भारत के लिए जीने का समय है, मरने का नहीं: देशभक्ति हर नागरिक के लिए जरूरी, ‘टुकड़े-टुकड़े’ जैसी भाषा स्वीकार नहीं – मोहन भागवत
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संवाद 24 न्यूज डेस्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि देश को हर चीज से ऊपर रखना चाहिए। यह भारत के लिए जीने का समय है, मरने का नहीं। उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले हर व्यक्ति में देशभक्ति का भाव होना चाहिए और यहां “तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े होंगे” जैसी भाषा स्वीकार्य नहीं है।
मोहन भागवत यह बयान अंडमान में स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के गीत ‘सागर प्राण तलमला’ की 115वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में दे रहे थे। उन्होंने कहा कि समाज में छोटी-छोटी बातों पर बढ़ता टकराव यह दिखाता है कि हमारी सोच किस दिशा में जा रही है। यदि भारत को एक महान राष्ट्र बनाना है, तो सावरकर के विचारों और संदेशों को याद करना होगा।
भागवत ने कहा कि सावरकर ने कभी खुद को किसी क्षेत्र, जाति या प्रांत तक सीमित नहीं किया। उन्होंने हमेशा राष्ट्र की सोच को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि हमें सभी प्रकार के सामाजिक और वैचारिक टकरावों से ऊपर उठकर यह मानना होगा कि हम सब भारत हैं और भारत सबसे पहले है।
RSS प्रमुख ने यह भी कहा कि सावरकर ने बिना किसी निजी स्वार्थ के देश के लिए काम किया। यदि हम अपने निजी हितों को पीछे रखकर राष्ट्रहित में कार्य करें, तभी भारत को विश्व गुरु बनाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के लिए काम करने के लिए साधु बनना जरूरी नहीं है—व्यक्ति प्रोफेशनल बने, पैसा कमाए, लेकिन देश को कभी न भूले।
भागवत के हालिया प्रमुख बयान
1 दिसंबर को पुणे में RSS के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने कहा था कि आज विश्व मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात ध्यान से सुनी जाती है, जो भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत को दर्शाता है। भारत अब दुनिया में अपना उचित स्थान प्राप्त कर रहा है।
वहीं, 18 नवंबर को गुवाहाटी में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, भारत और हिंदू एक ही सभ्यता का हिस्सा हैं और हिंदू कोई केवल धार्मिक पहचान नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक पहचान है।






