फर्रुखाबाद में 108–102 एंबुलेंस बनीं कबाड़, स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल नीलामी प्रक्रिया शुरू होने का दावा, आधी से भी कम एंबुलेंस सक्रिय
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संवाद 24, फर्रूखाबद। फर्रुखाबाद जनपद में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली 108 और 102 एंबुलेंस सेवाएं बदहाली का शिकार हो गई हैं। विकास खंड बढ़पुर क्षेत्र में फतेहगढ़ स्थित कौशलेंद्र सिंह अस्पताल के बाहर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय के पास 20 से अधिक एंबुलेंस वर्षों से कबाड़ की हालत में खड़ी हैं। इनमें से अधिकांश एंबुलेंस लंबे समय से उपयोग में नहीं लाई गईं, जिससे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकारी मानकों के अनुसार फर्रुखाबाद जैसे जनपद को करीब 50 एंबुलेंस सेवाओं की आवश्यकता है। 108 सेवा के तहत 45 एंबुलेंस का संचालन होना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सक्रिय एंबुलेंस की संख्या आधी से भी कम रह गई है। शेष वाहन या तो तकनीकी रूप से खराब हैं या फिर उनके महत्वपूर्ण पुर्जे निकाल लिए गए हैं।
कबाड़ में तब्दील इन एंबुलेंसों के भीतर सीटें, इंजन के हिस्से और जरूरी मेडिकल उपकरण गायब पाए गए हैं। स्थानीय लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि बजट की कमी और रखरखाव में लापरवाही के चलते यह स्थिति पैदा हुई है, जिसका सीधा असर मरीजों को समय पर इलाज मिलने पर पड़ रहा है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवनींद्र कुमार ने बताया कि वर्तमान में जनपद में 108 एंबुलेंस की 22 गाड़ियां, 102 एंबुलेंस की 31 गाड़ियां और 5 एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस उपलब्ध हैं। इसके अलावा दो मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) भी संचालित हैं, जो दवा वितरण का कार्य कर रही हैं।
सीएमओ ने कबाड़ में खड़ी एंबुलेंसों को लेकर कहा कि उनकी नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। संबंधित फाइल एआरटीओ कार्यालय में लंबित है और प्रक्रिया पूरी होते ही नीलामी करा दी जाएगी।
हालांकि सवाल यह है कि जब तक नई एंबुलेंस या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती, तब तक जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं कैसे सुचारु रूप से चलेंगी। जनता को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ठोस कदम उठाकर इस गंभीर समस्या का समाधान करेगा।






