार मुख्यमंत्री बने और बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।
राजनाथ सिंह, जो 1997 से 2000 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे, बाद में 2000 से 2002 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
ब्राह्मण नेताओं का रहा दबदबा
जातिगत दृष्टि से देखें तो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद पर सबसे अधिक बार ब्राह्मण समाज के नेताओं को मौका मिला। माधव प्रसाद त्रिपाठी (1980–1984) पहले प्रदेश अध्यक्ष बने।
कलराज मिश्र दो बार अध्यक्ष रहे और सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने का रिकॉर्ड उनके नाम है। केशरीनाथ त्रिपाठी, रमापति राम त्रिपाठी और महेंद्र नाथ पांडेय जैसे नेता भी इस पद पर रह चुके हैं।
ओबीसी और गैर-ब्राह्मण नेतृत्व को भी मिला अवसर समय-समय पर भाजपा ने सामाजिक संतुलन साधते हुए अन्य वर्गों को भी नेतृत्व सौंपा।
ओमप्रकाश सिंह और स्वतंत्र देव सिंह कुर्मी समाज से आए।
केशव प्रसाद मौर्य ने 2016–17 के दौरान पार्टी की कमान संभाली।
विनय कटियार राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे और प्रदेश अध्यक्ष भी बने।
वर्तमान और भविष्य
वर्तमान में चौधरी भूपेंद्र सिंह प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हैं, जिनका कार्यकाल 2022 से जारी है। उनके बाद पंकज चौधरी के नाम पर सहमति बन चुकी है। माना जा रहा है कि 2027 विधानसभा चुनावों से पहले संगठन को नई धार देने की जिम्मेदारी पंकज चौधरी को सौंपी जाएगी।
संगठन और सत्ता के बीच सेतु
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद हमेशा से संगठन और सत्ता के बीच एक मजबूत सेतु रहा है। कई अध्यक्ष बाद में मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री या राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदों तक पहुंचे। ऐसे में पंकज चौधरी का चयन न सिर्फ संगठनात्मक बदलाव का संकेत है, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों की भी झलक देता है।
— संवाद24






